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आख़िरकार उत्तर कोरिया चाहता क्या है?

उत्तर कोरिया
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उत्तर कोरिया ने प्रशांत महासागर में स्थित अमरीकी द्वीप गुआम पर हमला करने की धमकी दी है. इसके साथ ही इसे 'कोरियाई प्रायद्वीप पर बन रही गंभीर स्थिति' की प्रतिक्रिया बताया है.

ये धमकी डोनल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच तीखी कहासुनी के बीच आई है. दूसरी ओर पूरी दुनिया उत्तर कोरिया की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को लेकर चिंतित है.

ऐसे में सवाल ये उठता है कि किम जोंग-उन इस पूरे मामले से हासिल क्या करना चाहते हैं?

उत्तर कोरिया सरकारी मीडिया से लेकर रेडियो और टीवी के माध्यम से राजनीतिक सोच को दुनिया के सामने रखता रहा है.

गुआम पर क्यों हमला करना चाहता है उत्तर कोरिया?

अमरीका पर परमाणु हमला कर देगा उत्तर कोरिया?

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उत्तर कोरिया को अस्तित्व की रक्षा का हक़

उत्तर कोरिया के सामने परेशानी की सबसे बड़ी बात ख़ुद को बचाना है.

उत्तर कोरिया पहले ही बता चुका है वह ख़ुद को बचाने के लिए एक बेहद ताक़तवर दुश्मन के साथ युद्ध में है. और, इसका दावा है कि ख़ुद की रक्षा के लिए परमाणु हथियार हासिल करना इसका अधिकार है.

सरकारी न्यूज़ एजेंसी केसीएनए ने एक लेख में कहा, "हमारे पास सबसे ताक़तवर परमाणु हथियारों का होना बिलकुल ठीक है. और, ख़ुद की रक्षा की ओर ये सही क़दम है. हमने ये क़दम देश की स्वायत्ता को बचाने के लिए उठाया है. अमरीका की ओर से दबाव और मनमानी से देश को बचाना हमारा अधिकार है."

उत्तर और दक्षिण कोरिया: 70 साल की दुश्मनी की कहानी

कोरियाई युद्ध से जुड़ी यादों ने उत्तर कोरिया के मानस पर गहरी छाप छोड़ी है, जो उत्तर कोरियाई उद्योग और शहरों के विनाश के साथ-साथ भारी जानमाल के नुक़सान के लिए अमरीका को ज़िम्मेदार ठहराता है.

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उत्तर कोरियाई सरकार ने सात अगस्त को कहा है, "अमरीका ने एक बार इस धरती पर ख़तरनाक युद्ध छेड़ा था जिससे ये ज़मीन ख़ून और आग के दरिया में तब्दील हो गई थी. अमरीका लगातार डीपीआरके की विचारधारा और संगठन को नेस्तनाबूद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है."

उत्तर कोरिया के आधिकारिक बयान अक्सर कोरियाई युद्ध और अमरीका की ओर से संघर्ष पैदा करने के साथ ब्लैकमेल करने से लैस रहते हैं. वो अमरीकी परमाणु हथियारों के दक्षिण-पूर्व एशिया में मौजूद रहने तक अमरीका को एक ख़तरा मानता है.

इतिहास की बात करता है उत्तर कोरिया

उत्तर कोरिया अक्सर लीबिया और इराक़ जैसे देशों का उदाहरण देता है जिनकी सरकारों को पश्चिमी ताक़तों ने जनसंहारक हथियारों के समर्पण के बाद पलट दिया.

उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया में छपे लेख के मुताबिक, "अगर डीपीआरके अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियार हासिल करने का रास्ता छोड़कर अमरीकियों और अन्य ताक़तों के दबाव-प्रलोभनों के सामने घुटने टेक देता तो हमारा हाल इराक़, लीबिया और अफ़ग़ानिस्तान से भी बुरा होता."

"इतिहास बताता है कि ताक़तवर परमाणु डिटरेंस बाहरी आक्रांताओं को परेशान करने में सबसे ज्यादा अच्छी तलवार के रूप में काम करती है.

अमरीकी आक्रामकता का जवाब

उत्तर कोरिया लगातार अमरीका की निंदा करता रहा है क्योंकि इसके मुताबिक अमरीका किम जोंग उन सरकार का सिर कलम करने की कोशिश कर रहा है.

उत्तर कोरिया दावा करता है कि ये बीते छह दशकों से जारी अमरीकी आक्रामकता का परिणाम है जो 1950 में शुरू हुआ था और आज तक जारी है.

"ज़मीन, पानी और हवा में अंजाम दिए जा रहे सैन्य अभियान बताते हैं कि अमरीकी अधिकारियों का परमाणु युद्ध को लेकर पागलपन हद पार करके असली युद्ध में पहुंच चुका है."

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बीती 9 अगस्त को केसीएनए पर छपा एक अन्य लेख चेतावनी देता है, "अमेरिका आपे से बाहर जा रहा है और बताता है कि 60 साल पहले अमरीका ने अपनी और 15 अन्य देशों को कोरियाई युद्ध में झोंक दिया लेकिन इन सेनाओं को महान कमांडर किम इल-संग के नेतृत्व वाली सेना और डीपीआरके के सामने घुटने टेकने पड़े थे.''

"अब जबकि अमरीका डीपीआरके को भड़काते हुए कह रहा है कि ये उत्तर कोरिया के साथ युद्ध की आशंका को ख़ारिज नहीं करता है तो हमें अमरीकी ज़मीनी और इसके सभी ठिकानों को ख़त्म कर देना चाहिए."

प्योंगयांग का दावा है कि कोरियाई युद्ध उत्तर कोरिया के दक्षिण कोरिया में प्रवेश से शुरू नहीं हुआ था बल्कि अमरीका ने शुरू किया था.

उत्तर कोरिया ये भी दावा करता है कि भविष्य में होने वाला युद्ध भी अमरीका और अमरीका के युद्ध-उन्मादी समर्थकों की ग़लती से होगा.

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कोरियाई एकीकरण लेकिन उत्तर कोरिया की शर्तों पर

उत्तर कोरियाई मीडिया में कोरियाई एकीकरण की मांग अक्सर देखने को मिलती है. इसके साथ ही मांग ये भी है कि उत्तर कोरिया एकीकरण उत्तर कोरिया की शर्तों पर हो.

रोडोंग सिनमन अख़बार में छपा लेख कहता है, "उत्तर और दक्षिण कोरिया के पुन: एकीकरण के ख़िलाफ़ काम कर रही ताक़तें सेना की प्रमुखता वाले कोरिया को बनाने में हमारे देश के प्रयासों को विफल नहीं कर पाएंगी."

उत्तर कोरिया ने लगातार अपने तरह के समाजवाद के आधार पर पूरे कोरिया को एक करने की इच्छा जताता रहा है.

विश्लेषकों का मानना है कि ये संभव है कि उत्तर कोरिया पुन: एकीकरण और होने वाली वार्ताओं को लेकर परमाणु हथियारों के दम पर दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या को चुनौती दे सकता है.

साल 2017 के नववर्ष पर अपने संदेश में किम जोंग उन ने कहा, "पुन: एकीकरण की मुहिम को सफल बनाने के लिए सेना को पहली प्रमुखता देने वाला राजनीतिक मॉडल काफी शक्तिशाली ज़रिया है."

( बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)

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