एलियंस मोबाइल टावर से लगा सकते हैं पृथ्वी का पता, वैज्ञानिकों ने क्या कहा है? जानिए
एलियंस की दुनिया के बारे में हम तक प्रभावी तौर पर ज्यादा वैज्ञानिक रिसर्च नहीं कर पाए हैं। लेकिन, एक शोध से पता चला है कि अगर एलियंस हमसे एडवांस होंगे तो मोबाइल टावर के जरिए वह हम तक पहुंच जाएंगे।

एलियंस को लेकर अब तक खबरें आती थीं कि इंसान ने कभी उसे यहां देखा है तो कभी वहां देखा है। कभी विमानों के पायलट द्वारा एलियंस देख जाने की जानकारी आती है, तो कभी किसी दूर-दराज इलाके में उनके विचित्र विमान उतरने की दिलचस्प खबरें देखने-सुनने को मिलती हैं। लेकिन, अब वैज्ञानिकों ने बताया है कि हो सकता है एलियंस ही हमारे सिंग्नल पकड़ कर हमें खोज सकते हैं।
मोबाइल टावर के सिंग्नल से पृथ्वी खोज सकते हैं एलियंस-शोध
मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी और मॉरीशस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में एलियंस मोबाइल टावरों के सिंग्नलों के माध्यम से हमारी पृथ्वी का पता लगा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह शोध 'मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी' में प्रकाशित हुआ है।
मोबाइल नेटवर्क का लगातार हो रहा है विस्तार
यह शोध 'सिम्युलेशन ऑफ द अर्थ रेडियो-लीकेज फ्रॉम मोबाइल टावर्स एज सीन फ्रॉम सेलेक्टेड नियरबाय स्टेलर सिस्टम' टाइटल से प्रकाशित हुआ है। मोबाइल आज दुनिया में करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है। मोबाइल नेटवर्क को विशाल रेडियो ट्रांसमिशन की भी आवश्यकता पड़ती है।
रेडियो सिंग्नलों में मिलिट्री रडार का बड़ा हिस्सा
दरअसल, पृथ्वी पर जो रेडियो सिंग्नल मौजूद हैं, उसका कुछ हिस्सा अंतरिक्ष में लीक करके पहुंच जाते हैं। साइंस अलर्ट के मुताबिक पृथ्वी से जितना भी रेडियो सिंग्नल लीक होता है, उसका बड़ा हिस्सा अभी भी मिलिट्री के रडारों से निकलने वाली तरंगें होती हैं।
मोबाइल टावर भी रेडियो सिंग्नल छोड़ते हैं
लेकिन, समय के साथ सेलफोन नेटवर्क भी दूसरे पायदान पर पहुंचते जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक प्रत्येक सेल फोन टावर भी 100 से 200 वॉट का रेडियो सिंग्नल छोड़ते हैं। आज दुनिया में जिस तादाद में मोबाइल फोन टावरों की संख्या बढ़ी है, उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उसके माध्यम से अंतरिक्ष तक पहुंचने वाले रेडियो सिंग्नल कुछ गीगावॉट्स तक हो चुके हैं।
रेडियो सिंग्नल बता सकता है एलियंस को हमारा पता
अब अगर यह मान लिया जाए कि किसी एलियन सभ्यता के पास अत्याधुनिक रेडियो खगोल विज्ञान की क्षमता है, तो वह पृथ्वी से एक दर्जन प्रकाश वर्ष या इससे कुछ अधिक तक में भी धरती से होने वाले रेडियो सिंग्नल लीकेज का पता लगा सकते हैं। यह जितना रोमांचक है, उतना ही खतरनाक भी लगता है।
कम नहीं हो रहे हैं रेडियो सिंग्नल- शोधकर्ता
phys.org के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के टीम लीडर और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के खगोल भौतिकी वैज्ञानिक माइक गैरेट ने कहा है, 'मैंने अपने कई सहयोगियों को कहते सुना है कि हाल के वर्षों में पृथ्वी तेजी से रेडियो सिंग्नलों के मामले में शांत होती जा रही है, इस दावे का मैंने हमेशा विरोध किया है।'
सैटेलाइट की संख्या बढ़ने के साथ बढ़ रही है संभावना
उन्होंने कहा है, 'मौजूदा अनुमान के अनुसार इस दशक के अंत तक पृथ्वी की निचली कक्षा और उससे बाहर हमारे एक लाख से ज्यादा सैटेलाइट होंगे। स्पेक्ट्रम के रेडियो वाले भाग में पृथ्वी पहले से ही काफी समृद्ध है, अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो सही टेक्नोलॉजी से किसी उन्नत सभ्यता के द्वारा हम आसानी से पता लगाए जा सकते हैं।'
एक इंटर्न ने तैयार किया एलियंस वाला मॉडल
एलियंस के द्वारा पृथ्वी के सिंग्नलों को पकड़ने वाला मॉडल रैमिरो सैडे ने तैयार किया है, जो मॉरीशस यूनिवर्सिटी में एम फिल के छात्र हैं और हैट क्रीक रेडियो ऑब्जर्वेटरी के एक्सट्रा टेरिस्टेरियल इंटेलिजेंस इंस्टीट्यूट में इंटर्न है।












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