अमेरिका की धमकियों के बीच रूस पहुंचे अजित डोभाल, क्यों है ये दौरा रणनीतिक रूप से बेहद अहम
Ajit Doval Russia Visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की धमकी के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल मंगलवार को मॉस्को पहुंचे हैं। उनका यह दौरा भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और ऊर्जा व्यापार को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव के इस दौर में डोभाल की यात्रा भारत के रूस के साथ मजबूत होते संबंधों का संकेत देती है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिमी देश भारत के रूस से तेल आयात को लेकर सवाल उठा रहे हैं।रूसी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्धारित दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और मौजूदा वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा होगी।

अजित डोभाल के रूस दौरा क्यों अहम?
✅ अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव के बीच संतुलन साधने की कोशिश
अमेरिका, रूस से नजदीकी बढ़ाने वाले देशों पर खुलकर व्यापारिक प्रतिबंधों और टैरिफ की धमकी दे रहा है। भारत रूस से तेल खरीद रहा है और हथियारों की बड़ी आपूर्ति भी वहीं से होती है। ऐसे में डोभाल का दौरा यह संदेश देता है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है और किसी दबाव में नहीं आने वाला।
✅ रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर रणनीतिक संवाद
रूस भारत का एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा है। मौजूदा दौर में जब पश्चिमी देशों के साथ भारत के रक्षा समझौते बढ़ रहे हैं, रूस के साथ संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है। साथ ही, वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच रूस से सस्ते तेल की आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है।
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✅ यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में भारत की भूमिका
डोभाल की यात्रा उस समय हो रही है जब रूस और यूक्रेन युद्ध अब भी जारी है और भारत को वैश्विक मंचों पर संतुलित रुख बनाए रखने की चुनौती है। इस दौरे से भारत रूस के साथ सीधे संवाद बनाकर अपनी स्थिति को स्पष्ट कर सकता है।
✅ चीन को संतुलित करने के लिए रूस के साथ मजबूत रिश्ते
एशिया में चीन की आक्रामकता को देखते हुए रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी भारत के लिए एक प्रकार की बैलेंसिंग पावर का काम करती है। डोभाल की यात्रा से यह संकेत भी जाता है कि भारत किसी एक ध्रुवीय गठबंधन में भरोसा नहीं करता।
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