11th Panchen Lama के साथ चीन ने क्या किया, 27 साल बाद क्यों उठ रहे सवाल ? जानिए

ल्हासा (तिब्बत), 14 अगस्त: तिब्बत में 14वें दलाई लामा के 'संभावित' उत्तराधिकारी 11वें पंचेन लामा के साथ चीन ने क्या किया ? वह और उनका पूरा परिवार पिछले 27 वर्षों से लापता है। वह जिंदा भी हैं या उनके साथ किसी तरह की अनहोनी की जा चुकी है, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सरकार के अलावा शायद ही दुनिया में किसी को इसकी भनक तक है। लेकिन,धर्म गुरु दलाई लामा में ही अपनी धार्मिक आस्था रखने वाले तिब्बतियों की आत्मा से चीन के शासकों का खौफ भी 11वें पंचेन लामा की यादों को नहीं मिटा पाया है। यह मुद्दा एक बार फिर उठा है और चीन की शी जिनपिंग सरकार पर वैश्विक स्तर पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

27 वर्ष पहले चीन ने किया था 11वें पंचेन लामा का अपहरण-रिपोर्ट

27 वर्ष पहले चीन ने किया था 11वें पंचेन लामा का अपहरण-रिपोर्ट

14 मई, 1995 को तिब्बतियों के 14वें दलाई लामा ने गेदुन चोएकी न्यिमा को तिब्बतियों के दूसरे सबसे बड़े धर्मगुरु 11वें पंचेन लामा के तौर पर मान्यता दी थी। न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक उसके तीन दिन बाद ही उनका अपहरण हो गया था और आजतक कोई सुराग नहीं मिला है। 27 साल पहले चीन की सरकार की ओर से हुआ यह जबरिया अपहरण आज भी रहस्य बना हुआ है। चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ने ना सिर्फ 11वें पंचेन लामा को अगवा किया था, बल्कि उनके पूरे परिवार को भी उठा लिया था। जिनके बारे में आजतक कुछ भी पता नहीं चल पाया है। यह भी जानकारी नहीं पाती है कि 11वें पंचेन लामा जीवित भी रखे गए हैं या उनके साथ कुछ बहुत बुरा किया जा चुका है ?

अपहण की सबसे खौफनाक घटनाओं में से एक

अपहण की सबसे खौफनाक घटनाओं में से एक

एजेंसी ने तिब्बत प्रेस के हवाले से बताया है कि चीन की सरकार की ओर से लामा का अपहरण दुनिया में किसी को जबरिया गायब करके रखने की सबसे लंबी घटनाओं में से एक है। चीन का हर कदम इसलिए संदिग्ध है, क्योंकि सीसीपी ने ना सिर्फ पंचेन लामा को पूरे परिवार के साथ गायब कर दिया, बल्कि उनकी जगह जबरन अपनी पसंद का एक पंचेन लामा भी नियुक्त कर दिया और तिब्बतियों को उन्हें स्वीकार करने के लिए मजबूर किया या कम से कम दुनिया को यह दिखाने की कोशिश की गई कि उन्होंने सीसीपी के मुखौटे को पंचेन लामा होने पर मुहर लगा दी है।

'जिनपिंग तिब्बतियों की पहचान मिटाने में लगे हैं'

'जिनपिंग तिब्बतियों की पहचान मिटाने में लगे हैं'

अब तिब्बतियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स ऑन फॉरेन अफेयर्स एंड इंटरनेशनल डेवलपमेंट के सामने चीन की ओर से तिब्बतियों पर होने वाली ज्यादतियों का मुद्दा उठाया है, जिसमें 11वें पंचेन लामा के गायब होने समेत तिब्बती आबादी की बाकी चिंताओं का भी जिक्र शामिल है। तिब्बती भाषा पर हमले के बारे में निर्वासित जीवन जी रहे तिब्बती नेता पेन्पा त्सेरिंग ने बताया है कि तिब्बती भाषा और धर्म भारत से आया है। उन्होंने कहा, 'जब हू जिन्ताओ राष्ट्रपति बने तो उन्होंने दोहरी भाषा को लागू किया। लेकिन, वह ठीक था। आपको अलग भाषाएं भी सीखनी थी। लेकिन, जब शी जिनपिंग सत्ता में आए तो अब एक राष्ट्र, एक भाषा और एक संस्कृति है। इस नीति के साथ चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी हमारी जड़ों यानी पहचान तक को मिटा रही है।'

'जिनपिंग के कार्यकाल में चीजें भयावह'

'जिनपिंग के कार्यकाल में चीजें भयावह'

उन्होंने आगे कहा, 'हम जानते हैं कि चीन सरकार का यह राजनीतिक फैसला है, क्योंकि यह परम पूज्य दलाई लामा के पुनर्जन्म से भी संबंधित है। क्योंकि, दलाई लामाओं और पंचेन लामाओं के बीच अवतारों की पारस्परिक मान्यता है। निजी तौर पर मुझे लगता है कि चीन ने युवा लड़के गेदुन चोएकी न्यिमा को मान्यता ना देकर बड़ी रणनीतिक गलती की है, जिसे कि परम पूज्य ने मान्यता दी थी। अगर चीन ने ऐसा किया होता तो वह बच्चे को अपने नियंत्रण में रख सकता था।' फायूल की रिपोर्ट के मुताबिक पेन्पा त्सेरिंग ने चीन सरकार की इन कोशिशों को भी खारिज कर दिया, जिसमें वह तिब्बत को चीन का हिस्सा साबित करने पर जोर दे रहा है। वे बोले- 'राष्ट्रपति जिनपिंग के कार्यकाल में चीजें इतनी भयावह दिखती हैं कि निकट भविष्य में बातचीत की उम्मीद भी बहुत ही मुश्किल लगती है।' उन्होंने समिति से सर्वसम्मति से चीन-तिब्बत बातचीत फिर शुरू करने को लेकर एक प्रस्ताव पारित करने का अनुरोध किया।

सेंट्रल तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग हैं पेन्पा

सेंट्रल तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग हैं पेन्पा

पेन्पा सेंट्रल तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग (राष्ट्रपति) भी हैं। वह हाल ही में पिछले साल अपने चुनाव के बाद अपनी पहली वॉशिंगटन यात्रा पर थे। सिक्योंग के पद पर उनका चुनाव पिछले साल 11 अप्रैल, 2021 को हुआ था और वह लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए तिब्बितयों के नेता हैं। दलाई लामा के राजनीति से रिटायरमेंट लेने के बाद पेन्पा तिब्बत के दूसरे सिक्योंग हैं। वह तिब्बत की निर्वासित संसद के स्पीकर पद पर भी रह चुके हैं और वॉशिंगटन स्थित तिब्बत ऑफिस के प्रतिनिधि भी रह चुके हैं। 24 से 30 अप्रैल की अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान वह अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी से भी वार्ता कर चुके हैं। (तस्वीरें-फाइल)

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