ये है चीन के वुहान की वो लैब, जिस पर लग रहे हैं कोरोना वायरस को तैयार करने के आरोप
वुहान। चीन के हुबेई प्रांत में स्थित वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी अब एक ऐसी रहस्यमय लैबोरेट्री के तौर पर परिवर्तित हो गई है, जहां पर कोरोना वायरस के तैयार करने को लेकर आशंकाएं जताई जाने लगी हैं। दुनिया भर में करीब 22 लाख लोगों को निशाना बनाने वाली महामारी कोरोना वायरस के बाद से अब इस बात पर चर्चाएं शुरू हो गईं हैं कि आखिर यहां बंद दरवाजे के पीछे क्या होता है। कहा जा रहा है कि इसी लैब में चमगादड़ों पर खतरनाक रिसर्च हो रही थी जिसके बाद पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैल गया। वुहान इंस्टीट्यूट के साइंटिस्ट्स कुछ नहीं कह रहे हैं।

साल 2003 में दी गई निर्माण की मंजूरी
फॉक्स न्यूज की तरफ से बताया गया है कि शी झेनग्ली नामक वैज्ञानिक के हवाले से साइंटिफिक अमेरिकन मैगजीन ने लिखा था कि कोरोना वायरस इसी लैब से निकला हो, ऐसा हो सकता है। अब झेनग्ली को हटा दिया गया है। 11 मार्च को आर्टिकल आने के बाद से शी का हटा दिया गया है। वुहान की यह लैब चीन की पहली ऐसी लैब जहां पर इंसानी रोगाणुओं पर रिसर्च की जाती है। यह लैब रिक्टर स्केल पर सात प्वाइंट तक का भूकंप भी झेल सकती है। इस लैब के बाद चीन, रिसर्च सेक्टर में अमेरिका और यूरोप के समकक्ष आ गया है। चीन की एकेडमी ऑफ साइंसेजज की तरफ से साल 2003 में इस लैब के निर्माण की मंजूरी दी गई थी।

साल 2018 से लैब में काम शुरू
44 मिलियन डॉलर की लागत से बनी इस लैब को संचालित होने में करीब एक दशक से ज्यादा का समय लग गया। बायोसेफ्टी लेवल पर इसे लेवल 4 लैब BSL-4 का दर्जा हासिल है। जिस समय सार्स वायरस फैला था उस समय बीजिंग स्थित लैब्स को दोष दिया था। इसलिए वुहान की लैब के संचालन में चीन ने खासी सावधानी बरती। इसके अलावा अमेरिकी मॉलीक्यूलर बायोलॉजिस्ट रिचर्ड एब्राइट के लिए इसे 12 साल तक का इंतजार करना पड़ा था। साल 2015 में लैब बनकर तैयार हुई और साल 2018 में इसके दरवाजे खुले। यांग्तजे नदी के किनारे स्थित लैब को कई संवेदनशील उपकरणों के इंस्टॉलेशन और उनके संचालन के लिए सर्टिफिकेट दिया गया है। BSL-4 लैब बायो-कंटेनमेंट का सर्वोच्च लेवल होता है जो किसी लैब को दिया जाता है।

लैब में कई खतरनाक वायरस पर रिसर्च
इस तरह की लैब जिसे लेवल 4 मिला होता है वह ऐसे एजेंट्स या फिर ऐसी बीमारियों पर काम करती है जो काफी खतरनाक होते हैं और उससे इंसानों की मौत तक हो सकती है। यहां पर काम करने वाले लोगों की सुरक्षा और सावधानी इस तरह के होते हैं जिसकी आप कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। यहां पर हवा की सफाई तक की जाती है। साथ ही पानी और कचरे तक का ट्रीटमेंट होता है। वर्कर्स को वेंटीलेटेड प्रोटेक्टिव सूट पहनने होते हैं। फेस मास्क अनिवार्य होता है। हर शिफ्ट से पहले और बाद में नहाना और कपड़े धोना भी एक नियम है जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।

अब तक कई वायरस पर रिसर्च
जब से वुहान लैब को खोला गया है तब से अब तक यहां सार्स, इबोला, एचआईवी, वेस्ट अफ्रीकन लस्सा वायरस और कोविड-19 पर स्टडी हो चुकी है। यह लैब नीदरलैंड्स की वेइनिनगेन यूनिवर्सिटी और फ्रांस की मॉन्टपेइलियर 2 यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करती है। इतना ही नहीं अमेरिका की टेक्सास यूनिवर्सिटी की मेडिकल ब्रांच और ग्लवेस्टन नेशनल लेबोरट्री से इसे मदद मिलती है। लैब ने चीन को एक अलग पहचान दी है मगर अब महामारी के साथ् ही देश पर सवाल उठने लगे हैं।

अमेरिकी दूतावास ने उठाए सवाल
विदेशी मामलों के जानकार गॉर्डन चांग ने फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में कहा था कि चीन के कई नागरिक यह मानने लगे हैं कि या तो वायरस को जानबूझकर रिलीज किया गया या फिर यह गलती से लैब से निकल गया। उन्होंनं यह भी कहा कि यह लैब वुहान की उस वेट मार्केट के करीब ही है जिसे शुरुआत में वायरस का स्त्रोत माना गया था। वॉशिेंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में कई डिप्लोमैटिक केबल्स का हवाला दिया और कहा कि लैब में सुरक्षा के इंतजाम बेहद कमजोर है। बीजिंग स्थित दूतावास के अधिकारियों ने इस मामले में व्हाइट हाउस की मदद भी मांगी थी।












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