कल भारत आएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, क्यों खास है भारत-अमेरिका की 2+2 वार्ता?
विदेश और रक्षा संबंधों को नई उचाई देने के लिए कल 10 नवंबर को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन भारत आ रहे हैं। ब्लिंकन के साथ रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन भी भारत आएंगे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में हमास-इजराइल युद्ध के फैलाव की संभावना पर चर्चा हो सकती है।
शुक्रवार को राजधानी नई दिल्ली में भारत, अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच '2+2 डायलॉग' कही जाने वाली वार्षिक द्विपक्षीय बैठक होनी है। इस दो दिवसीय बैठक में भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन करेंगे।

दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाले इन महत्वपूर्ण बैठकों से पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को कहा कि भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को गहरा करने पर केंद्रित होगी।
विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से कहा, ''भारत एक ऐसा देश है, जिसके साथ हमारी गहरी साझेदारी है। वह (ब्लिंकन) टू प्लस टू सुरक्षा वार्ता के लिए रक्षा मंत्री ऑस्टिन के साथ भारत जाएंगे। इसलिए मुझे उम्मीद है कि सुरक्षा सहयोग और साझेदारी को गहरा करना निश्चित रूप से उन विषयों में शामिल होगा, जिन पर चर्चा की जाएगी।''
पटेल ने एक सवाल के जवाब में कहा, ''यह कुछ ऐसा है, जिसे इस वर्ष की शुरुआत में पीएम मोदी मोदी की राजकीय यात्रा के दौरान स्पष्ट रूप से उठाया गया था। मुझे पता है कि मंत्री वहां जाने और अपने समकक्षों के साथ इस पर सीधे बातचीत करने के लिए उत्सुक हैं।''
'2+2 वार्ता' विदेशी कूटनीति में इस्तेमाल होने वाले शब्द हैं जिनका मतलब दो देशों के बीच रक्षा और विदेश नीतियों पर बातचीत से है। भारत और अमेरिका के बीच पहली बार 2018 में इसकी शुरुआत डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल से शुरू हुई।
इस बार भारत की राजधानी नई दिल्ली में पांचवीं बार बैठक का आयोजन हो रहा है। ये बैठक बारी-बारी से नई दिल्ली और वॉशिंगटन में होती है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समेत वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होती है।
आपको बता दें कि भारत '2+2 वार्ता' जापान, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों के साथ भी करता है, लेकिन ये विदेश सचिव और रक्षा सचिव स्तर पर ही हो पाती है। सिर्फ अमेरिका ही वो देश है जिसके साथ भारत मंत्री स्तर की वार्ता करता है।












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