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37 वर्ष पहले जापान के समंदर में बच्चों ने बोतलों में छोड़ा था एक संदेश......जानिए वह कहां मिला है

टोक्यो, 17 सितंबर: समंदर की लहरें कैसे आगे बढ़ती हैं, यह जानने के लिए 37 साल पहले कुछ स्कूली बच्चों ने एक प्रयोग किया था। इस प्रयोग के तहत इन बच्चों ने 750 बोतलों में एक खास संदेश डालकर जापान में टोक्यो के पास एक द्वीप से समंदर में डाल दिया था। इतने वर्षों में अबतक ये बोतलें दुनियाभर में अलग-अलग 17 जगहों पर मिल चुकी हैं। लेकिन, आखिरी 50वीं बोतल 2002 में जापान में ही एक समुद्र के तट पर मिली थी और उसके बाद से इस मिशन में लगे लोगों ने उसके बारे में सोचना भी बंद कर दिया था। लेकिन, इसी महीने टोक्यो से 6 हजार किलोमीटर दूर एक दूसरे महादेश से उस स्कूल को वापसी संदेश मिला कि उन्हें बोतल मिल गई है।

37 साल बाद मिली संदेश वाली वह खास बोतल

37 साल बाद मिली संदेश वाली वह खास बोतल

37 साल पहले शीशे की बोतलों में एक खास संदेश लिखकर जापान के एक हाई स्कूल के बच्चों ने विशेष मकसद से समंदर में छोड़ दिया था। इस संदेश का मकसद समंदर की लहरों के बारे में समझना था। जापान में टोक्यो के पूरब में स्थित चिबा के चोशी हाई स्कूल के नैचुरल साइंस क्लब के बच्चों ने 1984 और 1985 में समंदर में कुल 750 बोतलें छोड़ी थीं। इनका इरादा ये जांचने का था कि समंदर की लहरें कैसे बर्ताव करती हैं। इन बोतलों पर तीन भाषाओं में संदेश लिखकर डाले गए थे- अंग्रेजी, जापानी और पुर्तगाली। सब पर एक ही संदेश लिखा गया था, इसे पाने वाले भेजने वाले से संपर्क करें। ये बोतलें टोक्यो के पास मियाकेजिमा द्वीप के पास छोड़ी गई थीं।

37 साल में 6,000 किलोमीटर बहकर हवाई पहुंची बोतल

37 साल में 6,000 किलोमीटर बहकर हवाई पहुंची बोतल

उन 750 बोतलों में से आखिरी 50वीं बोतल 19 साल पहले यानी 2002 में जापान के ही दक्षिण-पश्चिम कागोशिमा प्रांत में मिली थी। 51वीं बोतल टोक्यो से 6 हजार किलोमीटर दूर 9 साल की एक बच्ची को जून महीने में हवाई में मिली थी, जिसके बारे में स्कूल को अब संदेशा मिला है। उस बोतल पर अभी भी पास्टकार्ड आकार वाला वह संदेश पढ़ने लायक है। अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी एएफपी ने शुक्रवार को बताया है कि स्कूल के वाइस प्रिंसिपल जुन हयाशी ने कहा, 'मैं बहुत ही ज्यादा हैरान था।.....50वीं बोतल 19 साल पहले मिली थी, इसलिए मुझे लगा कि वो खत्म हो गई हैं। मैंने नहीं सोचा था कि कोई और मिलेगा, मुझे लगा कि वे सब डूब गए हैं।'

जिस क्लब ने किया था प्रयोग वह 2007 में बंद हुआ

जिस क्लब ने किया था प्रयोग वह 2007 में बंद हुआ

वाइस प्रिंसिपल का कहना है कि 'सच में बहुत ही रोमांचक लग रहा है कि 51वीं बोतल मिल चुकी है।' हयाशी का कहना है कि 'उम्मीद है कि किसी को अब 52वीं बोतल भी मिल जाएगी।' खास बात ये है कि जिस क्लब ने रिसर्च के मकसद से बोतलों को समंदर में डाला था, वह 2007 में ही बंद हो चुकी है। हालांकि, स्कूल ने कहा कि छात्रों के दो प्रतिनिधि खोजकर्ता बोतल खोजने वाली को एक पत्र और एक छोटा झंडा भेजने की योजना बना रहे हैं, जिसका हवाई ट्रिब्यून हेराल्ड अखबार ने एब्बी ग्राहम नाम बताया है। एब्बी को वह बोतल हवाइयन पाराडाइज पार्क के पथरीले बीच पर मिली थी। उसमें स्पष्ट लिखा था कि इसे चोशी स्कूल के बच्चों ने डाला है और पाने वाले को उस स्कूल से संपर्क करना है।

'अतीत की यादें ताजा कर दी हैं'

'अतीत की यादें ताजा कर दी हैं'

1984-85 में नैचुरल साइंस क्लब की सदस्य रहीं मयूमी कोंडो ने कहा है कि इस खोज ने उनके स्कूली दिनों के उस "अतीत की यादें ताजा कर दी हैं।" वो बोलीं- 'सैंतीस वर्ष इंसान के लिए एक लंबा समय है, लेकिन दूसरी ओर, यह वास्तव में ये बताता है कि पृथ्वी और प्रकृति असल में कितनी बड़ी और रहस्यमय हैं।' एब्बी ने चोशी हाई स्कूल को सितंबर की शुरुआत में जो वापसी संदेश भेजा है उसमें उसने अपनी और अपनी बहन सुशी की ड्राइंग भी भेजी है। 1985 में बोतलें छोड़े जाने के बाद से अबतक कुल 17 जगहों से ये मिल चुकी हैं, जिनमें ओकिनावा, फिलीपींस, कनाडा,चीन, अमेरिका के पश्चिम तट और अलास्का तक शामिल हैं।(सभी तस्वीरें प्रतीकात्मक)

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