Afghanistan: हजारा समुदाय के 7 मजदूरों की गोली मारकर हत्या, IS ने छेड़ रखी है जंग

काबुल। हिंसाग्रस्त पूर्वी अफगानिस्तान में शिया हजारा समुदाय के 7 मजदूरों की बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी है। इसके साथ ही एक महिला डॉक्टर की बम हमले में मौत हुई है। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने महिला डॉक्टर की हत्या की जिम्मेदारी ली है।

Terrorist

महिला डॉक्टर के रिक्शा में बम फिट कर उसे निशाना बनाया गया। हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि आईएस ने कहा महिला फिजीशियन अफगान खुफिया एजेंसियों की जासूस थी इसलिए उसकी हत्या की गई है।

फैक्ट्री में काम करते थे मजदूर
वहीं 7 मजदूरों की मौत के बारे में जानकारी देते हुए नंगरहार स्थित प्रांतीय पुलिस के प्रमुख जनरल जुमा गुल हेमत ने कहा हमले में मारे गए लोग सोर्क रोड जिले में स्थित एक प्लास्टर फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर हैं। मामले में चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रांतीय पुलिस के प्रवक्ता ने बताया सभी मजदूर अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक हजारा शिया समुदाय के हैं। इनमें से कुछ राजधानी काबुल, कुछ बामयान और कुछ उत्तरी बल्ख प्रांत से फैक्ट्री में काम करने के लिए आए थे।

अभी तक मजदूरों की हत्या की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है लेकिन इस इलाके में दाएश का काफी असर है। अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट को दाएश के नाम से जाना जाता है। इस आतंकी संगठन ने शियाओं को खिलाफ जंग छेड़ रखी है। इस्लामिक स्टेट लगातार हजारा समुदाय के लोगों पर हमले करता रहा है। इनमें अधिकांश काम करने वाले लोग शामिल होते हैं।

टीवी चैनल में काम करने वाली महिलाओं की हत्या
पूर्वी अफगानिस्तान आईएस के हमलों और उसके बढ़ते असर का गवाह रहा है। इसी मंगलवार को एक प्राइवेट टीवी चैनल में काम करने वाली तीन महिलाओं की आईएस के आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। तीनों महिलाएं काम करके घर के लिए निकली थीं लेकिन अलग-अलग हमलों में तीनों की हत्या कर दी गई। तीनों को लगभग एक ही समय में गोली मारी गई थी। इस्लामिक स्टेट ने तीनों महिलाओं की हत्या की जिम्मेदारी ली थी। आईएस महिलाओं के काम करने और ऑफिस जाने का विरोधी रहा है।

अनाम हमलों की संख्या बढ़ी
अफगानिस्तान में हाल में हो रहे कई हमलों की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है। इसके लिए सरकार तालिबान को जिम्मेदार ठहराती है जो देश के लगभग आधे हिस्से में अपनी पकड़ मजबूत रखे हुए है। वहीं तालिबान ऐसे हमलों में अपना हाथ होने से इनकार करता रहा है और सरकार पर जिम्मेदारी डालता रहा है।

गुरुवार को ही निशाना बनाकर हमला किए जाने मामलों की राष्ट्रपति अशरफ गनी ने निंदा की। साथ ही उन्होंने तालिबान की चुप्पी पर निशाना साधते हुए कहा कि तालिबान की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे हमलों की निंदा करे।

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