Diplomacy: भारत ने दोस्त इजराइल को दिया करारा झटका, एयर इंडिया के फ्लाइट्स सस्पेंड, संबंधों पर पड़ेगा असर?
Air India suspends all flights Israel: दोस्त इजराइल को लेकर भारत का एक हैरान करने वाला फैसला आया है और एक नाटकीय घटनाक्रम में एयर इंडिया ने तेल अवीव के लिए अपने सारे फ्लाइट्स कैंसिल कर दिए हैं।
एयर इंडिया के फ्लाइट्स कैंसिल करने का फैसला उस वक्त लिया गया है, जब ईरान में हमास के पॉलिटिकल विंग के चीफ इस्माइल हानिया और लेबनान के बेरूत में हिज्बुल्लाह के वरिष्ठ कमांडर फुआद शुक्र की हत्या होने से मिडिल ईस्ट में काफी तनाव भड़क गया है।

ऐसी आशंका है, कि हमास चीफ के मारे जाने के बाद ईरान की तरफ से इजराइल के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया की जा सकती है, वहीं हिज्बुल्लाह और इजराइल के बीच पहले से ही सीधी जंग शुरू होने की आशंका है, क्योंकि इजराइल के कब्जे वाले गोलान हाइट्स पर हिज्बुल्लाह के रॉकेट हमले में 12 इजराइली किशोर मारे गये थे और उसी का बदला लेते हुए इजराइल ने बेरूत में काउंटर अटैक किया था।
इन घटनाक्रमों को देखते हुए एयर इंडिया ने 'तत्काल प्रभाव' से इजरायल के तेल अवीव से आने-जाने वाली सभी निर्धारित उड़ानों को सस्पेंड कर दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एयर इंडिया ने लिखा है, कि "हम लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और इस अवधि के दौरान तेल अवीव से आने-जाने के लिए कन्फर्म बुकिंग वाले अपने यात्रियों को सहायता प्रदान कर रहे हैं, जिसमें फ्लाइटों के पुनर्निर्धारण और रद्दीकरण शुल्क पर एक बार की छूट शामिल है।"
एयर इंडिया ने आगे लिखा है, कि "हमारे मेहमानों और चालक दल की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।"
क्या भारत-इजराइल संबंधों पर होगा असर?
एयर इंडिया का तेल अवीव के लिए फ्लाइट सस्पेंड करना हैरानी भरा फैसला है, हालांकि ये सुरक्षा के नजरिए से उठाया गया कदम है, लेकिन अभी तक किसी भी दोस्त देश ने इजराइल के लिए उड़ानों को ना ही रद्द किया है और ना ही सस्पेंड किया है, ऐसे में एयर इंडिया का फैसला इजराइल के लिए भी शॉकिंग होगा।
एयर इंडिया की उड़ान सस्पेंड होने से इजराइल के ऊपर मनोवैज्ञानिक प्रेशर भी बनेगा, क्योंकि अब कई और देश भी अपनी उड़ानों को रद्द कर सकते हैं। हालांकि, सिर्फ एयर इंडिया की उड़ानों के रद्द होने से संबंधों पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि भारत लगातार इजराइल को हथियारों की सप्लाई करने के साथ साथ हमास को काउंटर करने के लिए डिप्लोमेटिक समर्थन भी दे रहा है।
भारत ने बार बार 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजराइल पर किए गये हमास के क्रूर हमले की निंदा की है। भारत ने यूनाइटेड नेशंस में भी हमास की निंदा की थी और इजराइल के 'आत्मरक्षा के अधिकार' का समर्थन किया था। हालांकि, फिलीस्तीन को लेकर भारत अभी भी अपने पुराने रूख 'टू स्टेस सोल्यूशन' पर कायम है। भारत ने हाल में भी कहा है, कि भारत चाहता है, कि 'टू स्टेस सोल्यूशन' के जरिए इजराइल और फिलीस्तीन के बीच विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से किया जाए, लेकिन बार ने हमास के हमले को आतंकवादी हमला बताकर इजराइल के साथ अपने दोस्ती का सबूत दिया है।
इसके अलावा भी, जब यूरोपीय देशों में भी इजराइल को हथियारों की सप्लाई रोकने की मांग की जा रही है, उस समय भी भारत, अपने दोस्त को हथियारों और गोला-बारूद की सप्लाई कर रहा है।
