पीएम मोदी और नए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच पांच एक जैसी बातें
जानिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक जैसी पांच बातें।
वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के नए राष्ट्रपति होंंगे। रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ष 2015 से चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। अब जबकि वह अमेरिका के नए राष्ट्रपति बन चुके हैं, उनसे नई उम्मीदें भी जगने लगी हैं।
लोंगों को आई 2014 की याद
डोनाल्ड ट्रंप जैसे-जैसे चुनावी अभियान में बढ़ते गए, लोगों को भारत में वर्ष 2014 की याद आने लगी। कुछ बातें एक जैसी लग रही थीं।
वहीं जब ट्रंप ने 'मेक अमेरिका ग्रेट' का जुमला उछाला तो भारत के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिया गया एक नारा याद अा गया।
वर्ष 2014 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने 'अच्छे दिन' का नारा दिया था। एक नजर डालिए दोनों नेताओं के बीच मौजूद पांच समान बातों पर।

मोदी के अच्छे दिन और ट्रंप का 'मेक अमेरिका ग्रेट'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में चुनावी अभियान के दौरान अच्छे दिन का नारा दिया था। उसी तरह से डोनाल्ड ट्रंप ने भी जनता से वादा किया है कि अगर वह राष्ट्रपति बन गए तो फिर वह अमेरिका को एक महान देश बना डालेंगे। पीएम मोदी के अच्छे दिन वाले नारे को यूपीए सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार और महंगाई ने चुनावी जीत में बदल दिया। राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में भी अमेरिका में बेरोगजगारी बढ़ी है। अमेरिकी जनता भी ओबामा की कुछ नीतियों से काफी नाराज है। ऐसे में ट्रंप के 'मेक अमेरिका ग्रेट' का नारा भी चुनावी जीत में बदल सकता है।

बाातों के जादूगर
पीएम मोदी और ट्रंप दोनों बखूबी जानते हैं कि लोगों को क्या सुनना पसंद है और वह उसी हिसाब से अपने भाषण तैयार रखते हैं। मोदी की इमेज देश और देश के बाहर एक शोमैन की है और कई देशों में उन्होंने अपनी शोमैनशिप को नजारा भी बखूबी पेश किया है। पीएम मोदी ने न्यूयॉर्क में स्टार वार्स की मशहूर लाइन को कोट किया तो जापान में ड्रम बजाया। वहीं अगर आप ट्रंप के चुनावी अभियान पर नजर डालेंगे तो आप यह बात अपने आप समझ जाएंगे। ट्रंप टीवी शो पर आते हैं और शो का एंकर उनके साथ मजाक करता नजर आता है।

हर बात के जानकार!
दोनों के विरोधियों की मानें तो दोनों ही कभी-कभी कुछ ऐसी बातें कर देते हैं जिससे लगता है कि सबकुछ उन्हें ही मालूम है। विरोधी कहते हैं दोनों इस बात पर यकीन करते हैं कि दोनों के पास इतनी क्षमता है कि किसी भी समस्या को खुद ही सुलझा सकते हैं। ट्रंप ने एक बार कहा था कि उनकी महिला आलोचकों ने कभी भी उन्हें अच्छे लगने की वजह से उनकी आलोचना नहीं की। वहीं मोदी कई बार इस तरह की बातें कह चुके हैं जिन्हें उनके विरोधियों ने गलत करार दिया है। विरोधी मोदी की आत्ममुग्धता का उदाहरण उनके वर्ष 2015 में पहने गए सूट के हवाले से देते हैं।

विवादित नेता
मोदी और ट्रंप दोनों ही चुनावी अभियान के समय एक विवादित नेता के तौर पर रहे हैं। मोदी के लिए जहां पीएम बनने से पहले माना जाता था कि वह अल्पसंख्यकों से नफरत करते हैं तो वहीं ट्रंप ने चुनावों में मुसलमानों के खिलाफ कई तरह के बयान देकर यह बात सही साबित कर दी है। ट्रंप जहां मुसलमानों और मैक्सिकों के शरणार्थियों को देश में प्रवेश से रोकने की बात कर चुके हैं तो वहीं मोदी ने कोलकाता में हुई अपनी एक रैली में बांग्लादेशी शरणार्थियों को बाहर भेजने तक की बात कर डाली थी। ट्रंप को मैक्सिकों की सीमा पर एक बड़ी दीवार बनाने की बात तक कह चुके हैं।

दोनों ही बड़ी पार्टी से जुड़े
पीएम मोदी शुरुआत में एक आरएसएस प्रचारक थे लेकिन धीरे-धीरे पार्टी में उनका कद बढ़ता गया। मोदी को गुजरात के सीएम की जिम्मेदारी मिली। यहां से उनके पीएम बनने का रास्ता साफ हुआ और वर्ष 2014 में वह देश के प्रधानमंत्री बने। सत्ता और पद तक का उनका सफर काफी निचले स्तर पर शुरू हुआ और एक मुकाम तक पहुंचा। वहीं ट्रंप राजनीति में तो नहीं रहे लेकिन अपने बिजनेस की वजह से वह कभी राजनीति और राजनेताओं से दूर नहीं रह पाए। बिजनेस ने उनका कद राजनीति में बढ़ाया और कई बड़े राजनेताओं से उनका संपर्क बढ़ा। मोदी की तरह ट्रंप भी अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी रिपब्लिकन पार्टी से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने को तैयार हैं।
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