अमेरिकी विदेश मंत्री पांच साल बाद बीजिंग पहुंचे, जानिए एंटनी ब्लिंकन का ये चीन दौरा क्यों अहम है?
एंटनी ब्लिंकन का यह दौरा फरवरी में ही होना था लेकिन अमेरिका में चीनी जासूस गुब्बारे पाए जाने के बाद के आरोप-प्रत्यारोपों के बाद ये दौरा टल गया था।
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन रविवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे हैं। चीन और अमेरिका के संबंधों में कोरोना के बाद से ही तनाव से गुजर रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी विदेश मंत्री का चीन दौरान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका के किसी विदेश मंत्री की पिछले पांच साल में यह पहली चीन यात्रा है। ट्रम्प के दौर में 2018 में माइक पोम्पियो ने बीजिंग का दौरा किया था। ब्लिंकन का चीनी विदेश मंत्री किन गैंग और शीर्ष राजनयिक वांग यी से मिलने की उम्मीद है।

हालांकि अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि क्या वह पोम्पेओ की तरह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर पाएंगे। हालांकि उल्लेखनीय ये है कि बीते शुक्रवार को शी जिनपिंग अमेरिका के ही सबसे धनवान लोगों में से एक में माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स से मिल चुके हैं।
एंटनी ब्लिंकन को यह दौरा फरवरी में ही करना था लेकिन अमेरिका में चीनी जासूस गुब्बारे पाए जाने के बाद के आरोप-प्रत्यारोपों के बाद ये दौरा टल गया था। ताइवान मामले को लेकर अमेरिका-चीन में बीते साल नैंसी पेलोसी की ताइपे यात्रा के बाद से ही तनाव है। ऐसे में ये दौरा अमेरिका और चीन के रिश्तों के लिए अहम हो सकता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन की इस यात्रा का सबसे मुख्य फोकस दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारना है। इन दौरान दोनों ही देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुद्दों और तनाव खत्म करने को लेकर चर्चा होगी। इस दौरान दोनों गलत धारणाओं को दूर करने और गलत अनुमानों को रोकने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं।
चीन दौरे से पहले ब्लिंकन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वे बीजिंग से उन मुद्दों पर बातचीत करेंगे जो अमेरिका के चिंता का विषय हैं। ब्लिंकन ने कहा कि अगर हम चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा टकराव में न बदले तो इसके लिए बातचीत जरूरी है।
ब्लिंकन ने बताया कि वो चीन में कैद रह रहे अमेरिकी नागरिकों का मुद्दा भी उठाएंगे। अमेरिका हमेशा से ही इन गिरफ्तारियों को राजनीति से प्रेरित बताता रहा है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच ट्रेड और व्यापारिक विमानों की संख्या बढ़ाने को लेकर भी चर्चा होगी।
आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के दौरान चीन में बनी वस्तुओं के निर्यात पर अरबों डॉलर का टैक्स लगा दिया था। जो बाइडेन के पद संभालने के बाद से निर्यात पर लगे महंगे टैक्स हटाए नहीं गए हैं।












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