गोदाम में पड़ी है विदेशों से मिली 3 हजार टन मेडिकल मदद, क्या सरकार नहीं बांट रही है राज्यों को ?
क्या विदेशों से आया 3 हजार टन मेडिकल सामानों का डिस्ट्रीब्यूशन केन्द्र सरकार राज्यों को नहीं कर रहा है?
नई दिल्ली, मई 05: भारत में कोरोना वायरस पीड़ितों की मदद करने के लिए विश्व के अलग अलग देशों से 3 हजार टन मेडिकल मदद आ चुका है लेकिन ये विदेशी मदद विवादों में आ गया है। इस वक्त जब देश के करीब करीब हर अस्पताल को ऑक्सीजन सिलेंड और मेडिकल के दूसरे सामानों की जरूरत है, उस वक्त भारत सरकार पर विदेशों से मिले मेडिकल मदद को लेट से डिस्ट्रीब्यूट करने का आरोप लगा है। आरोप है कि विदेशों से जो मेडिकल सामान मदद के नाम पर भेजा जाता है उसे गोदाम में रख दिया जाता है और जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचाई जा रही है।
भारत सरकार का दावा
केन्द्र सरकार ने दावा किया है कि 24 तरह के अलग अलग किस्म के 40 लाख पीस मेडिकल सामान अभी तक देश के सभी 31 राज्यों और केन्द्र शासित राज्यों भेजे जा चुके हैं या फिर भेजे जा रहे हैं। 31 राज्यों के 86 मेडिकल संस्थानों में ये मेडिकल सप्लाई की गई है या की जा रही है। केन्द्र सरकार ने कहा है कि देश के 38 मेडिकल संस्थानों को पहले ही इमरजेंसी मेडिकल सामानों की सप्लाई की जा चुकी है। इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 1656 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स, 20 बड़े आकार के ऑक्सीजन कंसंट्रेर्स, 956 वेंटिलेटर्स, 350 बड़े आकार के ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ बेड साइड मॉनिटर, बीआईपीएपी मशीन्स, पीएसए ऑक्सीजन प्लान्ट्स, पल्स ऑक्सीमीटर और रेमडेसिविर दवा, पीपीई किट और मास्कों की सप्लाई पहले ही राज्य सरकारों को की जा चुकी है।
बीजेपी शासित राज्यों ने की पुष्टि
केन्द्र सरकार ने राज्यों को की गई मेडिकल सप्लाई को लेकर विस्तृत विवरण जरूर दिया है लेकिन किस राज्य को कितनी मेडिकल मदद मुहैया कराई गई है, इसको लेकर कुछ भी जानकारी नहीं दी गई है। ये भी नहीं बताया गया है कि किस अस्पताल या किस राज्य को को क्या सब मेडिकल मदद उपलब्ध करावाय गया है। इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ राज्यों ने मेडिकल मदद मिलने की पुष्टि की है तो कुछ राज्य ने मदद मिलने से साफ इनकार कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1500 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स और 5 क्रायोजेनिक ऑक्सीजन मिलने की पुष्टि की है, जिनमें से कुछ को अस्पतालों में भेज भी दिया गया है। वहीं, इंडिया टूडे से गुजरात स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स, वेंटिलेटर्स मिलने की पुष्टि की है। गुजरात सरकार ने कहा है कि मेडिकल सामानों की अस्पातालों तक पहुंचाने के लिए एक नोडल अफसर को तैनात किया गया है। वहीं, इंडिया टूडे से बात के दौरान मध्यप्रदेश, कर्नाटन और बिहार सरकार ने भी मदद मिलने की बात को स्वीकार किया है।
विपक्ष शासित राज्यों का इनकार
जहां केन्द्र सरकार ने लिस्ट निकालकर कहा है कि सभी राज्यों और केन्द्र शासित राज्यों को मदद भेजा गया है वहीं राजस्थान, पंजाब, झारखंड ने दावा किया है उन्हें केन्द्र सरकार ने क्या मेडिकल मदद भेजी है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। राजस्थान सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने कहा है कि राजस्थान को कोई मेडिकल मदद अभी तक नहीं मिली है और ना ही उन्हें इस बारे में जानकारी है कि केन्द्र सरकार ने मदद राज्यों को अलाउट भी किया है। इंडिया टूडे से झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री अरूण कुमार ने कहा कि 'केन्द्र सरकार को सवा लाख डोज रेमडेसिविर इंजेक्शन प्राप्त हुए हैं और उनमें से झारखंड को सिर्फ 2181 इंजेक्शन ही मिले हैं। इसके अलावा झारखंड को केन्द्र सरकार से और कोई मदद नहीं मिली है।' वहीं, सबसे हैरान करने वाली बात महाराष्ट्र स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से कहा गया है। महाराष्ट्र स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 'कस्टम डिपार्टमेंट से हमें कॉल जरूर आया था लेकिन उसमें क्या मैटेरियल है या क्या मेडिकल सामान हैं, उसकी जानकारी उन्हें नहीं है'
केरल का भी इनकार
वहीं, केरल सरकार ने भी केन्द्र से कोई मदद मिलने से इनकार कर दिया है। केरल स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि राज्य सराकर से जरूरत के बारे में भी अभी तक केन्द्र ने नहीं पूछा है। वहीं, तिरूवनंतपुरम के डीएमओ ने कहा कि उन्होंने केन्द्र से एंटीजन किट्स और पीपीई किट की मांग की थी जो राज्य को इस हफ्ते के आखिर तक मिल जाएंगे। लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि ये विदेशी मदद है या देशी। वहीं तेलंगाना सरकार ने इंडिया टूडे से कहा कि प्रदेश को इस हफ्ते के अंत तक 100 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स, एक लाख कम्यूनिटी हेल्थ केयर किट्स और 10 हजार पीपीई किट्स मिलेंगे। वहीं जब इंडिया टूडे ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से पूछा कि कुछ राज्य मदद की बात से इनकार कर रहे हैं तो केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से कोई आधिकारिक जबाव नहीं दिया गया।
स्वास्थ्य अधिकारी का जबाव
केन्द्रीय स्वास्थ्य विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने इंडिया टूडे को कहा है कि प्रायोरिटी के हिसाब से हम देख रहे हैं कि कहां ज्यादा जरूरत है और उस हिसाब से मेडिकल सामानों की सप्लाई की जा रही है। मेडिकल सामानों की सप्लाई जरूरत के हिसाब से ही राज्यों को होना है। ऐसे में विवाद पैदा कर मदद देने वाले देशों को गलत मैसेज दिया जा रहा है। केन्द्र सरकार के अधिकारी ने कहा कि 'हमारे पास भी निश्चित मात्रा में सामान है ऐसे में सावधानीपूर्वक सामानों की डिलिवरी कर रहे हैं, ताकि लोगों को सही तरह से मदद मिल सके'। केन्द्र सरकार की सफाई अपनी जगह सही हो सकती है लेकिन कई रिपोर्ट्स ऐसे हैं जिसमें कहा गया है कि दिल्ली एयरपोर्ट पर एचएलएल लाइफकेयर के गोदाम में मेडिकल सामान जमा हैं लेकिन अभी तक उनकी डिलिवरी नहीं की जा रही है। वहीं, कस्टम से क्लियरेंस मिलने में भी 2 से 3 दिनों की देर हो रही है।












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