9/11: भारत की GDP का तीगुना किया खर्च, फिर भी आतंकवाद से जंग नहीं जीत पाया अमेरिका! जानिए क्यों?
अमेरिका ने 9/11 के बाद भारत की जीडीपी से तीन गुना ज्यादा रुपये खर्च किए, फिर उसे हार का सामना करना पड़ा।
नई दिल्ली, सितंबर 11: अमेरिका पर 20 साल पहले आज के ही दिन विश्व का सबसे बड़ा हमला किया गया था, जिसमें एक ही झटके में तीन हजार से ज्यादा लोग मार दिए गये थे। ये आतंकी हमला अलकायदा ने किया था, जिसका मास्टरमाइंड था आसोमा बिन लादेन। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई शुरू करने का ऐलान किया था और पिछले 20 साल में अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ जंग में भारत की जीडीपी का तीन गुना से ज्यादा रुपये खर्च कर दिए, लेकिन फिर भी वो आतंकवाद को खत्म नहीं कर पाया और आज की स्थिति ये है कि अफगानिस्तान पर फिर से तालिबान का कब्जा हो चुका है।

अमेरिका पर भीषण हमला
11 सितंबर 2001 को पहली बार अमेरिका को पता चला कि आतंकवाद क्या होता है। इससे पहले भारत की तरफ से लगातार पाकिस्तानी आतंकियों की करतूतों की ग्लोबल फोरम पर रखा जाता था, लेकिन भारत की बात पर कोई ध्यान देने के लिए तैयार नहीं था। लेकिन 11 सितंबर 2001 को जैसे ही अमेरिका में घुसकर आतंकवादियों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को उड़ाया, ठीक वैसे ही अमेरिका को भारत के दर्द का अहसास हो गया और उसी दिन के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी लड़ाई का ऐलान किया था। लेकिन, विश्लेषकों का कहना है कि 11 सितंबर के बाद दुनिया पूरी तरह से बदल गई और उसके बाद मानवाधिकार का भयानक उल्लंघन करने का दौर शुरू हुआ और पूरी दुनिया में इंसानों की आबादी का बड़े स्तर पर विस्थापन भी शुरू हो गया, जो अभी भी जारी है।
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अमेरिका की प्रतिज्ञा
9/11 के हमले के बाद अमेरिका ने आतंकवाद से लड़ने के लिए अमेरिका में नए सुरक्षा कानूनों की शुरुआत की गई और दुनिया भर में आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए एक अभियान चलाया गया। जिसके दूरगामी परिणाम पूरी दुनिया में देखने को मिल रहे हैं। पूरी दुनिया में सर्विलांस कार्यक्रम शुरू किया गया और विस्थापितों की संख्या में बाढ़ आ गई। वहीं, तीन अमेरिकी कार्यकर्ता समूहों की एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेजन, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे तकनीकी दिग्गजों ने 9/11 के हमलों के बाद से अमेरिकी सरकार के करार के साथ भारी मुनाफा कमाया है। अमेरिकी धरती पर हुए हमलों में करीब 3,000 लोग मारे गए थे।

8 ट्रिलियन डॉलर खर्च
ब्राउन यूनिवर्सिटी में अमेरिका द्वारा छेड़े गये आतंकवाद विरोधी अभियान को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट बनाईआ है। जिसमें बताया गया है कि अमेरिका ने पिछले 20 सालों में आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में कितने रुपये खर्च किए हैं। कॉस्ट ऑफ वॉर प्रोजेक्ट के अनुसार, अमेरिका के उपर 9/11 के बाद के युद्धों का व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ा है। पेंटागन के "ओवरसीज कंटीजेंसी ऑपरेशंस" में 8 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का खर्च किए गये और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में करीब 9 लाख लोगों की मौत हुई।

विस्थापितों की संख्या में बाढ़
कॉस्ट ऑफ वॉर प्रोजेक्ट में कहा गया है कि 2001 के बाद से अमेरिकी सेना ने आठ सबसे हिंसक युद्धों को अंजाम दिया है। जिसमें करीब तीन करोड़ 70 लाख लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा। जिसमें अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, लीबिया और यमन की बड़ी आबादी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आंकड़ा आधिकारिक है, जबकि अगर अनुमानित वास्तविक आंकड़ों की बात करें तो अमेरिका के ऑपरेशंस में करीब 5 करोड़ 90 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में देशों को, वहां रहने वाले लोगों को शारीरिक, सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक तौर पर भीषण नुकसान का सामना करना पड़ा।

अफगानिस्तान-पाकिस्तान में ऑपरेशन
रिसर्च में पता चला है कि अमेरिका ने 2001 में हमलों के बाद अपना सैन्य मिशन शुरू करने के बाद से अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों जगहों पर ऑपरेशन चलाए। अमेरिका के इस ऑपरेशंस में 2.313 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए। यह 9/11 के बाद के मिशनों में किए गए कुल बजटीय खर्च का हिस्सा था। रिसर्चर्स का कहना है कि, इस पैसे वो खर्च शामिल नहीं है, जो अमेरिकी सरकार इस युद्ध के अमेरिकी सैनिकों की आजीवन देखभाल पर खर्च करने के लिए खर्च करना है और न ही इसमें वो खर्च भी शामिल नहीं है, जिसे युद्ध लड़ने के लिए अमेरिका को कर्ज के तौर पर लेना पड़ा।












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