6 बार एस्टेरॉयड कर चुके हैं पृथ्वी को तबाह, 1 KM व्यास वाले को लेकर आई टेंशन वाली खबर
नई दिल्ली: एस्टेरॉयड शुरू से ही वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। अब रिसर्च में कुछ चौंकाने वाली बातें पता चली हैं। जिसके मुताबिक पृथ्वी 37 हजार सालों में करीब एक बार एस्टेरॉयड के हमले का सामना करती है। इससे काफी नुकसान भी होता है। हालांकि नुकसान एस्टेरॉयड के आकार पर निर्भर करता है। माना जाता है कि 1 किमी व्यास वाला कोई भी एस्टेरॉयड पृथ्वी पर जीवन को पूरी तरह से मिटा देने की क्षमता रखता है।

भूकंप और सुनामी आएगी
आप सोच रहे होंगे कि अगर एस्टेरॉयड पृथ्वी के किसी कोने में गिरता है, तो वो दूसरे छोर को कैसे नुकसान पहुंचाएगा? इस सवाल का जवाब देते हुए वैज्ञानिकों ने कहा कि एस्टेरॉयड के गिरते ही लाखों लोग मारे जाएंगे। इसके बाद भूकंप, ज्वालामुखी में विस्फोट, सुनामी आएगी, जो कई देशों को तबाह कर देगी। वहीं आसमान में इतनी ज्यादा राख हो जाएगी कि सूरज की किरणें जमीन तक पहुंचेंगी ही नहीं, जिससे इंसानों के लिए जिंदा रहना मुश्किल हो जाएगा। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि 6 बार एस्टेरॉयड की वजह से पृथ्वी पूरी तरह तबाह हुई।

2.229 अरब साल पहले बड़ी टक्कर
रिसर्च के मुताबिक लगभग 2.229 अरब साल पहले एक एस्टेरॉयड गिरा था। माना जाता है कि ऑस्ट्रेलिया का याराबुब्बा क्रेटर (विशाल गड्ढा) उसी की वजह से बना। उस घटना के वक्त पृथ्वी का तापमान बहुत कम था, लेकिन याराबुब्बा के प्रभाव से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ी, जिसने वायुमंडल में आधा ट्रिलियन टन जल वाष्प छोड़ दिया, जिससे पृथ्वी की तस्वीर हमेशा के लिए बदल गई।

इस वजह से हुआ डायनासोर का अंत
वहीं मेक्सिको के Chicxulub में बड़ा गड्ढा है। रिसर्च में ये 66 मिलियन साल पुराना निकला। उस वक्त एक बड़ा एस्टेरॉयड पृथ्वी से टकराया था। ऐसा माना जाता है कि उसी के प्रभाव से डायनासोर समेत 74 प्रतिशत जीवित प्राणी खत्म हो गए।

जब समुद्री जीव हुए विलुप्त
रूस में उत्तरी साइबेरिया में भी 35 मिलियन साल पहले एक एस्टेरॉयड टकराया था, जिससे एक बड़ा गड्ढा हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस घटना के बाद ही इओसीन-ओलिगोसीन जैसे जानवर विलुप्त हुए थे। इस विलुप्ति ने मुख्य रूप से समुद्री और जलीय जीवों को प्रभावित किया।

सूर्य के पास जब दिखीं अज्ञात वस्तुएं
19वीं सदी के मैक्सिकन खगोलशास्त्री जोस बोनिला के नोट्स के मुताबिक हमारे ग्रह को एक उड़ने वाले अंतरिक्ष पिंड द्वारा लगभग नष्ट कर दिया गया था। उन्होंने 1883 में सूर्य के सामने से गुजरने वाली 300 से ज्यादा अज्ञात वस्तुओं को देखा था। उन्होंने उसकी कई सारी तस्वीरें लीं, लेकिन दूसरे वैज्ञानिकों ने उसे उनके लेंस पर जमी धूल कहकर खारिज कर दिया। हालांकि 2011 में मेक्सिको की एक यूनिवर्सिटी ने सुझाव दिया कि वो वस्तुएं धूमकेतु का टुकड़ा हो सकती हैं, जो पृथ्वी के कुछ सौ किलोमीटर के भीतर से गुजरे थे।

जब रूस में दिखी नीली रोशनी
1908 में रूस में बैकाल झील के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों ने क्षितिज के पार एक चमकदार नीली रोशनी देखी। इसके बाद एक तेज आवाज आई और सभी जमीन पर गिर गए। कहा जाता है कि इसकी चपेट में 80 मिलियन पेड़ आए थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस विस्फोट की वजह 50-60 मीटर का एस्टेरॉयड था। अब आप खुद अंदाजा लगाइए कि जब एक किलोमीटर व्यास का एस्टेरॉयड हमारे ग्रह से टकराएगा तो क्या होगा?












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