पेरिस की 'शार्ली एब्दो' पत्रिका पर क्यों होते हैं आतंकी हमले, जानिए 10 वजहें
नयी दिल्ली। पेरिस की पत्रिका पर हुए आतंकी हमले में 12 लोगों की मौत हो गई। इस हमले में फ्रेंच मैगजीन शार्ली एब्दो के संपादक समेत 5 फ्रांसीसी कार्टूनिस्ट की मौत हो गई। आपको बता दें कि फ्रांस की इस मैगजीन का विवादों से पुराना नाता रहा है। हर विषय अपने व्यंग्यात्मक कॉन्टेंट को लेकर सूर्खियों में रहने वाली इस मैगजीन पर पहले भी हमले हो चुके हैं। कई बार इस्लाम को लेकर इस मैगजीन को विरोध का सामना करना पड़ा है।

यहां तक की अलकायदा ने तो मैगजीन के संपादक को भी जान से मारने की धमकी दे दी थी, लेकिन आलोचनाओं और विरोध के बावजूद मैगजीन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देकर कभी अपने स्टाइल और कॉन्टेंट से समझौता नहीं किया। ऐसे में सवाल ये कि आखिर ये मैगजीन आतंकियों के निशाने पर क्यों? जानिए इस हमले से जुड़ी 10 फैक्ट
- बताया जाता है कि इस पत्रिका ने आईएसआईएस प्रमुख बगदादी का कार्टून छापा था, जिसको लेकर आतंकवादी संगठन नाराज थे।
- मैगजीन के ट्विटर एकाउंट पर आज ही आईएस के सरगना अबु बकर अल बगदादी का कार्टून डाला गया था।
- शार्ली एब्दो फ्रांस की सबसे ज्यादा चर्चित व्यंग्यात्मक मैगजीन है। यह एक वीकली न्यूजपेपर है।
- इस बार मैगजीन के ताजा एडिशन की कवर स्टोरी एक इस्लाम विरोधी उपन्यास पर आधारित है।
- साल 2011 में भी शार्ली एब्दो मैगजीन पर हमला हो चुका है। उस पर पेट्रोल बम से हमला किया गया था।
- उस वक्त भी मैगजीन ने पैगंबर मोहम्मद से जुड़ा एक विवादित कार्टून छपा था।
- साल 2012 में मैगजीन के संपादक स्टीफन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि 'ना मेरे पास बीवी है, ना बच्चे हैं, और ना ही कार हैं घुटनों के बल जीने से अच्छा होगा की मैं जान दे दूं '
- सबसे पहले यह मैगजीन साल 1969 से 1981 तक चली, लेकिन बंद हो गई। 1992 में यह फिर शुरू हुई।
- साल 2005 में एक डैनिश न्यूजपेपर में मोहम्मद पैगंबर पर छपे कार्टूनों का दुनिया भर के मुस्लिमों ने विरोध किया था। जिसके बाद साल 2007 में शार्ली एब्दो ने वही कार्टून छाप दिया था, जिसकी बाद फ्रांस के दो बड़े मुस्लिम संगठनों ने मैगजीन पर केस किया था। हलांकि बाद में फैसला मैगजीन के पक्ष में रहा था।
- साल 2012 में मैगजीन ने पैगंबर पर व्यंग्यात्मक कार्टूनों की पूरी सीरीज पब्लिश की थी। इस सीरीज में कुछ कार्टून न्यूड थे। मैगजीन ने कार्टूनों की यह सीरीज उस वक्त छापी, जब इस्लाम पर आधारित एक फिल्म के विरोध में मिडल ईस्ट में अमेरिका के दूतावासों पर हमले हुए थे।













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