यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद पहली बार दिल्ली में मिले अमेरिका और रूस के विदेश मंत्री, जानें क्या बात हुई?
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ऐसा पहली बार है जब अमेरिका और रूस के विदेश मंत्रियों की आमने-सामने मुलाकात हुई है। इससे पहले दोनों नेता जनवरी 2022 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में मिले थे।

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नई दिल्ली में चल रही जी-20 बैठक से इतर गुरुवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और सर्गेई लावरोव की मुलाकात हुई। हालांकि दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात महज 10 मिनट ही चली। इस दौरान दोनों ने यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत की। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ऐसा पहली बार है जब अमेरिका और रूस के विदेश मंत्रियों की आमने-सामने मुलाकात हुई है। इससे पहले दोनों नेता जनवरी 2022 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में मिले थे।
जंग खत्म करने पर हुई बात
रिपोर्ट के मुताबिक मीटिंग खत्म होने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने कहा कि उन्होंने अपने समकक्ष रूसी मंत्री सर्गेई लावरोव से कहा कि वो जंग को खत्म करें। उन्होंने लावरोव से बैठकर बातचीत करने और मिलकर इसका हल निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि G20 देशों के नेता भी चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच शांति हो। हम डिप्लोमेसी के जरिए जंग खत्म करने के पक्ष में हैं। इसके लिए हम यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन इसमें कोई दिखाई।
पॉल व्हेलन को छोड़ने की मांग की
जी20 बैठक के लिए रवाना होने से ठीक पहले ताशकंद में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि रूस यूक्रेन से युद्ध खत्म करने को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि जी20 बैठक में उनकी रूस के विदेश मंत्री से मुलाकात करने की कोई योजना नहीं है। हालांकि दोनों नेताओं के बीच कुछ ही वक्त के लिए लेकिन संवाद हुआ। अमेरिकी विदेश मंत्री ने रूस की जेल में बंद अमेरिकी नागरिक पॉल व्हेलन को छोड़ने पर भी सर्गेई लावरोव से बात की। बता दें कि पॉल को 2018 में जासूसी के आरोप में रूस में गिरफ्तार किया गया था।
न्यू स्टार्ट संधि शुरू करने की अपील
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस मुलाकात के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से न्यू स्टार्ट संधि को रोकने के फैसले को वापस लेने के लिए कहा। ब्लिंकन ने कहा कि ये एक गैरजिम्मेदाराना फैसला है। रूस को इसे बदलना चाहिए। इस पर एकमत होना दोनों देशों के हित में है। हम बड़ी न्यूक्लियर पॉवर्स हैं, इसलिए दुनिया भी में हमसे एकमत होने की उम्मीद करती है।
क्या है न्यू स्टार्ट संधि?
'न्यू स्टार्ट' संधि पर 2010 में रूस और अमेरिका ने हस्ताक्षर किए थे। यह संधि दोनों देशों द्वारा तैनात किए जा सकने वाले लंबी दूरी के परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करती है और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल के उपयोग को भी सीमित करती है। हाल ही में रूस ने इस संधि को तोड़ दिया था।












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