Ajit Doval Saudi Visit: अचानक सऊदी अरब क्यों पहुंचे NSA डोभाल? पाकिस्तान की नई चाल के बीच ये दौरा कितना अहम?

NSA Ajit Doval Saudi Arabia Visit: भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का हालिया सऊदी अरब दौरा कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है और पाकिस्तान ने वहां अपने फाइटर जेट तैनात किए हैं।

भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ती यह नजदीकी न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करेगा बल्कि पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती सक्रियता को भी दर्शाती है।

NSA Ajit Doval Saudi Arabia Visit

Pakistan Fighter Jets in Saudi Arabia: अचानक हुए इस दौरे की क्या है वजह?

अजीत डोभाल का यह दौरा पूरी तरह गोपनीय और अचानक रखा गया। इसका सबसे बड़ा कारण ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बिगड़ते हालात हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री रास्ते पर निर्भर है। ऐसे में सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व से मिलना भारत की सुरक्षा चिंताओं को साझा करने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है। इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा पर भी विशेष चर्चा हुई है।

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Ajit Doval Riyadh Visit: पाकिस्तान की तैनाती और भारत की नजर

पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत वहां अपने लड़ाकू विमान और सैनिक भेजे हैं। भारत के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि सऊदी और पाकिस्तान के बीच 'एक पर हमला, दोनों पर हमला' जैसी संधि है। डोभाल ने रियाद में इस रक्षा तालमेल और क्षेत्रीय संतुलन पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि पाकिस्तान की इस मौजूदगी का इस्तेमाल भारत के खिलाफ या क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने में न हो।

रणनीतिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर मंथन

सऊदी अरब के विदेश मंत्री और एनएसए के साथ हुई बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ आपसी हितों के बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को नया विस्तार देने का संकल्प लिया है। सऊदी अरब अब केवल एक तेल आपूर्तिकर्ता देश नहीं, बल्कि भारत का एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार बनकर उभर रहा है। इस बैठक में खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने जैसे विषयों पर भी गंभीर विमर्श हुआ है।

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मध्य-पूर्व में भारत की बढ़ती भूमिका

इस दौरे से यह साफ हो गया है कि मध्य-पूर्व के संकटों को सुलझाने में सऊदी अरब अब भारत को एक महत्वपूर्ण पक्ष मानता है। जानकारों का कहना है कि रियाद अब क्षेत्रीय बातचीत के लिए एक केंद्र बन गया है, जहाँ भारत की मौजूदगी अनिवार्य है। डोभाल की यह यात्रा दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक संकटों में मूकदर्शक नहीं बना रहना चाहता, बल्कि अपनी कूटनीति के जरिए शांति और स्थिरता बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

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