Indore news: नशा खोरी पर लगाम लगाने के लिए चलेगा अभियान, टीएल बैठक में बना खास प्लान
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में नशे की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिये जागरूकता, जानकारी संकलन और प्रभावी कार्यवाही के लिये अभियान चलाया जायेगा। इंदौर इस माह भी सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों के निराकरण में प्रदेश के टॉप फाइव जिलों में शामिल है।
इंदौर जिला लगातार तीन माह से टॉप फाइव में आ रहा है। अगला लक्ष्य जिलों को पूरे प्रदेश में अव्वल बनाने का है। जिले में शासकीय स्कलों की एक हजार कक्षाओं को स्मार्ट बनाने का अभियान भी प्रारंभ किया जा रहा है।

कलेक्टर ने दिए दिशा-निर्देश
कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी की अध्यक्षता में समय-सीमा के पत्रों के निराकरण (टी.एल.) बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी वंदना शर्मा, अपर कलेक्टर सपना लोवंशी, रोशन राय तथा राजेन्द्र रघुवंशी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। बैठक में कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने निर्देश दिये कि सभी अधिकारी मिलकर अपने-अपने स्तर पर नशाखोरी से समाज को पूरी तरह मुक्त करायें। स्कूल, कॉलेजों तथा आस-पास विशेष ध्यान दें। बस्तियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाये। जिले में नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिये सभी मिलकर जागरूकता, जानकारी संकलन और कार्यवाही के लिये अभियान चलायें। उन्होंने बताया कि सभी अधिकारियों को एक-एक कॉलेज की जवाबदारी दी जायेगी। यह अधिकारी कॉलेजों में पहुंचकर नशाखोरी के विरूद्ध वातावरण निर्माण करेंगे। साथ ही वे कॉलेजों के प्रोफेसरों और विद्यार्थियों से मिलकर नशे के संबंध में जानकारी संकलित कर प्रस्तुत करेंगे। अधिकारियों का दल भी बनाया जायेगा। इस दल में एनजीओ भी शामिल रहेंगे। उन्होंने आबकारी विभाग के अमले और सभी एसडीएम को निर्देश दिये कि वे पुलिस के साथ मिलकर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करें। क्षेत्र का नियमित रूप से सघन भ्रमण कर निगरानी रखें। उन्होंने विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश भी दिये। साथ ही उन्होंने बताया कि सीसीटीवी केमरों की संख्या बढ़ाकर निगरानी व्यवस्था और पुख्ता बनाया जायेगा।
बैठक में हुई ये बात
बैठक में कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने बताया कि, इंदौर जिले में शासकीय स्कूलों की एक हजार कक्षाओं को स्मार्ट बनाने का अभियान प्रारंभ किया जायेगा। इस अभियान में उन्होंने अधिकारियों को पूर्ण सहयोग देने के निर्देश भी दिये। उन्होंने बताया कि जनसहयोग से सरकारी स्कूलों की दशा और दिशा सुधारने का बढ़ा कार्य हाथ में लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में कक्षाओं की अंदरूनी व्यवस्थाओं को दुरस्त किया जायेगा। कक्षाओं में प्रोजेक्टर, कम्प्युटर सहित अन्य आधुनिक उपकरण और तकनिक उपलब्ध करायी जायेगी। प्रत्येक कक्षा को स्मार्ट बनाने के लिये लगभग तीन लाख रूपये खर्च होंगे। इस कार्य में दानदाताओं, शाला प्रबंधन समिति, आमजन और एनजीओ की मदद भी ली जायेगी।
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