कोरोना के कहर के बीच विशेषज्ञों ने दी दुनिया में जल्द इस नई महामारी के फैलने की चेतावनी

पूरी दुनिया में अब तक वायरस की वजह से संक्रमितों की संख्या 4.3 मिलियन पर पहुंच गई है जबकि तीन लाख लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं अब विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस के बेकाबू होते हालात के एक नई महामारी के फैलने की चेतावनी दी हैं। विशेषज्ञों ने दुनिया भर को चेताया हैं कोरोनावायरस के बाद ये महामारी फैल सकती

नई दिल्ली। पूरी दुनिया में अब तक कोरोनावायरस की वजह से संक्रमितों की संख्या 4.3 मिलियन पर पहुंच गई है जबकि तीन लाख लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं अब विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस के बेकाबू होते हालात के बीच एक नई महामारी के फैलने की चेतावनी देकर और डरा दिया हैं। विशेषज्ञों ने दुनिया भर को चेताया हैं कि कोरोनावायरस के बाद ये महामारी फैल सकती हैं जिससे दुनिया के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता हैं।

यहां से कोई महामारी पनप सकती है

यहां से कोई महामारी पनप सकती है

दरअसल प्रकृति का हमने जो वर्षों से दोहन किया हैं इस संकट को देख कर लग रहा हैं कि प्रकृति हमसे नाराज होकर अपना गुस्‍सा इस तरह निकाल रही हैं। इस नई महामारी जिसके विशेषज्ञ संकेत दे रहे हैं वह क्षेत्र पृथ्वी का फेफड़ा कहलाता है। पर्याविदों ने जिस महामारी के फैलने का संकेत दिया हैं उसका ताल्लुक अमेजन के वर्षा वन से हैं। उनकी चेतावनी हैं कि आने वाले दिनों में अमेजन के वर्षा वन से कोई महामारी पनप सकती है।

फैल सकती हैं ये बीमारी

फैल सकती हैं ये बीमारी

इसका बड़ा कारण अमेजन के जंगलों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे जंगली जानवरों के निवास स्थान पर हमला हो रहा है। जिसका खतरनाक प्रभाव देखने को मिल सकता है। पारिस्थितिकी तंत्र पर शोधकर्ताओं का कहना है कि शहरीकरण से जूनोटिक बीमारियों का जोखिम बढ़ गया है। जूनोटिक बीमारी में जानवर बीमार नहीं होते बल्कि मनुष्यों को रोगी बनाने की क्षमता होती है। इस श्रेणी में कोरोना वायरस भी शामिल है। जिसके संबंध में वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वास्तव में ये इंसानों से पहले चमगादड़ में फैला और फिर चीन के वुहान में संक्रमण ने घातक रूप धारण कर लिया।

ये महामारी अमेजन के जंगलों से पैदा हो सकती है

ये महामारी अमेजन के जंगलों से पैदा हो सकती है

ये चेतावनी ब्राजील के पर्यावणविद् डेविउ लापोला ने दी हैं। उन्‍होंने बताया कि कोरोनावायरस से कोरोना वायरस महामारी के बाद दुनिया में एक और महामारी आ सकती है और ये महामारी अमेजन के जंगलों से पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस प्रकोप के दौरान बड़ी मात्रा में वनों की कटाई के कारण अमेजन के जंगलों में नई बीमारी पैदा होना खतरा उत्पन्‍न होने लगा हैं। लापोता ने उदाहरण देते हुए बताया कि एचआईवी, डेंगू बुखार, इबोला भी इसी तरह पैदा हुए थे। यह सभी वायरस पारिस्थितिक असंतुलन के कारण बड़े पैमाने फैले और इन वायरस ने मनुष्‍य जाति के लिए संकट खड़ा कर दिया। लापोता बताते हैं अब तक अधिकतर ऐसे वायरस प्रकोपों को दक्षिण एशिया और अफ्रीका में केंद्रित किया गया है जिन्हें अक्सर चमगादड़ की कुछ प्रजातियों से जोड़ा जाता हैं लेकिन अमेजन की अपार जैव विविधता इस क्षेत्र को दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना वायरस जोन बना सकती है।

