America Iran War: 'बातचीत के नाम पर ट्रंप दे रहे धोखा', उतारना चाहते हैं मरीन, ईरान ने भी चला तुरुप का इक्का!
America Iran War: अमेरिका-ईरान में चल रही जंग तेजी से खतरनाक होती जा रही है। नए-नए सैन्य जमावड़े हो रहे हैं, अलग-अलग देश इस युद्ध में शामिल होते जा रहे हैं और हमलों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे हालात में कूटनीति के जरिए इस संकट को कंट्रोल करना अब पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है। अगर तनाव और बढ़ता है तो इसका असर कई देशों समेत भारत पर भी पड़ सकता है।
अमेरिकी तैनाती पर ईरान की चेतावनी
बीते रोज Tehran ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी। यह चेतावनी तब आई जब अमेरिका ने 31st Marine Expeditionary Unit को इस क्षेत्र में तैनात किया। Pentagon सीमित जमीनी ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है, जो कई हफ्तों तक चल सकते हैं, लेकिन फिलहाल वह बड़े स्तर के युद्ध से बचने की कोशिश कर रहा है।

बातचीत के नाम पर आर्मी उतारना चाह रहे ट्रंप- ईरान
ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad-Baqer Ghalibaf ने अमेरिका पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह कूटनीति और बातचीत का इस्तेमाल सिर्फ अपनी सैन्य तैयारी को छिपाने के लिए कर रहा है। असल में वे मरीन को तैनात करने वाले हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर ऐसा कोई कदम उठाया गया, तो ईरान उसका जोरदार जवाब देगा।
हूथी हमलों से बढ़ा तनाव
संघर्ष और ज्यादा तब बढ़ गया जब Houthis ने इजरायल पर मिसाइल हमले किए। यह युद्ध शुरू होने के बाद उनकी पहली सीधी भागीदारी थी। इससे युद्ध का दायरा और बढ़ गया और Red Sea के अहम शिपिंग रूट्स की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
खाड़ी देशों के व्यापार पर हमला
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। इसमें बहरीन और United Arab Emirates के एल्यूमीनियम प्लांट भी शामिल थे। इन हमलों के कारण एल्यूमीनियम की कीमतें चार साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं, जिससे निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर पड़ सकता है, जिसका असर भारत के रिटेल बाजार में भी दिख रहा है।
ईरान की बड़ी चेतावनी
ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह बदले में अमेरिका और इजरायल से जुड़े संस्थानों को भी निशाना बना सकता है। इसी कड़ी में ईरान ने कुवैत, कतर, बहरीन, सऊदी अरब, जॉर्डन, इराक और यूएई समेत कई देशों को न सिर्फ निशाने पर लिया बल्कि जबरदस्त बमबारी भी की।
दूर-दूर तक नहीं दिख रही शांति
बढ़ते तनाव के बीच Pakistan, Saudi Arabia, Turkey और Egypt के मंत्रियों ने Islamabad में बैठक की। इस बैठक में युद्ध को कम करने के तरीकों पर चर्चा हुई। पाकिस्तान ने यह भी प्रस्ताव दिया कि वह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी कर सकता है। लेकिन अमेरिका और ईरान दोनों इसके लिए तैयार नहीं हैं कि पाकिस्तान को सेंटर टेबल बनाया जाए। लिहाजा शांति फिलहाल दूर-दूर तक नहीं दिख रही।
कब होगा सीजफायर?
हालांकि, जैसे-जैसे नए देश इस जंग में शामिल हो रहे हैं और उनके अपने-अपने हित सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे सीजफायर की संभावना कम होती जा रही है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि इस संकट को जल्दी खत्म करना अब बेहद मुश्किल होता जा रहा है। तमाम कोशिश को बाद भी माहौल ठंडा होने के बजाए और गर्म होता जा रहा है।
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