अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया तक छात्रों का गाजा के समर्थन में तांडव, बाइडेन का थर्ड डिग्री, अल्बनीज क्या करेंगे?
Pro-Palestine Students' Protests: कोलंबिया यूनिवर्सिटी से गाजा में इजराइली ऑपरेशन के खिलाफ शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी फैलने लगा है। हालांकि, कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन को काफी हद तक कुचल दिया गया है, लेकिन अब कई और देशों से भी प्रदर्शन को लेकर रिपोर्ट्स आ रही हैं।
फिलिस्तीनी प्रदर्शन और धरने अमेरिकी विश्वविद्यालयों से लेकर विदेशों तक फैल गए हैं। दो हफ्ते पहले कोलंबिया विश्वविद्यालय में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू किया था, जहां दर्जनों छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में भी छात्रों को सस्पेंड किया गया है।

ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, इटली, फ्रांस और अन्य विश्वविद्यालयों में भी छात्र और प्रदर्शनकारी इजराइल पर एक्शन की मांग कर रहे हैं। छात्रों की मांग है, कि इजराइल को हथियारों की डिलीवरी रोकी जाए।
यूके में गाजा के समर्थन में प्रदर्शन
बुधवार को यूके के विलियम टी. यंग लाइब्रेरी के लॉन में संघर्ष से तबाह फिलिस्तीन शहर गाजा के लिए एक रैली का आयोजन किया गया है। जिसको लेकर यूके प्रवक्ता क्रिस्टी विलेट ने मंगलवार को कहा, कि "यूके के परिसर में बाहरी स्थान कानून द्वारा सार्वजनिक मंचों के लिए नामित हैं, जिसका अर्थ है कि समुदाय के सदस्य सार्वजनिक क्षेत्रों में प्रदर्शन कर सकते हैं, जब तक कि वे कक्षाओं में बाधा न डालें, इमारतों और बुनियादी ढांचे तक पहुंच को न रोकें या दूसरों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा न करें।"
द टेलीग्राफ के मुताबिक, रसेल ग्रुप के छात्रों ने वारविक विश्वविद्यालय में एक कैंप बनाया है। वारविक स्टेंड्स विद फ़िलिस्तीन नाम के एक समूह ने, जिसमें कर्मचारी और छात्र शामिल थे, उसने पियाजा पर कब्ज़ा कर लिया है। ये समूह विश्वविद्यालय से उन कंपनियों के साथ संबंध तोड़ने की मांग कर रहा है, जिनके बारे में उसका दावा है, कि वे रक्षा ठेकेदारों सहित गाजा में इजरायल के युद्ध का समर्थन कर रही हैं।
इस बीच, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य चौक पर गाजा पर इजरायल की बमबारी के विरोध में एक रैली आयोजित की है।
ऑस्ट्रेलिया में भी फैली प्रदर्शन की आग
सिडनी विश्वविद्यालय के छात्रों ने पिछले मंगलवार को गाजा के समर्थन में एक शिविर लगाया था। शिविर में लगातार हर रात 40 से ज्यादा और लगभग 60 तक छात्र प्रदर्शन में पहुंचते हैं। पिछले बुधवार को एक रैली में लगभग 200 लोग शामिल हुए थे। तब से यह आंदोलन फैल गया है और मेलबर्न विश्वविद्यालय के छात्र भी गुरुवार को प्रदर्शन में शामिल हो गये हैं।
वहीं, क्वींसलैंड विश्वविद्यालय और कैनबरा में ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में सोमवार को गाजा के समर्थन में शिविर लगाए गए हैं। बुधवार को पर्थ में कर्टिन यूनिवर्सिटी में एक शिविर लगाए जाने की संभावना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक कैंप बने रहेंगे।
ऑस्ट्रेलियाई प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकन प्रदर्शनकारियों ने सराहना की है, जिनमें न्यूयॉर्क के न्यू स्कूल और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के छात्र शामिल हैं।
सिडनी विश्वविद्यालय में कैंप लगाने वाले 25 साल के छात्र शोवन भट्टाराई हैं, जो इतिहास के छात्र हैं और उनके समर्थन में दर्जनों छात्र, कर्मचारी और फिलीस्तीन समर्थन प्रदर्शन में शामिल हो गये हैं।
फ्रांस में भी गाजा के समर्थन में उतरे छात्र
वहीं, फ्रांस के प्रतिष्ठित पेरिस इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिकल स्टडीज में भी छात्रों का प्रदर्शन देखा जा रहा है। साइंसेज पो के नाम से जाना जाने वाला विशिष्ट विश्वविद्यालय, जिसमें राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधान मंत्री गेब्रियल अटल भी पढ़ चुके हैं, वहां भी गाजा के समर्थन में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहा है। शुक्रवार को, छात्रों ने परिसर की एक इमारत तक पहुंच को ब्लॉक कर दिया। जिसके बाद यूनिवर्सिटी को ऑनलाइन क्लास का संचालन करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सबसे पहले केंद्रीय परिसर की एक इमारत पर कब्जा कर लिया और उसके प्रवेश द्वार को कूड़ेदानों, लकड़ी के चबूतरे और एक साइकिल से ब्लॉक कर दिया। वे फिलिस्तीनी समर्थक नारे लगाते हुए, इमारत की खिड़कियों पर भी एकत्र हुए और फ़िलिस्तीनी झंडे और तख्तियां लटका दीं।
लिहाजा सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या इन देशों में भी अमेरिका की तरह प्रदर्शन को कुचला जाएगा, या फिर इन देशों में प्रदर्शन को चलने दिया जाएगा?












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