अमेजन के जंगल वायरस का एक बड़ा भंडार हैं

अमेजन के जंगल वायरस का एक बड़ा भंडार हैं

वर्षों से इस विषय पर शोधकर्ताओं ने कहा कि तेजी से हो रहे वनों के कटने के कारण जंगली क्षेत्रों के शहरीकरण से जूनोटिक बीमारी बढ़ सकती हैं। ये बीमारी जंगली जानवरों से मनुष्यों में फैल जाती है। 38 वर्षीय पर्यवरण विशेषज्ञ लापोला ने एक साक्षात्कार में बताया कि अमेजन के जंगल वायरस का एक बड़ा भंडार हैं। जंगलों पर पिछले कई वर्षों से शोध कर रहे लापोता बताते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा वर्षावन तेजी से खत्म हो रहा है। राष्ट्रपति जायर बोल्सनरो के कार्यकाल के पहले साल में ब्राजील के अमेजन में वनों की कटाई 85 प्रतिशत तक बढ़ गई थी। इस साल भी बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई जारी है।

पारिस्थितिक असमानता पैदा होने से मनुष्यों पर मंडरा रहा खतरा

पारिस्थितिक असमानता पैदा होने से मनुष्यों पर मंडरा रहा खतरा

जनवरी से अप्रैल तक ब्राजील के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ने 1202 वर्ग किलोमीटर तक के पेड़ों कटवा डाले। लापोला ने कहा यह बुरी खबर है न केवल पृथ्‍वी के के लिए बल्कि मानव जीवन और मानव स्‍वास्‍थ्‍य के लिए ये भयावह परिस्थिति हैं। उन्‍होंने कहा कि जब आप पारिस्थितिक असमानता पैदा करते हैं, तब एक वायरस जानवरों से मनुष्यों में पैदा हो सकता है। अमेजन के जंगलों का प्रयोग जिस तरह से शहरीकरण के लिए हो रहा है, वो नहीं होना चाहिए। इन वनों में अवैध किसानों, खनिकों और लकड़हारों द्वारा बहुत बड़ी मात्रा में कटाई की जा रही हैं। विशेषज्ञ ने कहा कि हमें समाज और वर्षावनों के बीच संबंध को मजबूत करने की आवश्यकता है अन्यथा, दुनिया को अधिक प्रकोप का सामना करना पड़ सकता है।

अमेजन के जंगल का ये हो गया हाल

अमेजन के जंगल का ये हो गया हाल

आपने कुछ समय पहले दुनिया के सबसे बड़े जंगल अर्थात अमेजन के जंगल में आग की खबरें सुनी होगी जो कई दिनों तक सुलगती रहती हैं और लाखों जानवरों की मौत का कारण बनी थी। जंगल न केवल जैव विविधता के पनाहगार है, बल्कि यह इंसान के लिए भी अत्यंत जरुरी हैं। पिछले साल जब अमेजन के जंगल में आग लगी थी तो पूरी दुनिया में हाय-हाय होने लगा था, क्योंकि दुनिया को 20 प्रतिशत ऑक्सीजन इन्हीं वर्षावनों से मिलता है।कभी अमेजन एक घना जंगल हुआ करता था। इस विशाल जंगल में हजारों जलधाराएं बहा करती थीं। इस जंगल का अपना एक ईकोसिस्टम था। यह अपना खुद का बादल बनाता था और बारिश भी करता था। एक समय था जंगल में गगनचुंबी पेड़ों के चंदोवे धरती को इस तरह से ढंक लिया करते थे कि जमीन पर सूरज की रोशनी भी नहीं पहुंच पाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अमेजन के जंगलों में लगने वाली आग की वजह से यह जंगल लगातार सिकुड़ता जा रहा है।अमेजन के जंगल को दुनिया का सबसे बड़ा जंगल माना जाता है। विश्व के एक तिहाई मुख्य वन यहां हैं, जो प्रति वर्ष 90 से 140 अरब टन कार्बन सोख रहे हैं। इससे ग्लोबल वॉर्मिंग रोकने में मदद मिल रही है।
इस जंगल में 30 हजार प्रजाति के वृक्ष हैं। 2.5 हजार किस्म की मछलियां हैं तो वहीं 1.5 हजार किस्म के परिंदे रहते हैं। इसके अलावा इस जंगल में 500 स्तनधारी, 550 सरीसृप और करीब 25 लाख किस्म के कीट पाये जाते हैं। इस जंगल में बीते बीस साल में 2200 नए पौधे और जीव खोजे गए हैं। ये सब हमारे लिए बहुत जरूरी है।

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