मलाला से बदला लेने के लिए तालिबान ने 84 बच्चों को मौत के घाट उतारा
पेशावर। मंगलवार दिन के 11 बजे पेशावर आर्मी स्कूल के बच्चों के लिए तबाही का मंजर लेकर आयी। स्कूल में 10-12वीं बच्चों की फेरवल पार्टी थी। जिस समय 14-15 साल के स्कूली बच्चे अपने स्कूल के दिनों का आनंद उठा रहे थे ठीक उसी समय नापाक मंसूबे लिए 6-7 तालिबानी आतंकवादियों ने स्कूल को निशाना बना दिया और ताबड़तोड़ बच्चों पर हमला करने लगे।

मासूम बच्चों को समझ में ही नहीं आ रहा था कि उन्हें किस बात की सजा मिल रही है और क्यों क्रूर और दुस्साहिक लोग उनकी जान के प्यासे हैं। देखते ही देखते बच्चों की हंसी और किलकारियों से गूंजने वाला स्कूल मासूम बच्चों की लाशों से पट गया है और इस समय वहां 84 बच्चों की निर्मम हत्या की जा चुकी है।
मलाला से बदला लेने के लिए तालिबान ने 84 बच्चों को मौत के घाट उतारा
हालांकि पाकिस्तानी सुरक्षाबल पूरी कोशिश कर रहे हैं आतंकवादियों से निपटने की और 4 आतंकी मर भी चुके हैं लेकिन अभी भी 500 बच्चों के साथ दो आतंकवादी स्कूल परिसर में मौजूद हैं।
इस गंदे और भयानक घटना को अंजाम दिया है तहरीक-ए-तालिबान ने, जिसने बयान जारी करके कहा है कि उसने ऐसा सेना से बदला लेने के लिए किया है जो कि बड़ी दिलेरी से हमारे परिवार का खात्मा कर देती है। हम उसे बस यह एहसास दिलाना चाहते थे कि बच्चों के खोने का दर्द क्या होता है।
तहरीक-ए-तालिबान ने ली नृशंस हत्या की जिम्मेदारी
तो वहीं पाकिस्तानी मीडिया से खबर आ रही है कि तालिबान ने अपना गुस्सा बच्चों पर इसलिए निकाला है क्योंकि वो मलाला युसूफजई को नोबेल प्राइज दिये जाने से खफा था।
टेलीविजन फुटेज में स्कूली छात्रों को डरा हुआ और रोता चेहरा
आपको बता दें कि टेलीविजन फुटेज में स्कूली छात्रों को डरा हुआ और रोता हुआ दिखाया गया है। उनमें से कुछ के चेहरों पर खून थे। एक छात्र को स्ट्रेचर पर ले जाते हुए दिखाया गया, जबकि एक को सुरक्षाकर्मी उठाकर ले जाते देखे गए। घायल और खून से लथपथ लोगों को बाहर निकालते हुए देखा गया, जबकि चिंतित अभिभावक भी बाहर इंतजार करते दिखे।
स्कूल की इमारत में 500 से अधिक छात्र और शिक्षक फंसे हुए हैं
स्कूल की इमारत में 500 से अधिक छात्र और शिक्षक फंसे हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने कुछ लोगों को कॉरीडोर में घायल देखा। स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि स्कूल में 1,400 से 1,500 छात्र पढ़ते हैं। 500 से अधिक छात्र व शिक्षक अब भी स्कूल परिसर में फंसे हैं।












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