बड़े संकट में फंस सकती है अफगानिस्तान की राजधानी, अंधेरे में डूूब सकता है काबुल
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बहुत बड़ा बिजली संकट पैदा हो सकता है। बिजली बिल भुगतान नहीं करने की वजह से काबुल में बिजली की सप्लाई बंद की जा सकती है।
काबुल, अक्टूबर 05: अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान को कब्जा किए अब डेढ़ महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है और अब धीरे-धीरे तालिबान को सरकार चलाने के लिए आटे-दाल का भाव पता चल रहा है। अब खबर आ रही है कि बहुत जल्द अफगानिस्तान बहुत बड़ी संकट में फंस सकता है और कुछ ही दिनों बाद देश की राजधानी अंधेरे में डूब जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के पास पैसे नहीं हैं कि वो बिजली कंपनियों को पैसे दे सके।

अंधेरे में डूबेगा राजधानी काबुल!
अफगानिस्तान में कड़ाके की सर्दी के मौसम से पहले देश की राजधानी काबुल अंधेरे में डूब सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने मध्य एशियाई बिजली कंपनियों को ना ही बकाए का भुगतान किया है और नाही तालिबान के पैसे बिजली कंपनियों का कर्ज चुकाने के लिए पैसे हैं, ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बहुत जल्द बिजली कंपनियां राजधानी काबुल में बिजली की सप्लाई बंद कर सकती है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूएसजे) की रिपोर्ट के अनुसार, दाउद नूरजई, जिन्होंने देश के राज्य बिजली प्राधिकरण, दा अफगानिस्तान ब्रेशना शेरकट (डीएबीएस) के मुख्य कार्यकारी के रूप में इस्तीफा दे दिया था, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति को बहुत जल्द नहीं संभाला गया तो अफगानिस्तान में बहुत बड़ा मानवीय संकट उत्पन्न हो सकता है।

बन सकती है बेहद खतरनाक स्थिति
तालिबान के द्वारा काबुल पर 15 अगस्त को कब्जा करने के बाद अफगानिस्तान के बिजली प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी के पद से इस्तीफा दे दिया था और अब वो डीएबीएस अधिकारियों के साथ निकट संपर्क में है। नूरजई ने कहा कि, "परिणाम देश भर में होंगे, लेकिन विशेष रूप से काबुल में ब्लैकआउट होगा और जब सत्ता और दूरसंचार की बात होगी तो यह अफगानिस्तान को अंधेरे युग में वापस लाएगा।" उन्होंने कहा कि, "यह वास्तव में एक खतरनाक स्थिति होगी।" आपको बता दें कि, काबुल में बिजली संकट के काफी ज्यादा प्रभाव पड़ेंगे और देश के अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज तक नामुमकिन हो जाएगा और माना जा रहा है कि बिजली संकट की वजह से अफगानिस्तान में त्राहिमाम मच सकती है।

कहां से आती है बिजली ?
अफगानिस्तान में उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से बिजली का आयात किया जाता है और देश में बिजली जरूरत का आधे से ज्यादा हिस्सा इन्हीं देशों से बिजली खरीदकर पूरा किया जाता है। डब्ल्यूएसजे के मुताबिक, इस साल का देश में सूखा पड़ने की वजह से उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, जो बिजली संकट की वजह से काफी खतरनाक मोड़ तक जा सकता है।

मध्य एशिया से बिजली सप्लाईं
वहीं रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में राष्ट्रीय बिजली ग्रिड का अभाव है, और काबुल लगभग पूरी तरह से मध्य एशिया से आयातित बिजली पर निर्भर करता है। माना जा रहा है कि अगर तालिबान की तरफ से जल्द से जल्द बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया गया तो फिर बिजली की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। मध्य एशियाई देशों के साथ तालिबान के संबंध अच्छे नहीं रहे हैं और देश की सत्ता पर कब्जा करने से पहले तालिबान उन देशों को कई बार धमका चुका है, लिहाजा माना जा रहा है कि ये देश अब तालिबान पर रहम भी नहीं करेंगे और भुगतान नहीं करने पर बिजली सप्लाई बंद कर सकते हैं।

देश में गंभीर आर्थिक स्थिति
कई संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और अन्य विश्व निकायों ने अफगानिस्तान में गंभीर होती आर्थिक स्थिति को लेकर अलर्टड जारी किया है और कहा है कि बहुत जल्द अफगानिस्तान में बहुत बड़ा मानवीय संकट पैदा होने वाला है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल ने रविवार को कहा कि, ''अफगानिस्तान एक "गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है और एक सामाजिक-आर्थिक पतन समाज के सामने है, जो इस क्षेत्र और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित होगा।''

विदेशी सहायता पर देश की जीडीपी
एक ब्लॉग में जोसेप बोरेल ने कहा कि, "अफगानिस्तान दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बनने की तरफ तेजी से अग्रसर है, जिसकी एक तिहाई से अधिक आबादी प्रतिदिन 2 अमरीकी डालर से कम पर जीवन यापन करती है। सालों से अफगानिस्तान विदेशी सहायता पर ही निर्भर रहा है और और देश की जीडीपी में 43 प्रतिशत योगदान अंतर्राष्ट्रीय सहायता का है और अब जब अमेरिका ने आर्थिक सहायता देना बंद कर दिया है, तो अफगानिस्तान के सामने बहुत बड़ा संकट पैदा हो गया है।












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