आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से भविष्य देख सकेगा भारत का ये करीबी दोस्त, कहा- पलट देंगे हर नतीजा

नई दिल्ली: बॉलीवुड और हॉलीवुड की कई फिल्मों में आपने देखा होगा कि हीरो आसानी से भविष्य देख सकता है। वैसे तो ये सब चीजें असंभव लगती हैं, लेकिन जल्द ही ये चीजें सच होने वाली हैं। भारत के करीबी दोस्त अमेरिका ने इस पर आधिकारिक रूप से काम शुरू कर दिया है। अगर उसके वैज्ञानिक कामयाब रहे, तो वो आने वाले दिनों का अंदाजा पहले से लगा लिया करेगा। आम भाषा में कहें तो तकनीकी की मदद से अमेरिका भविष्य को देख सकेगा।

पेंगागन का है प्रोजेक्ट

पेंगागन का है प्रोजेक्ट

खास बात तो ये है कि कोई प्राइवेट फर्म या निजी स्तर पर वैज्ञानिक ये काम नहीं कर रहे, बल्कि अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन इस प्रोजेक्ट को शुरू करवा रहा है, ताकि भविष्य में लड़ाई के दौरान उसके देश को फायदा हो। मामले में एक अधिकारी ने कहा कि वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर काम कर रहे हैं, जिसमें उनका ग्लोबल इंफॉर्मेशन डोमिनेंस एक्सपेरिमेंट (GIDE) विशाल डेटा सेट और पैटर्न का अध्ययन करके 'निर्णय लेने वाली श्रेष्ठता' प्राप्त कर सकता है।

सबसे बड़ी पॉवर बनने की होड़

सबसे बड़ी पॉवर बनने की होड़

पेंटागन के टॉप जनरल ग्लेन वैनहेर्क ने The Drive वेबसाइट से बात करते हुए कहा कि हमने जो देखा है वो आगे बढ़ने की क्षमता है। वो मिनट और घंटों की बात नहीं कर रहे हैं, उसको तकनीकी की मदद से भविष्य के निर्णय को लेना है, ताकि परीक्षण उनके अनुकूल आएं। वहीं इस न्यूज के बाहर आने से साफ हो गया है कि भविष्य के युद्धों में टेक्नोलॉजी ही हावी रहेगी। विशेषज्ञों का भी कहना है कि जो देश बेहतरीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम तैयार करेगा, वही दुनिया का सैन्य पॉवर का हब होगा।

कहां से आएगी जानकारी?

कहां से आएगी जानकारी?

विशेषज्ञों ने आगे कहा कि भविष्य के युद्ध क्षेत्रों में एआई द्वारा लिए गए निर्णयों का वर्चस्व होगा। इसकी वजह पुराना डेटा और मानव की तुलना में बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करने की शक्ति है। जनरल ग्लेन वैनहेर्क के मुताबिक वो डेटा और जानकारी प्राप्त करने के लिए नई क्षमताओं का निर्माण नहीं कर रहे हैं, बल्कि ये जानकारी सेटेलाइट, रडार, साइबर सेल आदि में पहले से मौजूद है।

चीन और रूस हैं प्रतिद्वंदी

चीन और रूस हैं प्रतिद्वंदी

जनरल ने आगे कहा कि परमाणु क्षमता से लैस चीन और रूस अमेरिका के प्रतिद्वंदी हैं। वो रोजाना अमेरिकी सेना से अपनी प्रतिस्पर्धा करते रहते हैं। ऐसे में ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य में उनके लिए काफी अहम होगा। जनरल के इस बयान से पहले ब्रिटेन के एक शीर्ष अधिकारी का बयान सामने आया था, जिन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चिंता जाहिर की थी।

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