मई महीने में रिपोर्ट आई थी, कि जिस वक्त इजराइल, गाजा पट्टी में हमास के साथ भीषण संघर्ष में उलझा हुआ है, तो भारत यहूदी राज्य को गोला-बारूद की सप्लाई कर रहा है। रिपोर्टों से पता चलता है, कि जैसे-जैसे इजराइल और ईरान समर्थित हमास के बीच संघर्ष तेज हुआ है, युद्ध सामग्री के रणनीतिक आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने मई महीने में इजराइल कर 27 टन गोला बारूद की सप्लाई की थी, हालांकि इसके बाद भारत ने इजराइल को हथियार भेजे हैं, या नहीं भेजे हैं, या फिर कितनी मात्रा में विस्फोटक भेजे हैं, इसकी जानकारी हमारे पास नहीं है।
भारत ने इजराइल को जो हथियार भेजे हैं, उनमें भारतीय एयरो-स्ट्रक्चर और सबसिस्टम के साथ-साथ 20 से ज्यादा हर्मीस 900 यूएवी/ड्रोन शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार के स्वामित्व वाली म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड ने हाल ही में जनवरी 2024 में इज़राइल को गोला-बारूद निर्यात किया है, जिसने अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है।
लिहाजा, सिर्फ एयर इंडिया के उड़ान सस्पेंड होने से दोनों देशों के बीच के संबंधों पर असर पड़ने की संभावना कम है, लेकिन इसे इजराइल के लिए बड़ा झटका जरूर कहा जाएगा। लेकिन, भारत के लिए महत्वपूर्ण अपनी मिडिल ईस्ट डिप्लोमेसी में भी बैलेंस बनाकर रखना जरूरी है।
भारत के लिए मिडिल ईस्ट काफी महत्वपूर्ण
मध्य पूर्व में भारत का जटिल संतुलन क्षेत्र में इसकी जटिल डिप्लोमेटिक स्ट्रैटजी को फोकस करता है। इजराइल और ईरान, दोनों भारत के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत कर रहे हैं। और ये दोनों ही देश भारत को अपना विश्वसनीय दोस्त मानते हैं।
पिछले एक दशक में भारतीय कूटनीति के लिए सबसे कामयाब क्षेत्रों में से एक होने के बावजूद, मध्य पूर्व दिल्ली की कूटनीतिक चाल के लिए लगातार चुनौतियां पैदा करता रहा है, लेकिन इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में भारत के संबंधों का विस्तार मोदी सरकार की शानदार कूटनीति की गवाही भी देता है।
मई 2024 में, भारत ने चाबहार के रणनीतिक ईरानी बंदरगाह के प्रबंधन के लिए 10 साल का समझौता किया है। ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चाबहार, भारत का नजदीकी ईरानी बंदरगाह है, जो बड़े मालवाहक जहाजों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित पहुंच प्रदान करता है। भारत, ईरान सरकार के सहयोग से बंदरगाह के पहले चरण - शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल को सक्रिय रूप से विकसित कर रहा है।
भारत ने ये समझौता अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका को दरकिनार करते हुए किया था। वहीं, ईरान में नये राष्ट्रपति के शपथग्रहण में मोदी सरकार के वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी तेहरान गये थे, जो बताता है, कि भारत ईरान के साथ भी अपने डिप्लोमेटिक संबंधों में कोई तनाव नहीं लाना चाहता है।
लेकिन, अगर अब इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होता है, जिसकी संभावना लगातार बनती जा रही है, तो ये एक बार फिर से मिडिल ईस्ट में भारत की कूटनीति की कठिन परीक्षा लेगा। लिहाजा, देखना दिलचस्प होगा, कि भारत अपने इन दोनों दोस्तों के बीच के संबंधों में संतुलन बनाने के लिए किस तरह की स्ट्रैटजी अपनाता है!












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