पेजर के बाद वॉकी-टॉकी विस्फोट, आखिर क्या है इजराइल का मकसद? हिजबुल्ला ने दी खुलेआम धमकी

लेबनान में एक के बाद एक अलग-अलग तरह से हमले हो रहे हैं। पहले पेजर के जरिए धमाका किया गया, उसके बाद अब रेडियो वॉकी-टॉकी के जरिए हमला किया गया है। हिजबुल्ला के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रेडियो वॉकी-टॉकी में हुए हमले के पीछे भी कथित तौर पर इजराइल का नाम सामने आ रहा है। जिस तरह से लगातार हिजबुल्ला को इजराइल निशाना बना रहा है, उससे नजर आ रहा है कि हिजुबल्ला में आंतरिक सुरक्षा में सेंध लग चुकी है। लगातार हिजबुल्ला पर दबाव बढ़ रहा है।

वायरलेस डिवाइस में विस्फोट से 20 लोगों की मौत हो गई जबकि 450 से अधिक लोग घायल हो गए। रिपोर्ट की मानें तो इजराइल ने इन वॉकी-टॉकी में बम लगाया था, जिसके बाद इसे हिजबुल्ला के पास आपातकाल में इस्तेमाल के लिए भेजा गया।

Hezbollah

जापानी कंपनी के थे ये उपकरण!

इन घटनाओं के बाद रेडियो उपकरण बनाने वाली जापानी कंपनी आईकॉम ने बुधवार को हुए विस्फोट में शामिल वॉकी-टॉकी पर कंपनी का लोगो होने और "मेड इन जापान" के चिह्न होने की रिपोर्ट के बाद जांच शुरू कर दी है।

इन घटनाओं के मद्देनजर, रेडियो उपकरण बनाने वाली जापानी कंपनी आईकॉम ने बुधवार को हुए विस्फोट में शामिल वॉकी-टॉकी पर कंपनी का लोगो होने और "मेड इन जापान" के चिह्न होने की रिपोर्ट के बाद जांच शुरू कर दी है।

रिपोर्ट के अनुसार आईकॉम ने कहा कि उसने एक दशक पहले इन उपकरणों की बिक्री बंद कर दी थी और वर्तमान में मामले के तथ्यों की जांच कर रही है। रायरटर्स की रिपोर्ट के अनुसार हिजबुल्लाह ने लगभग पांच महीने पहले वॉकी-टॉकी खरीदी थी।

इजराइल के खिलाफ युद्ध के लिए हिजबुल्ला इन डिवाइस को लेकर आया था। लेकिन इसमें हुए विस्फोट से हिजबुल्ला के कंट्रोल सिस्टम और कमांड को भारी नुकसान हुआ है। बुधवार की दोपहर को हुए हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई।

अंतिम विदाई के समय हुआ यह हमला

यह हमला उस वक्त किया गया जब पेजर हमले में मारे गए लोगों को हिजबुल्ला के सदस्य अंतिम विदाई दे रहे थे। सोशल मीडिया पर इस हमले का एक कथित वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमे देखा जा सकता है कि डिवाइस में विस्फोट से हिजबुल्ला का एक गार्ड जमीन पर गिर गया, साथ ही बेरूत के कई घरों में धमाका हुआ।

गौर करने वाली बात है कि वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल युद्ध के दौरान किया जाता है। ये वॉकी-टॉकी हिजबुल्ला के गोदाम में बड़ी संख्या में थे। ऐसे में इजराइल ने इसे निशाना बनाकर हिजबुल्ला में भय के साथ भ्रम फैलाने में सफलता हासिल की है।

वॉकी-टॉकी हमले के पीछे का मकसद

इजराइल चाहता है कि इन डिवाइस के इस्तेमाल से हिजबुल्ला के लोग डरें। ऐसे में अगर वो इन डिवाइस का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो वो आपस में संचार नहीं कर पाएंगे। रिपोर्ट का एक पहलू यह भी है कि जिस तरह से इजराइल ने पेजर हमला किया था, उसके बाद इजराइल की यह मजबूरी हो गई थी कि वह वायरलेस डिवाइस को भी नष्ट कर दे क्योंकि पेजर हमले के बाद इन डिवाइस की भी जांच की जाती।

हालांकि इजराइल ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। लेकिन वॉकी-टॉकी विस्फोट से कुछ घंटे पहली ही अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने मिस्र में साफ किया था कि अमेरिका का इस हमले से कोई लेना-देना नहीं है।

यही नहीं उन्होंने इस बारे में जानकारी से भी इनकार कर दिया था। दरअसल इजराइल इस कोशिश में लगा है कि हिजबुल्ला खुद को हमास से अलग कर ले और लड़ाई को खत्म करने के लिए इजराइल के साथ अलग से समझौता करे।

पेजर हमले में गई थी 12 की जान

माना जाता है कि हिजबुल्ला को ईरान की सरकार का समर्थन प्राप्त है। इससे पहले हिजबुल्ला के सैनिकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पेजर में विस्फोट हुआ था जिसमे 12 लोगों की जान चली गई थी और तकरीबन 3000 लोग घायल हुए थे। हिजबुल्ला के गढ़ कहे जाने वाले बेरूत और बेका की घाटी में यह हमला हुआ था।

हिजबुल्ला ने इजराइल पर उठाई उंगली

इन लगातार विस्फोटों के जवाब में हिजबुल्लाह ने सीधे तौर पर इजरायल पर उंगली उठाई है इसका बदला लेने की बात कही है। हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह गुरुवार को एक महत्वपूर्ण भाषण में इजराइल को सबक सिखाने की बात कही। हालांकि इन आरोपों के बावजूद इन विस्फोटों के बारे में इजरायल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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