अजरबैजान-आर्मीनिया की जंग में अबतक 99 सैनिक मरे, जानें क्या है विवाद की वजह

आर्मेनिया और अजरबैजान की सीमा पर चल रही लड़ाई में दोनों देशों के 99 सैनिकों की मौत हो गई है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही दुश्मनी के और गहरा जाने की आशंका बढ़ गई है।

नई दिल्ली, 14 सितंबरः आर्मेनिया और अजरबैजान की सीमा पर चल रही लड़ाई में दोनों देशों के 99 सैनिकों की मौत हो गई है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही दुश्मनी के और गहरा जाने की आशंका बढ़ गई है। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान ने मंगलवार को कहा कि अजरबैजान द्वारा देर रात किए गए हमलों में उसके कम से कम 49 सैनिकों की मौत हो गई है। वहीं अजरबैजान ने कहा है कि अब तक उसके 50 सैनिक मारे गए हैं।

तस्वीर- फाइल

दोनों देशों ने एक-दूसरे पर लगाया आरोप

दोनों देशों ने एक-दूसरे पर लगाया आरोप

आर्मेनिया के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आधी रात के बाद अजरबैजानी बलों ने आर्मेनियाई क्षेत्र के कई हिस्सों में तोपों और ड्रोन से हमले किए। मंत्रालय ने कहा कि संघर्ष विराम के लिए रूस द्वारा त्वरित मध्यस्थता के प्रयास के बावजूद दिन में लड़ाई और तेज हो गई। आर्मेनिया सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक फिलहाल गोलाबारी कम हो गई है लेकिन अजरबैजान के सैनिक अब भी आर्मीनियाई क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह सोमवार देर रात और मंगलवार सुबह आर्मेनिया द्वारा बड़े पैमाने पर उकसावे का जवाब दे रहे थे। मंत्रालये के मुताबिक आर्मीनियाई बलों ने देश के तीन जिलों में सेना की चौकियों पर गोलीबारी की और अजरबैजानी इलाके में बारुदी सुरंगें बिछाईं।

भारत ने भी जंग रोकने की अपील की

भारत ने भी जंग रोकने की अपील की

बतादें कि रूस की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच संघर्षविराम चल रहा था और संघर्षविराम समझौते के तहत क्षेत्र में लगभग 2,000 रूसी सैनिक शांति सैनिकों के रूप में तैनात हैं। रूस ने दोनों पूर्व सोवियत देशों से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने का आह्वान किया है। इस बीच, भारत ने भी मंगलवार को दोनों देशों से आक्रमकता खत्म करने और तत्काल संघर्ष विराम करने की अपील करते हुए कहा कि सैन्य संघर्ष से किसी भी समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्त अरिंदम बागची ने कहा कि भारत का विश्वास है कि द्विपक्षीय विवादों का समाधान कूटनीति और संवाद से होना चाहिए।

अमेरिका ने भी जताई चिंता

अमेरिका ने भी जताई चिंता

वहीं, अमेरिका ने भी सोमवार को कहा कि वह हमलों की खबरों को लेकर बेहद चिंतित है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा कि, 'जैसा कि हमने लंबे समय से स्पष्ट किया है, संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता है।' उन्होंने कहा कि 'हम किसी भी सैन्य शत्रुता को तुरंत समाप्त करने का आग्रह करते हैं।' साल 2020 में लड़ी गई लड़ाई के बाद से आर्मीनिया-अजरबैजान सीमा पर लड़ाई की लगातार खबरें आती रही हैं। पिछले हफ्ते आर्मेनिया ने अजरबैजान पर सीमा पर हमले में अपने एक सैनिक को मारने का आरोप लगाया था। पिछले महीने अगस्त में, अजरबैजान ने कहा कि, उसने एक सैनिक खो दिया है, और कराबाख सेना ने कहा कि उसके दो सैनिक मारे गए और एक दर्जन से अधिक घायल हो गए। पड़ोसियों ने नागोर्नो-कराबाख क्षेत्र, अज़रबैजान में अर्मेनियाई-आबादी वाले एन्क्लेव पर दो युद्ध लड़े हैं।

3 दशक से भी अधिक समय से है विवाद

3 दशक से भी अधिक समय से है विवाद

दोनों देशों के बीच का ये विवाद तीन दशक से भी अधिक समय से चल रहा है। सोवियत शासन के अधीन रहे ये देश सोवियत संघ के विघटन के बाद अलग-अलग देश बने। आर्मेनिया बलों ने नागोर्नो-कराबाख के पास के क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। उस क्षेत्र को लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अजरबैजान के क्षेत्र के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन उस क्षेत्र में भारी तादाद में आर्मेनिया के नागरिक रहते हैं। इस क्षेत्र में चलने वाले संघर्ष की वजह से अभी तक 30 हजार से ज्यादा आम नागरिक मारे जा चुके हैं।

2020 में अज़रबैजान ने हासिल किया इलाका

2020 में अज़रबैजान ने हासिल किया इलाका

अज़रबैजान ने 2020 की लड़ाई में उन क्षेत्रों को फिर से हासिल कर लिया, जो एक रूसी हस्तक्षेप के बाद खत्म हो गया था और फिर हजारों निवासी अपने घरों में लौट आए थे, जिन्हें जंग की वजह से भागना पड़ा था। साल 2020 में छह सप्ताह के युद्ध में 6,500 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। दोनों देशों के नेताओं ने स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से एक संधि तक पहुंचने के लिए कई बार मुलाकात की है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

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