55 साल का प्रोफेसर बनेगा 'सुपर ह्यूमन'! 100 दिन तक चलेगा 'खतरों का खेल', टूटेगा वर्ल्ड रिकॉर्ड
साइंस और तकनीकी प्रगति को प्रमाणित करने के लिए कई मोर्चों पर इंसानों के जज्बे की जरूरत होती है। एक 55 वर्षीय प्रोफेसर ने ऐसी ही हिम्मत दिखाई है जो इन दिनों 100 दिन के एक मिशन पर है।

साइंटिस्ट्स इस विषय पर शोध कर रहे हैं कि मानव शरीर कितने दबाव को झेलने में सक्षम है। 55 वर्षीय कॉलेज प्रोफेसर और नौसेना के पूर्व गोताखोर जोसेफ डिटुरी इस रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं, जो 100 दिन बाद पानी के भीतर रहकर वापस लौटे हैं। प्रोफेसर जोसेफ डिटुरी अपने अध्ययन के जरिए ये जानने की कोशिस कर रहे हैं कि ह्यूमन बॉडी को दबाव की किस सीमा तक लंबे समय तक जोखिम के बीच रखा जा सकता है और अगर ऐसा किया गया तो इसका मानव जीवन पर क्या असर होगा।
73 दिन रिकॉर्ड को तोड़ेंगे डिटुरी
पूर्व अमेरिकी नौसेना गोताखोर व कॉलेज प्रोफेसर जोसेफ डिटुरी इन दिनों नौसेना के अनुसंधान का प्रमुख हिस्सा हैं। वे फ्लोरिडा में की लार्गो में जूल्स अंडरसी लॉज में स्थित 100 वर्ग फुट के निवास स्थान में रह रहे हैं। प्रोफेसर डिटुरी इस वक्त पानी के सतह से 55 वर्ग मीटर पानी में सतह से लगभग 30 फीट नीचे रह रहे हैं। प्रोफेसर का लक्ष्य पानी के भीतर रहने के 73 दिनों के लंबे रिकॉर्ड को तोड़ना है और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग कक्षाओं को ऑनलाइन पढ़ाते हुए इसे 100 दिनों तक बढ़ाना है।
डिटुरी के स्वास्थ्य पर कड़ी नजर
पिछले एक महीने से एक मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों की टीम प्रोफेसर डिटुरी के स्वास्थ्य पर कड़ी नजर रख रही है। इसके अलावा एक मेडिकल टीम भी कार्य कर रही है। जो इस बात को लेकर डेटा एकत्र कर रही है कि लंबे समय तक गोताखोर के प्रोफेशन में रहने वाले लोगों के शरीर पर क्या असर हुआ।
स्वास्थ्य जोखिम के बीच डिटुरी की सफर
अपने इस प्रोजेक्ट को लेकर प्रोफेसर डिटुरी ने पानी में प्रवेश करने से पहले कहा, "मानव शरीर इतने लंबे समय तक कभी भी पानी के भीतर नहीं रहा है, इसलिए मेरी बारीकी से निगरानी की जाएगी। यह अध्ययन हर तरह की जांच करेगा कि यह यात्रा मेरे शरीर को कैसे प्रभावित करती है, लेकिन मेरी शून्य परिकल्पना यह है कि बढ़ते दबाव के कारण मेरे स्वास्थ्य में सुधार होगा।"
28 साल तक नेवी ड्राइवर रहा प्रोफेसर
दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय की रिसर्च टीम का अहम हिस्सा डिटुरी काफी अनुभवी हैं। उन्होंने अमेरिकी नौसेना में 28 साल तक डाइविंग अधिकारी के रूप में सेवा की। वह 2012 में एक कमांडर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। रिटारमेंट के 11 सालों में अब वे 100 दिन एक अहम मिशन पर हैं।
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