अमेरिका के करीब होने के बाद भी इन 5 वजहों से रूस से दूर नहीं होगा भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ अनौपचारिक वार्ता के लिए रूस के शहर सोची पहुंच चुके हैं। दोनों दोनों नेताओं के बीच होने वाली मुलाकात के दौरान कई विस्तृत एजेंडों पर चर्चा होगी।
सोची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ अनौपचारिक वार्ता के लिए रूस के शहर सोची पहुंच चुके हैं। दोनों दोनों नेताओं के बीच होने वाली मुलाकात के दौरान कई विस्तृत एजेंडों पर चर्चा होगी। इन में अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ ही आतंकववाद पर भी चर्चा होने की संभावना है। इस वर्ष यह पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की पहली मुलाकात है। हालांकि इस वर्ष की शुरुआत में दोनों नेताओं के बीच फोन पर कई बार वार्ता हो चुकी है। अमेरिका से करीबी के बीच पीएम मोदी की यह रूस यात्रा कई मायनों में अहम है। हाल ही में पीएम मोदी चीन के शहर वुहान से लौटे हैं और यहां पर उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इसी तरह की एक अनौपचारिक वार्ता की थी। जानिए वह पांच वजहें कि आखिर क्यों रूस, आज भी भारत के करीब है और आने वाले वर्षों में करीब रहेगा।

दोनों के बीच रणनीतिक साझेदारी
अक्टूबर 2000 में जब अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन के साथ भारत-रूस के रणनीतिक संबंधों पा एक 'डिक्लेयरेशन' साइन किया था। दोनों देशों के बीच सोवियत संघ के खत्म होने के बाद यह पहला बड़ी राजनीतिक पहल थी। इस 'डिक्लेयरेशन' के साथ दोनों देशों के बीच वार्ता का एक नया अध्याय शुरू हुआ। दोनों देशों ने द्विपक्षीय वार्ता को मजबूत करने और कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को कई स्तरों पर मजबूत करने के लिए एक नया तंत्र तैयार हुआ। रूस, भारत के लिए कई वर्षों से एक मजबूत साझीदार साबित हुआ है। दोनों देशों के बीच आज अर्थव्यवस्था, राजनीति, मिलिट्री और असैन्य परमाणु ऊर्जा के अलावा एंटी-टेररिज्म और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी कई तरह से सहयोग बढ़ रहा है।

पाकिस्तान और चीन के करीब रूस
एक तरफ जहां भारत, अमेरिका के करीब हो रहा है तो वहीं रूस, पाकिस्तान के साथ संबंध गहरे करने में लगा है। साल 2016 में रूस और पाकिस्तान के बीच पहली मिलिट्री एक्सरसाइज तक हुई। यह एक्सरसाइज उस समय हुई थी जब भारत में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने उरी आतंकी हमले को अंजाम दिया था। भारत ने रूस से कई बार इस एक्सरसाइज को आगे बढ़ाने के लिए रिक्वेस्ट की, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। साल 2015 में रूस और पाकिस्तान के बीच एक इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट साइन हुआ जिसमें लाहौर से कराची तक एक गैस पाइपलाइन तक जाने के लिए दोनों देश रजामंद हुए। पाकिस्तान से अलग चीन भी रूस का सबसे ताकतवर साझीदार है और भारत के पारंपरिक दुश्मन पाकिस्तान का सबसे करीबी। रूस और पाकिस्तान के बीच बढ़ती करीबियां भारत के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है।

मिलिट्री पार्टनरशिप
भारत और रूस के बीच मिलिट्री साझेदारी पिछले छह दशकों से जारी है। आज भारत की सेनाओं के पास जितने भी हथियार हैं उसमें 60 प्रतिशत से ज्यादा हथियार मेड इन रशिया है। इसके अलावा भारत ने रूस से पिछले पांच वर्षों में 62 प्रतिशत हथियार आयात किए हैं। साल 2008 से 2012 तक यह आंकड़ां 79 प्रतिशत था। यह आंकड़ें स्टॉकहोम पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से जारी किए गए हैं। भारत के कुछ खास हथियार तो सोवियत और रूस में बने हैं। ऐसे में इन हथियारों की मेनटेंस के लिए भारत को हमेशा रूस की जरूरत होगी।

आर्थिक और परमाणु सहयोग
दिसंबर 2014 में दोनों देशों ने द्विपक्षीय रोजगार को साल 2025 तक 30 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। रूस के फेडरल सर्विस कस्टम के मुताबिक साल 2016 में दोनों देशों के बीच करीब 7.71 बिलियन डॉलर तक पहुंचा। हालांकि साल 2015 के मुकाबले इसमें 1.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट भी दर्ज की गई थी। रूस ने हमेशा से भारत की शांति के लिए परमाणु ऊर्जा की जरूरत को समझा है। दिसंबर 2014 में डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (डीएई) और रूस के रोस्ताम के बीच परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण सहयोग के मकसद से डील साइन हुई थी। इसके अलावा तमिलनाडु के कुडानकुलम में परमाणु संयंत्र भी रूस की मदद से ही बन रहा है।

स्पेस टेक्नोलॉजी में सहयोग
भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष में सहयोग करीब चार दशक पुराना है। साल 2015 में भारत के पहले सैटेलाइट आर्यभट्ट की लॉन्चिंग की 40वीं सालगिरह थी। इस सैटेलाइट को रूस जिसे उस समय सोवियत यूनियन कहते थे, उसके लॉन्चिंग व्हीकल सुयोज की मदद से लॉन्च कियस गयस था। वर्तमान समय में दोनों देश मानवयुक्त स्पेस फ्लाइट में संभावनाएं तलाशने की दिशा में काम कर रहे हैं।












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