''उन्होंने कहा, तुम महिला हो, अपने घर जाओ'', अफगान महिला पत्रकार ने खोली तालिबान के ढोंग की असलियत
आरटीए पश्तो में काम करने वाली महिला एंकर शबनम डारवार को काम से निकाल दिया गया है और वो अब अफगानिस्तान से बाहर निकलना चाहती हैं।
काबुल, अगस्त 20: अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने जमीन पर क्या परिवर्तन ला दिए हैं, इसको लेकर कम ही रिपोर्ट सामने आ पाए हैं। ऐसे में अफगानिस्तान की महिला पत्रकार और टीवी एंकर शबनन डारवार ने मौजूदा स्थिति और ग्राउंड रिपोर्ट को लेकर सनसनीखेज खुलासे किए हैं। महिला पत्रकार ने इंडिया टूडे को दिए इंटरव्यू के दौरान जो खुलासे किए हैं, उससे साफ पता चलता है अफगानिस्तान में शासन को लेकर तालिबान जो दावे करता है और जो असलियत है, उसमें जमीन आसमान का फर्क है। आईये जानते हैं कि महिला पत्रकार शबनन डारवार ने तालिबान को लेकर क्या-क्या कहा है...

महिलाओं की आजादी पर सवाल
इंडिया टूडे की तरफ से पूछा गया कि तालिबान ने महिलाओं की आजादी शरिया कानून के तहत देने की बात की है, आपके साथ क्या हुआ? इस सवाल के जवाब पर शबनन डारवार ने कहा कि, ''मैं सरकारी समाचार संगठन आरटीए पश्तो में काम करती हूं। तालिबान के काबुल पर कब्ज़ा करने के बाद,मैं अगली सुबह अपने कार्यालय गई, जहां मुझे काम पर नहीं आने के लिए कहा गया। जब मैंने पूछा कि क्या कारण है, तो उन्होंने कहा कि नियम अब बदल गए हैं और महिलाओं को अब आरटीए में काम करने की अनुमति नहीं है। जब उन्होंने पहले घोषणा की थी, कि महिलाओं को पढ़ने और काम पर जाने की अनुमति दी जाएगी, तो मैं उत्साहित हो गई थी, लेकिन फिर मैंने अपने ऑफिस में वास्तविकता का अनुभव किया, जहां मुझे बताया गया कि महिलाओं को काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मैंने उन्हें अपना पहचान पत्र दिखाया, लेकिन फिर भी उन्होंने मुझे घर जाने के लिए कहा।

सभी एंकर्स निकाल गये?
नहीं, अभी तक उन्होंने केवल उन महिलाओं को काम पर नहीं आने के लिए कहा है, जो सरकारी संगठनों में काम करती हैं। चूंकि टोलोन्यूज एक निजी चैनल है, इसलिए उन्होंने वहां की महिलाओं के लिए ऐसा आदेश जारी नहीं किया है।
क्या आपको कोई विशेष धमकी मिली है?
उन्होंने कहा, "तुम लड़की हो, जाओ, अपने घर जाओ।" मेरे पुरुष सहकर्मी को काम पर जाने दिया गया, लेकिन मुझे नहीं जाने दिया गया। उन्होंने साफ कहा कि अब महिलाओं को आरटीए में काम नहीं करने दिया जाएगा।

तालिबान की कथनी-करनी में फर्क?
इंडिया टूडे की तरफ से सवाल पूछा गया कि, तालिबान की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि महिलाओं को काम करने की पूरी आजादी होगी लेकिन आपकी बातों को सुनकर लगता है कि तालिबान ने बहाना बनाया है? इस सवाल के जवाब पर महिला एंकर शबनन डारवार ने कहा कि, हाँ, वह TOLOnews पर था और वो सवाल मेरी दोस्त ने पूछा था। हम सभी को इस बात का अंदाजा था कि अगर तालिबान फिर से सत्ता में आया तो महिलाओं का क्या हो सकता है। लेकिन उस साक्षात्कार के बाद हमने सोचा कि चीजें अलग हो सकती हैं। हालांकि तालिबान सरकारी मीडिया के साथ जो कर रहा है वह अच्छा नहीं है।'' जब आप अन्य महिला पत्रकारों से बात करती हैं तो आप क्या चर्चा करती हैं? आपको क्या लगता है कि आप जैसी कामकाजी महिलाओं के लिए आगे क्या है? इस सवाल पर महिला एंकर ने कहा कि, '' फिलहाल मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है। मुझे नहीं पता कि भविष्य में क्या होने वाला है।''

निकलना चाहती हैं बाहर?
क्या आप भी अफगानिस्तान से निकलना चाहती हैं? इस सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि, ''हां, मैं अब यहां काम नहीं कर सकती। इस समय अफगानिस्तान में रहना मुश्किल है। अगर मुझे कोई मदद मिलती है, तो मैं अफगानिस्तान से बाहर चली जाऊंगी।'' इंडिया टूटे की तरफ से पूछा गया कि क्या आपको अपने परिवार के बारे में सोचकर डर लगता है, इस सवाल पर एंकर शबनन डारवार ने कहा कि, हां, मुझे अपनी जिंदगी से ज्यादा उनलोगों की जान की सलामती के बारे में सोचकर डर लगता है।












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