आज के बाद अकेले हवाई यात्रा नहीं कर सकेंगी अफगानिस्तान की महिलाएं, तालिबान ने जारी किया नया फरमान
जब से अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुआ है, तब से वह महिलाओं पर हर रोज नई पाबंदियां लगा रहा है।
काबूल, 28 मार्च। जब से अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुआ है, तब से वह महिलाओं पर हर रोज नई पाबंदियां लगा रहा है। अब तालिबान ने महिलाओं की अकेले हवाई यात्रा करने पर भी पाबंदी लगा दी है। 28 मार्च 2022 के बाद अफगानिस्तान की महिलाएं अकेले हवाई यात्रा नहीं कर सकेंगी। अफगानिस्तान के पुण्य के प्रचार और वाइस ऑफ प्रिवेंशन के मंत्रालय ने शनिवार को एयरलाइंस को इस बाबत एक पत्र भेजा और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि महिलाएं बिना पुरुष साथी के यात्रा न कर सकें।

पुरुष साथी के बगैर यात्रा नहीं कर सकेंगी महिलाएं
अपने फरमान में मंत्रालय ने कहा कि महिलाएं बिना किसी पुरुष या रिश्तेदार को साथ लिए बगैर अंतरराष्ट्रीय या घरेलू हवाई यात्रा नहीं कर सकेंगी। खबरों के मुताबिक इस आदेश से पहले जिन महिलाओं ने टिकट बुक करा ली है उन्हें रविवार और सोमवार को यात्रा करने की अनुमति होगी। इसके बार किसी भी महिला के अकेले यात्रा करने पर पाबंदी लगा दी जाएगी। ऐसी खबरें आई थीं कि शनिवार को काबुल हवाईअड्डे से कई महिलाओं को टिकट देकर लौटा दिया गया था
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अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान ने कहा था कि वह महिलाओं के प्रति 1996 से 2001 के बीच अपने पिछले शासन से अधिक उदारवादी रुख अपनाएगा, लेकिन महिलाओं की आजादी पर जिस तरह से पाबंदियां लगाई जा रही हैं उससे ऐसा बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा है। सत्ता में अपने पहले कार्यकाल के दौरान तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा, काम और यहां तक कि बिना किसी पुरुष रिश्तेदार के घर से बाहर निकलने पर भी रोक लगा दी थी। पिछले हफ्ते उन्होंने माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं को औपचारिक अध्ययन जारी रखने पर भी रोक लगा दी। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वे माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं की शिक्षा पर पाबंदी नहीं लगाएंगे।
तालिबान के इस निर्णय के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रमुख आर्थिक मुद्दों पर तालिबान के साथ होने वाली नियोजित बैठकों को रद्द कर दिया
तालिबान की प्रताड़ना झेल रहीं महिलाएं
ह्यूमन राइट्स वॉच और सैन जोस स्टेट यूनिवर्सिटी (एसजेएसयू) के ह्यूमन राइट्स इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि तालिबान शासन का अफगान महिलाओं और लड़कियों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। पिछले अगस्त में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से उन्होंने अधिकार उल्लंघन करने वाली नीतियां लागू की हैं, जिन्होंने महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए बड़ी बाधाएं पैदा की हैं। संघ, अभिव्यक्ति और आंदोलन की स्वतंत्रता को कम किया है और कई लोगों को पैसा कमाने से वंचित किया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी का सितम झेल रहा अफगानिस्तान
अफगानिस्तान मामलों की जानकार और एसजेएसयू के मानवाधिकार संस्थान के एक मुख्य संकाय की सदस्य हलीमा काज़ेम-स्टोजानोविक ने कहा कि फगान महिलाओं और लड़कियों को अपने अधिकारों और सपनों के पतन और उनके बुनियादी अस्तित्व के लिए जोखिम दोनों का सामना करना पड़ रहा है, वे तालिबान के अत्याचार के बीच फंस गई हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कार्रवाइयां हर दिन अफगानों को हताशा में धकेल रही हैं।












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