भारत आए अफगान खिलाड़ियों ने लहराया तालिबानी झंडा, क्या भारत सरकार से मिली है इजाजत?
शतरंज ओलंपियाड 2022 की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक अफगानिस्तान की टीम अफगानिस्तान के पूर्व तिरंगे झंडे के नीचे खेल रही है और तालिबान का झंडा लहराने की इजाजत उन्हें नहीं है।
चेन्नई, अगस्त 01: चेन्नई में 44वें शतरंज ओलंपियाड में भाग लेने वाले अफगान खिलाड़ियों को तालिबान का सफेद झंडा लहराते हुए देखा गया है, जबकि आधिकारिक तौर पर वे तत्कालीन अफगानिस्तान गणराज्य सरकार के पूर्व तिरंगे झंडे के तहत अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में खेल रहे हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि क्या तालिबान का झंडा लहराने की इजाजत उन्हें मिली थी?

तालिबानी झंडे के साथ अफगान खिलाड़ी
द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला रविवार को तब प्रकाश में आया, जब नेशनल रेडियो और टेलीविजन के महानिदेशक और खुफिया विभाग के कार्यकारी निदेशक और अफगानिस्तान इस्लामिक अमीरात के सांस्कृतिक आयोग के उप प्रमुख अहमदुल्ला वासिक ने टीम के सदस्यों में से एक की तस्वीर ट्वीट की, जिसमें वे आयोजन स्थल पर तालिबान का झंडा हाथ में लेकर पोज दे रहे थे। वसिक ने एक ट्वीट में कहा कि, "अफगानिस्तान सहित 199 देशों के खिलाड़ी भारत में खेलों के लिए एकत्र हुए हैं। खिलाड़ी कहीं भी हों, अफगानिस्तान का सफेद झंडा दरवाजे पर एक महत्वपूर्ण और विशिष्ट स्थान पर प्रदर्शित होता है।"

अफगानिस्तान का 'असली' झंडा गायब
हालांकि शतरंज ओलंपियाड 2022 की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक अफगानिस्तान की टीम अफगानिस्तान के पूर्व तिरंगे झंडे के नीचे खेल रही है। वहीं, अफगानिस्तान नेशनल चेस फेडरेशन के अध्यक्ष कुरैशी ओबैदुल्ला ने चेन्नई से दिप्रिंट को बताया कि, "हम दोनों झंडों का उपयोग कर रहे हैं। आयोजन स्थल के अंदर हम पुराने झंडे का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन मुख्य स्थल के बाहर हम सफेद झंडे का उपयोग कर सकते हैं। हम खिलाड़ी हैं, हमारा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।"

तालिबानी झंडे को किसी ने क्यों नहीं रोका?
उन्होंने कहा कि शुरू में किसी ने उन्हें तालिबान के झंडे के साथ पोज देने से नहीं रोका, और इसे मुख्य स्थल के बाहर पोस्टर में भी शामिल किया गया था। हालांकि, रविवार की सुबह जब वे खेलने आए तो वे पोस्टर कार्यक्रम स्थल से हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि, 'मेरी टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है और मुझे उम्मीद है कि हम फाइनल में जगह बनाने में सफल होंगे। ओबैदुल्ला ने कहा, यहां के अधिकारी पूरे प्रतिनिधिमंडल की अच्छी देखभाल कर रहे हैं। आपको बता दें कि, भारत तालिबान की अंतरिम सरकार या अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं देता है, और इसलिए सफेद झंडे के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिली है। यहां तक कि नई दिल्ली में अफगानिस्तान दूतावास भी पुराने झंडे का इस्तेमाल करता है।

तालिबान के साथ भारत का संवाद
ओबैदुल्ला ने यह भी कहा कि, अफगान टीम को मौजूदा ई-वीजा प्रक्रिया के जरिए वीजा मिला है, लेकिन उन्हें समय पर नहीं मिला, इस वजह से उनकी टीम 28 जुलाई को उद्घाटन समारोह में हिस्सा नहीं ले सकी। अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पिछले साल अगस्त में भारत द्वारा ई-वीजा प्रणाली शुरू की गई थी। नई दिल्ली तालिबान के साथ नियमित रूप से वार्ता में शामिल रही है, लेकिन यह काफी हद तक अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता और सहायता प्रदान करने तक ही सीमित रही है।

अफगानिस्तान को मानवीय सहायता
भारत पहले ही अफगानिस्तान के लोगों के लिए दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं के अलावा 40,000 मीट्रिक टन गेहूं भेज चुका है। नई दिल्ली की अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं भेजने की योजना है। पिछले महीने, भारत और विश्व खाद्य कार्यक्रम ने 10,000 मीट्रिक टन गेहूं की अंतिम किश्त भेजने के लिए एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, क्योंकि युद्धग्रस्त देश जून में अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में आए भूकंप से गंभीर भोजन की कमी से जूझ रहा है। उसी महीने भारत ने काबुल में अपना दूतावास भी फिर से खोल दिया, ताकि वहां जाने वाली सहायता की निगरानी की जा सके।












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