अमेरिका के कहने पर रूस को दिया धोखा, फिर IMF से मिला लोन.. पाकिस्तान-US का सीक्रेट डील लीक
US-Pakistan Ukraine Secret Deal: पाकिस्तान 31 जुलाई से पहले कई महीनों तक आईएमएफ से ऋण हासिल करने के लिए नार रगड़ रहा था, लेकिन आईएमएफ के अधिकारी नाक पर मक्खी तक नहीं बैठने देते थे, लेकिन 31 जुलाई को सुबह के वक्त अचानक पाकिस्तान ऐलान करता है, कि आईएमएफ से लोन मिलने का समझाौता हो गया है।
31 जुलाई को आईएमएफ की तरफ से भी पुष्टि कर दी गई, कि पाकिस्तान को कर्ज देने का फैसला लिया गया है। लिहाजा, 31 जुलाई, जिस दिन आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच 2019 में हुआ एग्रीमेंट खत्म हो रहा था, ठीक उसी दिन आईएमएफ से ऋण पर बात बन जाना, हर किसी को हैरान कर गया।

जो आईएमएफ कई महीनों से पाकिस्तान से सीधी मुंह बात तक नहीं कर रहा था, भला वो अचानक पाकिस्तान को ऋण देने के लिए तैयार कैसे तैयार हो गया, ये हर किसी के समझ से परे था, लेकिन अब खुलासा हुआ है, कि ऋण हासिल करने के लिए पाकिस्तान अमेरिका के सामने लेट गया था और उसने रूस को धोखा दिया था।
पाकिस्तान को कैसे मिला IMF ऋण?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में 'विशेष सैन्य अभियान' की घोषणा 24 फरवरी 2022 को की थी और उससे ठीक एक दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मॉस्को का दौरा किया था।
इसके ठीक दो महीने बाद, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने पाकिस्तानी संसद में भरोसा खो दिया और अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान को सत्ता से बाहर कर दिया गया। जिसको लेकर इमरान खान ने दर्जनों बार दावा किया, कि अमेरिका के इशारे पर उनकी सत्ता गिराई गई है।
और फिर इमरान खाई की विदाई के बाद, प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में नई सरकार का गठन किया गया, जिसने बेलऑउट पैकेज हासिल करने के लिए आईएमएफ के सामने खूब नाक रगड़े। अब खुलासा हुआ है, कि पाकिस्तान सरकार ने आईएमएफ डील के बदले में यूक्रेन में हथियार भेजने का सौदा अमेरिका के साथ किया था।
कई मीडिया रिपोर्ट्स में उस वक्त कहा गया था, कि पाकिस्तान ने गु्प्त रूप से यूक्रेन को हथियार भेजे हैं, जिससे पाकिस्तान की शहबाज सरकार इनकार करती रही, लेकिन अब उन रिपोर्ट्स पर मुहर लग गया है, कि एक तरफ शहबाज शरीफ रूस से सस्ते दाम पर तेल खरीद रहे थे, दूसरी तरफ रूस की ही पीठ में चाकू भोंकते हुए, यूक्रेन को सीक्रेट हथियारों की सप्लाई कर रहे थे।

द इंटरसेप्ट की जांच रिपोर्ट में खुलासा
वाशिंगटन और रावलपिंडी के बीच पर्दे के पीछे की चाल को दर्शाते हुए घटनाओं के उपरोक्त क्रम का खुलासा द इंटरसेप्ट की एक जांच रिपोर्ट में किया गया है।
रावलपिंडी पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय है, जो राजधानी इस्लामाबाद से कुछ ही दूरी पर है।
जांच रिपोर्ट में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हुए सौदे की पुष्टि करने के लिए आंतरिक पाकिस्तानी और अमेरिकी सरकार के दस्तावेजों तक पहुंच और व्यवस्था के ज्ञान के साथ दो स्रोतों का हवाला दिया गया है।
दावा किया गया है, कि इस डील को करने के लिए इस्लामाबाद और रावलपिंडी ने मिलकर गहरी चाल चली थी और फिर सेना के साथ मिलकर शहबाज सरकार ने यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई की थी।
रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि इमरान खान के सत्ता से बेदखल होने से पहले, अमेरिकी विदेश विभाग के राजनयिकों ने निजी तौर पर अपने पाकिस्तानी समकक्षों के सामने इमरान खान सरकार के यूक्रेन युद्ध पर 'आक्रामक तटस्थ' रूख अख्तियार करने के लिए गुस्से का इजहार किया था।
इसके अलावा, अमेरिकी डिप्लोमेट्स ने इमरान खान के सत्ता में बने रहने पर पाकिस्तान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी और वादा किया था, कि अगर इमरा खान को सत्ता से हटा दिया गया, तो फिर "पाकिस्तान की गलतियों को" माफ कर दिया जाएगा।
अमेरिका ने गिराई थी इमरान खान की सरकार
अप्रैल 2022 के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक घटनाक्रम ने मोड़ लिया और फिर इमरान खान को सत्ता से बेदखल कर दिया गया। इमरान खान के सत्ता से बाहर होने के साथ ही पाकिस्तान ने यूक्रेन की मदद करनी शुरू कर दी।
जब पाकिस्तान ने गुप्त तौर पर यूक्रेन को हथियार भेजने शुरू कर दिए, उसके बाद जाकर अमेरिका के आदेश पर आईएमएफ ने डिफॉल्ट होने से बचने के आखिरी दिन, यानि इस साल 31 जुलाई को पाकिस्तान की आर्थिक तबाही को टालने के लिए बेलऑउट पैकेज की घोषणा की थी।
पाकिस्तान के इस सौदे का मतलब?
द इंटरसेप्ट ने अपनी रिपोर्ट में विश्लेषकों के हवाले से कहा है, कि पाकिस्तानी लोकतंत्र यकीनन यूक्रेन में युद्ध का शिकार हो सकता है।
मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के अनिवासी विद्वान और पाकिस्तान के विशेषज्ञ आरिफ रफीक ने द इंटरसेप्ट के हवाले से कहा, कि "पाकिस्तानी लोकतंत्र अंततः यूक्रेन के जवाबी हमले का शिकार हो सकता है।"
हालांकि, अभी तक ना ही अमेरिका और ना ही पाकिस्तान ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है, कि पाकिस्तान ने यूक्रेन में हथियार भेजे हैं।
लेकिन, अगर ये रिपोर्ट सच है, तो फिर इमरान खान के वो आरोप सही साबित होते हैं, जिसमें वो चीख चीख कर कह रहे थे, कि अमेरिका के इशारे पर उनकी सरकार गिराई गई है और इमरान खान के वो आरोप भी सच साबित होते हैं, जिसमें वो अकसर कहते रहे थे, कि अमेरिका के आगे झुकने से इनकार करने की वजह से ही उनकी सरकार गिराई गई है।
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