भारत के 'करीबी देश' ने टेस्ट की पहली हाइपरसोनिक मिसाइल, ध्वनि की रफ्तार से 5 गुना तेज
अमेरिकी वायुसेना को बड़ी कामयाबी मिली है। चीन और रूस से विवाद के बीच उसने हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया। जिसकी रफ्तार ध्वनि की रफ्तार से 5 गुना तेज है।

भविष्य में वही देश शक्तिशाली माना जाएगा, जिसकी हवाई क्षमता सबसे ज्यादा मजबूत होगी। इसी को देखते हुए सभी देश खुद को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। इस बीच भारत के करीबी देश अमेरिका को एक बड़ी कामयाबी मिली, जहां उसने हवा से दागी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का पहला पूर्ण सफल परीक्षण किया। जिसको देखकर ही दुश्मन देशों की हालत खराब है।

कितनी है रफ्तार?
अमेरिकी मीडिया के मुताबिक उनकी वायुसेना ने पहले प्रोटोटाइप हाइपरसोनिक मिसाइल का टेस्ट किया है, जिसका नाम AGM-183A है। इसे एयर-लॉन्च्ड रैपिड रेस्पॉन्स यानी ARRW भी कहा जाता है। अमेरिकी वायुसेना का दावा है कि ये उसका पहला हाइपरसोनिक हथियार है, जिसकी स्पीड 24 हजार किलोमीटर प्रति घंटे है। इसका मतलब साफ है कि ये पलक झपकते ही दुश्मन के ठिकाने या जहाजों को नष्ट कर देगा।

B-52 के जरिए लॉन्चिंग
अमेरिका वायुसेना के मुताबिक कैलिफोर्निया के तट से उन्होंने B-52 के जरिए मिसाइल को लॉन्च किया था, जिसने सफलतापूर्वक लक्ष्य को नष्ट किया। मिसाइल ने तय रफ्तार भी पा ली, जिस वजह से ये टेस्ट पूरी तरह से सफल माना जा रहा। मामले में 96वें टेस्ट विंग ने कहा कि एजीएम-183ए मिसाइल ने ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा हाइपरसोनिक गति हासिल की और टर्मिनल क्षेत्र में विस्फोट हुआ।

इस बार पूरा सिस्टम हुआ टेस्ट
ARRW एक बूस्ट-ग्लाइड मिसाइल है जो हाइपरसोनिक गति के लिए लॉन्चिंग को तेज करने के लिए बूस्टर रॉकेट का उपयोग करती है। एक ग्लाइड व्हीकल फिर बूस्टर से अलग हो जाता है। अधिकारियों के मुताबिक पिछला टेस्ट लॉन्च बूस्टर पर केंद्रित था, लेकिन इस बार का टेस्ट पूरे सिस्टम को टेस्ट करने के लिए था, जिसे ऑल-अप-राउंड टेस्ट के रूप में जाना जाता है।

चीन और रूस को देगा कड़ी टक्कर
वैसे ARRW मिसाइल के लिए पिछला साल काफी मुश्किलों भरा रहा, जहां उसे कई विफलताओं का सामना करना पड़ा। इसी वजह से इस प्रोजेक्ट में देरी होती गई। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने हाइपरसोनिक हथियारों के परीक्षण और विकास पर अधिक जोर दिया, ताकि वो अपने नए दुश्मन चीन और रूस को कड़ी टक्कर दे सके।

पहली बार युद्ध में इसका इस्तेमाल
वहीं रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। इस युद्ध में रूस ने अपनी हाइपरसोनिक किंजल मिसाइलों को तैनात किया। इतिहास में ये पहली बार है, जब इतनी ज्यादा हाईटेक मिसाइल्स का इस्तेमाल युद्ध में हो रहा है। पिछले साल चीन ने एक हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया, जिसने अपने लक्ष्य को भेदने से पहले ही पूरी दुनिया का चक्कर लगा लिया।












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