Argentina: भिखारियों का देश बना अर्जेंटीना, 104% महंगाई बढ़ने से मेसी के देश में विकराल हुए हालात
अर्जेंटीना के महंगाई दर ने हर चार में एक व्यक्ति को गरीबी में धकेल दिया है, जो 1900 के दशक की शुरुआत में दुनिया के सबसे धनी लोगों वाले देशों में से एक था। लेकिन अब ये देश भुखमरी की तरफ बढ़ रहा है।

Argentina Inflation: दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना, जो मशहूर खिलाड़ी लियोनेल मेसी का देश है, वो काफी बुरे हालात से गुजर रहा है। अर्जेंटीना, फिलहाल विश्व का वो देश बन गया है, जहां पर महंगाई दर 100 प्रतिशत को पार कर गया है।
अर्जेंटीना में इस वक्त 104 प्रतिशत महंगाई दर है और ये स्थिर भी नहीं है, बल्कि देश में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। महंगाई और अस्थिर आर्थिक हालात ने अर्जेंटीना के लोगों को काफी तेजी से लोगों को पैसा बचाकर रखने के लिए मजबूर कर दिया है। देश में लोगों के सैलरी की वैल्यू कम हो रही है, लिहाजा अर्जेंटीना के लोगों का केन्द्रीय वामपंथी सरकार के खिलाफ गुस्सा और हताशा लगातार बढ़ता जा रहा है।
दक्षिण अमेरिका का दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला ये देश, जो एक महत्वपूर्ण अनाज निर्यातक देश रहा है, वहां पर सिर्फ अकेले अप्रैल महीने में 7.5 प्रतिशत महंगाई दर बढ़ी है, जिससे देश के आर्थिक हालात को समझा जा सकता है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक पोल के मुताबिक, इस साल के अंत तक देश की वार्षिक महंगाई दर 130 प्रतिशत के करीब तक जाने की संभावना है, जिससे स्थिति और विकराल हो जाएगी।
अर्जेंटीना में लगातार बढ़ रही गरीबी
अर्जेंटीना के महंगाई दर ने हर चार में एक व्यक्ति को गरीबी में धकेल दिया है, जो 1900 के दशक की शुरुआत में दुनिया के सबसे धनी लोगों वाले देशों में से एक था। लेकिन अब ये देश कर्ज, मुद्रा संकट के साथ-साथ उच्च मुद्रास्फीति के साथ बुरी तरह जूझ रहा है।
देश के घटते विदेशी मुद्रा भंडार ने सरकार के वित्त को खतरे में डाल दिया है।
अर्जेंटीना के रहने वाले 60 साल के कार्लोस अंद्राडा ने रॉयटर्स को बताया, कि "उन्होंने हमें भिखारियों के देश में बदल दिया है।"
देश की राजधानी ब्यूनस आयर्स के एक बाजार में सब्जी खरीद रहे कार्लोस अंद्राडा बताते हैं, कि लोगों के आर्थिक हालात बुरी तरह से बिगड़ गये हैं। उन्होंने कहा, कि "ये काफी निराश करने वाले हालात हैं, क्योंकि जीवन भर काम करने के बाद, आपको सिर्फ एक टमाटर या एक शिमला मिर्च खरीदने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।"
अर्जेंटीना की नाजुक आर्थिक स्थिति पिछले साल से एक ऐतिहासिक सूखे के बाद और बढ़ गई है। सूखे की वजह से देश में सोयाबीन, मक्का और गेहूं के उत्पादन को बुरी तरह से प्रभावित किया है, जिससे अर्जेंटीना का निर्यात घट गया है। निर्यात घटने से विदेशी मुद्रा भंडार कम हुआ है और मुद्रा संकट की वजह से सरकार की महंगाई से लड़ने की क्षमता कमजोर हो गई है।

विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता की वजह से अर्जेंटीना की करेंसी डॉलर के मुकाबले डूबने लगी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अर्जेंटीना की स्थानीय करेंसी पेसो का वैल्यू डॉलर के मुकाबले, 500 के स्तर को पार कर गया है। जिसने अर्जेंटीना के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ 44 अरब डॉलर की डील को प्रभावित किया है।
70 साल के ओलिविया मारिया बेलब्रूनो ने कहा, कि "जब मैं पिछली बार बाजार आया था, तो मैंने 300 पेसो प्रति किलो मीर्च खरीदा था, जो अब 600 पेसो प्रति किलो हो गया है।"
उन्होंने कहा, कि "ये हमारी सरकार है और हम नागरिकों को इसके बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि हम ही हैं जो उन्हें हमारा वोट देते हैं।"
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सरकार के सामने चुनावी संकट
देश की सत्तारूढ़ गठबंधन पेरोनिस्ट अगस्त महीने में होने वाले प्राथमिक चुनावों और अक्टूबर में होने वाले आम चुनाव से पहले कीमतों को कम करने के लिए जूझ रहा है, जहां उच्च कीमतें और गरीबी उसके पद पर बने रहने की संभावनाओं को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा रही है। सरकार को मतदाताओं के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है।

राष्ट्रपति अल्बर्टो फर्नांडीज की वामपंथी सरकार ने देश की मुख्य वस्तुओं - सोया, मांस और गेहूं जैसी कृषि वस्तुओं के निर्यात को प्रतिबंधित कर या फिर भारी टैक्स लगाकर अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की कोशिश कर रही है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि, इन उपायों ने अर्जेंटीना के आर्थिक दर्द को और बढ़ाया ही है।
यानि, मेसी का देश आर्थिक संकट में फंसा हुआ है और देश में नकदी की किल्लत है, लिहाजा देखना दिलचस्प होगा, कि देश आखिर कब तक इन समस्याओं से पार पाता है।












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