कनाडा, ब्रिटेन में निशाने पर हिन्दू, जमा हो रहीं एंटी इंडिया ताकतें, मोदी सरकार कर सकती है बड़ा फैसला
नई दिल्ली, 21 सितंबरः भारत सरकार ब्रिटेन और कनाडा में उभर रहे सिख कट्टरपंथ और ब्रिटेन में हिंदू धर्म के प्रतीकों संग हो रहे तोड़फोड़ और हमलों की बारीकी से निगरानी कर रही है और राष्ट्रमंडल समुदाय के इन दो सदस्यों को एक संक्षिप्त संदेश भेजने के लिए विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है। भारत सरकार इस बात को समझ रही है कि किस कदर इन दोनों देशों में भारत विरोधी भावनाएं भड़काई जा रही हैं और ये दोनों ही देश इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।

हिंदू मंदिर में तोड़फोड़, भारत ने दर्ज कराया विरोध
एक तरफ जहां भारत ने इंग्लैंड के लीसेस्टर शहर में भारतीय समुदाय के खिलाफ हिंसा की निंदा की है और इस मामले पर हाई कमीशन ने ब्रिटिश अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई और इन हमलों में प्रभावितों को सुरक्षा देने की भी मांग की है। वहीं सरकार यह भी देख रही है कि कैसे ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियां अलगाववाद आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए सिख कट्टरपंथियों द्वारा किए जा रहे धन संग्रह की ओर आंखें मूंदे हुए बैठी है।

भारत विरोधी प्रदर्शनों को शह दे रहा कनाडा
मोदी सरकार ने इन घटनाओं से आंख न मूंदने का फैसला किया है और वह दोनों देशों में इन भारत विरोधी घटनाओं का जवाब देगी। विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने यूके और कनाडा में इन घटनाओं का कड़ा संज्ञान लिया है और भारत की प्रतिक्रिया इसके अनुरूप ही होगी। एक तरफ जहां कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में रूस के द्वारा शुरू कराए जा रहे 'जनमत संग्रह' की कड़ी निंदा की है, वहीं, उन्होंने 18 सितंबर को पर ब्रैम्पटन, ओंटारियो में प्रतिबंधित 'सिख फॉर जस्टिस' संगठन द्वारा कराए गए जनमत संग्रह पर आंखें मूंद ली हैं।

कनाडा में जनमत संग्रह रोकने भारत ने भेजा था संदेश
इससे पहले नरेंद्र मोदी सरकार ने ग्लोबल अफेयर्स कनाडा को अगस्त से सितंबर के बीच 3 राजनयिक संदेश भेजे और कनाडा की ट्रूडो सरकार से अवैध जनमत संग्रह को रोकने के लिए कहा था। इसके बाद ट्रूडो सरकार ने 16 सितंबर को मोदी सरकार को जवाब दिया कि कनाडा, भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करता है और इस तथाकथित जनमत संग्रह को मान्यता नहीं देता है। हालांकि कनाडा सरकार ने यूक्रेन के मामले की तरह कट्टरपंथी सिखों द्वारा आयोजित जनमत संग्रह की कोई निंदा नहीं की न ही यूक्रेन मामले की तरह कोई छोटा सा भी ट्वीट करना जरूरी समझा।

ट्रूडो सरकार ने बनाया बहाना
ट्रूडो सरकार ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कनाडा में व्यक्तियों को इकट्ठा होने और अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है जब तक कि वे शांतिपूर्वक और कानूनी रूप से ऐसा करते हैं। इसके बाद कनाडा की प्रतिक्रिया में यह भी कहा गया है कि वे ओंटारियो के ब्रैम्पटन में स्वामीनारायण मंदिर में हाल ही में हुई बर्बरता से व्यथित हैं। सरकार ने कहा कि इस घटना के मूल्यांकन और समीक्षा के लिए रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस के साथ सभी जानकारी साझा की गई है।

भारत जल्द ले सकता कोई बड़ा फैसला
लगातार भारत विरोधी मामलों के पीछे एक तथ्य यह भी है कि पूरे सिख कट्टरपंथी आंदोलन को कनाडा और ब्रिटेन में वित्त पोषित किया जाता है। खासकर कनाडा जो कि पंजाब के गैंगस्टरों का केंद्र है। भारत ने न केवल ब्रिटेन, कनाडा बल्कि अमेरिका को भी यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत विरोधी सिख कट्टरपंथियों के खिलाफ कार्रवाई न करना अपराध में मिली भगत के समान है।












Click it and Unblock the Notifications