धरती पर अब चार नहीं पांच महासागर हैं, जानिए क्यों है खास

नई दिल्ली, 15 जून। बचपन से हम सभी अपनी स्कूल की किताबों में धरती पर चार महासागर और 7 महाद्वीप के बारे में पढ़ते आए हैं। लेकिन अब धरती पर पांचवे महासागर की जानकारी सामने आई है। नेशनल जियोग्रैफिक की ओर से दावा किया गया है कि धरती के साउथ पोल के पास दक्षिणी समुद्र है जोकि अंटार्टिका के आस-पास का इलाका है। पांचवे महासागर को Southern Ocean का नाम दिया गया है। अमेरिका ने इसे आधिकारिक स्वीकृति भी दे दी है। यानि अब अटलांटिक, पैसिफिक (प्रशांत महासागर), इंडियन ओसिएन यानि हिंद महासागर और आर्कटिक महासागर के बाद धरती पर दक्षिणी महासागर को पांचवे महासागर के तौर पर जाना जाएगा। नेशनल जियोग्रैफिक सोसाइटी के जियोग्राफर एलेक्स टेट का कहना है कि हम अंटार्कटिका दक्षिणी महासागर को पहले से ही अलग महासागर मानते रहे हैं।

परीक्षा में होगा अहम सवाल

परीक्षा में होगा अहम सवाल

ऐसे में पांचवे महासागर की खोज के बाद भविष्य में सामान्य ज्ञान की किताब में अब दक्षिण महासागर को भी मैप में जगह दी जाएगी, लिहाजा कई प्रतियोगी परिक्षाओं में भी इसको लेकर सवाल पूछे जाना तकरीबन तय है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दक्षिणी महासागर किन महासागर को छूता है तो इसका सीधा जवाब है पैसिफिक, अटलांटिक और इंडियन महासागर। लिहाजा इससे जुड़ी तमाम जानकारियां कई मायनों में काफी अहम हो जाती है।

चौथा सबसे बड़ा महासागर

चौथा सबसे बड़ा महासागर

बता दें कि 8 जून को विश्व महासागर दिवस यानि World Ocean Day मनाया जाता है और 8 जून को पांचवे महासागर की खोज का नेशनल जियोग्रैफिक ने ऐलान किया था। महासागर की बात करें तो 71 फीसदी धरती का हिस्सा महासागर से घिरा हुआ है और दुनिया का सबसे बड़ा महासागर प्रशांत महासागर है। वहीं नंबर दो पर अटलांटिक महासागर, नंबर तीन पर हिंद महासागर और नंबर चार पर दक्षिण महासागर है और सबसे छोटा महासागर आर्कटिक महासागर है।

क्यों पांचवे महासागर की हुई घोषणा

क्यों पांचवे महासागर की हुई घोषणा

अगर सवाल करें कि आखिर क्यों अचानक से नया महासागर को घोषित किया गया और इससे क्या फायदा होगा तो इसकी ड़ी वजह है यहां होने वाला जलवायु परिवर्तन। धरती का दक्षिण हिस्सा धरती के अन्य हिस्सों से बिल्कुल अलग है और बहुत ही खास है। हालांकि इस महासागर का पहले भी जिक्र हो चुका है, लेकिन इसे कभी भी आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं मिली थी और मैप में इसे जगह नहीं दी गई थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर हम शिप से दक्षिण महासागर जाते हैं तो यहां बिल्कुल अलग तरह का वातावरण महसूस करेंगे। आस-पास के वन्यजीव बदल चुके हैं, यही वजह है कि इसे अलग महासागर की मान्यता दी गई है।

किस आधार पर हुआ विभाजन

किस आधार पर हुआ विभाजन

सामान्य तौर पर महासागर का विभाजन आस-पास के भू-भाग के आधार पर किया जाता है लेकिन दक्षिण महासागर पहला ऐसा महासागर है जिसका विभाजन समुद्र की लहर यानि Ocean Current से किया गया है। यह पहला महासागर है जिसे समुद्र की लहर से विभाजत किया गया है। इस समुद्री लहर का नाम The Antarctic Circumpolar Current यानि ACC है। अगर एसीसी की बात करें तो धरती के लगातार घूमने, हवा और अन्य वजहों से समुद्र की लहरों का निर्माण होता है। समुद्री लहरों के अनुरूप ही समुद्र में रहने वाले जीव आवागमन करते हैं। अंटार्कटिका में एसीसी लहर बहुत ज्यादा है और यह इसे बाकी के महासागर से पूरी तरह से अलग रखता है। जलवायु परिवर्तन की वजह से अंटार्कटिका की बर्फ पिघल रही है, यहां के जीव-जंतुओं में बदलाव आ चुका है। यही वजह है कि बदलते स्वरूप की वजह से इस पांचवे महासागर को मान्यता दी गई।

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