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भारत को धमकाने के खिलाफ US सीनेट में खतरनाक एंटी-पाकिस्तान बिल पेश, शहबाज सरकार के हाथ-पांव फूले

US Senate Anti-Pakistan Bill: पाकिस्तान ने एक दिन पहले बयान देते हुए कहा था, कि वो अमेरिका के लिए अपने सदाबहार दोस्त चीन की दोस्ती को कुर्बान नहीं कर सकता है और अब अमेरिका में पाकिस्तान का दाना पानी हमेशा के लिए बंद करने की व्यवस्था हो गई है।

अमेरिकी सीनेट में एंटी-पाकिस्तान बिल पेश किया गया है, जिससे शहबाज शरीफ की सरकार के हाथ-पांव फूल गये हैं। इस बिल में कहा गया है, कि पाकिस्तान भारत को धमकाने की कोशिश करता है, इसलिए अमेरिका को पाकिस्तान को हर सिक्योरिटी मदद बंद करनी चाहिए।

Marco Rubio

भारत को लेकर अमेरिकी सीनेट में एंटी-पाकिस्तान बिल

डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर मार्को रुबियो ने स्थानीय समय के मुताबिक शुक्रवार को एंटी-पाकिस्तान बिल पेश किया, जिसका मकसद भारत के प्रति पाकिस्तान की धमकियों के लिए उसे दी जाने वाली सुरक्षा सहायता को बंद करना है।

'अमेरिका-भारत रक्षा सहयोग अधिनियम' के तहत पाकिस्तान द्वारा "भारत के विरुद्ध आतंकवाद और छद्म समूहों के माध्यम से आक्रामक बल के प्रयोग" पर रिपोर्ट के तहत डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के सीनेटर ने सीनेट में इस बिल को पेश किया है और अगर ये बिल पास होता है, तो पाकिस्तान को अमेरिका से मिलने वाली हर सहायता बंद कर दी जाएगी।

पाकिस्तान के जियो न्यूज के मुताबिक, प्रस्तावित विधेयक का मकसद "यदि पाकिस्तान, भारत के विरुद्ध आतंकवाद प्रायोजित करता पाया जाता है, तो उसे सहायता देना बंद करना है" भी है।

सीनेटर रुबियो ने चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अमेरिका-भारत साझेदारी को मजबूत करने का भी प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा, कि नई दिल्ली के साथ रणनीतिक कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य संबंधों को बढ़ाना जरूरी है।

इस विधेयक का उद्देश्य, भारत को उसकी क्षेत्रीय अखंडता के लिए बढ़ते खतरों के जवाब में सहायता और आवश्यक सुरक्षा सहायता प्रदान करना है।

सीनेटर रुबियो ने अपने विधेयक में भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के संबंध में जापान, इजरायल, दक्षिण कोरिया और अन्य उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सहयोगियों जैसे अमेरिकी सहयोगियों के समान दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है।

इसके अलावा, उन्होंने भारत को प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला करने के अधिनियम (CAATSA) प्रतिबंधों से सीमित छूट प्रदान करने का भी सुझाव दिया। आपको बता दें, कि CAATSA - अमेरिका का एक काफी कठोन कानून है, जो अमेरिकी प्रशासन को उन देशों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है, जो रूस से प्रमुख रक्षा हार्डवेयर खरीदते हैं।

यदि विधेयक को मंजूरी मिल जाती है, तो भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना किए बिना रूस से ऐसे हथियार और उपकरण खरीदने की अनुमति मिल जाएगी, जिनका उपयोग वर्तमान में भारतीय सेना द्वारा किया जाता है।

इसके अलावा, यह कानून "कांग्रेस को यह एहसास दिलाने का भी प्रयास करता है कि भारत को रक्षा लेख, रक्षा सेवाएं, डिजाइन और निर्माण सेवाएं, और प्रमुख रक्षा उपकरण बेचने के लिए प्रस्ताव पत्रों के प्रमाणन पर शीघ्र विचार करना अमेरिकी हितों के मुताबिक है और यह शांति और स्थिरता के हित में है, कि भारत के पास खतरों को रोकने के लिए आवश्यक क्षमताएं हों।"

इस बिल का मकसद सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए भारत के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए विदेश मंत्री को अधिकृत करना भी है।

इसके अलावा, विधेयक में दो वर्षों के लिए भारत को अतिरिक्त रक्षा सामग्री भेजने में तेजी लाने, अन्य सहयोगियों के समान भारत को दर्जा देने और नई दिल्ली के साथ अंतर्राष्ट्रीय सैन्य शिक्षा एवं प्रशिक्षण सहयोग का विस्तार करने का भी प्रावधान है।

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