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लियोनार्डो डीकैप्रियो ने की केरल के शख्स की तारीफ, जानिए, कौन सा किया है कमाल?

हॉलीवुड के सुपरस्टार लियोनार्डो डी कैप्रियो ने भारत के एक व्यक्ति की खूब प्रशंसा की है। केरल राज्य में अलपुझा जिले के रहने वाले अब्राहम ने एक मछली की खोज की है जिसके कारण उनकी ये तारीफ हो रही है।

बीते साल अब्राहम ए. को नहाने के दौरान बाल्टी में कुछ मछलियां दिखी थीं। ये मछलिया आम मछलियों से कुछ अलग थीं। अब पता चला है कि ये मछली की एक नई प्रजाति है जो आज से पहले नहीं देखी गई थी।

Leonardo DiCaprio kerela man praise

इसे लेकर चर्चित हॉलीवुड अभिनेता लियोनार्डो डिकैप्रियो ने अब्राहम ए की काफी प्रशंसा की है। डिकैप्रियो लगातार पर्यावरण सुरक्षा लगातार वकालत करने लिए जाने जाते रहे हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट लिखकर मछली की एक दुर्लभ प्रजाति का पता लगाने के लिए अब्राहम को सराहा है।

एक सप्ताह पहले की गई इस पोस्ट में अभिनेता लियोनार्डो डिकैप्रियो ने लिखा, ''हम चारों तरफ प्रकृति से घिरे हुए हैं। कभी-कभी ऐसा होता है जब किसी भी आम दिन एक नई प्रजाति का पता लग जाता है। ये भारत के केरल निवासी अब्राहम हैं जिन्होंने स्नान करते समय मछली की एक नई प्रजाति की खोज की।''

डिक्रैप्रियो के इस पोस्ट के बाद केरल निवासी अब्राहम की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। अब्राहम ने मीडियो से बात करते हुए बताया कि उन्हें बीते साल जून में नहाते समय बाल्टी में एक छोटा सा लाल रंग का जीव मिला था।

अब्राहम ने बताया कि इसे देख वे उत्सुक हो गए क्योंकि उन्होंने इतना छोटा जीव पहले कभी नहीं देखा था। इसलिए, उन्होंने इसे एक जार में इकट्ठा किया और अपने पड़ोसी और कॉलेज के प्रोफेसर बेनी थॉमस को सूचित किया।

इसके बाद प्रजातियों की पहचान करने में मदद के लिए KUFOS से संपर्क किया गया। विश्वविद्यालय के डॉ राजीव राघवन ने शोध के बाद इसकी पहचान पथला ईल लोच के रूप में की। चूंकि यह जमीन के नीचे मिली है इसलिए इस मछली का नाम पाताल एल लोच रखा गया है।

डॉ. राघवन के अनुसार, पथला ईल लोच नाम संस्कृत शब्द पथला से लिया गया है, जिसका अर्थ है पैरों के नीचे। उन्होंने कहा कि "प्रकाश से छिपी हुई और मिट्टी की सतह के नीचे अलग-थलग, इस प्रजाति का दिखना बहुत दुर्लभ है।

उन्होंने कहा कि भूमिगत मीठे पानी की ये मछली 3.4 सेमी लंबी होती है और इसकी आंखें या ऊपरी पंख नहीं होते हैं। इसका शरीर पारदर्शी होता है। यह प्रजाति लाखों वर्षों से जीवित है। इसका आकलन करने के लिए और अधिक शोध कर रहे हैं।

डॉ राघवन ने कहा, "हम भाग्यशाली हैं क्योंकि अब्राहम ने इस नई जीव की प्रजाति मिलते ही हमें सूचित कर दिया था। आम तौर पर, लोग दुर्लभ चीजें मिलने पर वैज्ञानिक समुदाय को सचेत करने की जहमत नहीं उठाते। अब्राहम जैसे लोग अनजाने में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान में योगदान करते हैं। वे धन्यवाद के पात्र हैं।"

अब्राहम ने कहा कि उन्हें अपने घर के पानी के टैंक में उसी प्रजाति की चार और मछलियाँ मिलीं हैं। इस टैंक में 17 फीट गहरे कुएं से पानी पहुंचता है। आम तौर पर मछलियां नदियों, तालाब या झीलों में पाई जाती हैं लेकिन पाताल एल लोच ऐसी मछलियां हैं जो भूमिगत जल में होती हैं।

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