MP News: बारिश से मिली राहत, इस तरह किसान बचा सकते हैं सोयाबीन की फसल

मध्य प्रदेश में इन दिनों मानसून की बेरुखी ने सभी को परेशान किया हुआ है, जहां पिछले लगभग एक महीने से बारिश नहीं होने से किसानों के चेहरे पर जहां चिंता है, तो वहीं अब किसानों की चिंता कम करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण उपाय बताएं हैं।

मानसून की बेरुखी का आलम कुछ ऐसा है कि, अब इसका सीधा असर किसानों की फसलों पर भी पड़ने लगा है, जहां मध्य प्रदेश का पीला सोना कहलाने वाली सोयाबीन की फसल अब कम बारिश के चलते प्रभावित हो रही है।

Indore

इन उपायों से बचेगी फसल

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग उपसंचालक एम.एस.देवके ने जिले के सोयाबीन कृषकों को आवश्यक सलाह दी है। उन्होंने बताया कि, सोयाबीन की फसल लगभग 55-75 दिन की है तथा फसल फूल आने, फलिया बनने या दाना भरने की अवस्था में है, जो कि विगत माह में वर्षा की कमी से उत्पन्न स्थिति से प्रभावित हो रही है, ऐसी स्थितियों में सोयाबीन कृषकों को सलाह दी जाती है की, फूल आने या फलियों में दाने भरने की स्थिति सोयाबीन फसल के लिए मुख्य अवस्था होती है। भूमि में दरारे आने से पहले या प्रारम्भिक अवस्था में ही उपलब्ध होने पर वरियता क्रम के अनुसार स्प्रिंकलर/ड्रिप/फ्लड पद्धति से सिंचाई करें।

ये उपाय भी होंगे कारगर साबित

साथ ही सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने की स्थिति में प्राथमिकता के आधार पर हल्की भूमि में सिंचाई करें।सोयाबीन एवं मक्का फसल में पहले सिंचाई करें पश्चात कपास एवं अन्य फसलों में करें, जिन खेतों में दरार पड़ गयी है, उनमें स्प्रिंकलर या ड्रिप से सिंचाई करें। स्प्रिंकलर या ड्रिप सिंचाई उपलब्ध न होने पर ऐसे खेतों में शाम के समय सिंचाई करें, जिससे वातावरण ठंडा रहेगा एवं फसल में दाने पूर्ण भरेंगे। पत्ती खाने वाली इल्लियों के साथ रस चूसने वाले कीट एवं तना छेदक कीट के नियंत्रण हेतु क्लोराएन्ट्रानिलिप्रोल 9.30 $ लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत या थायोमिथाक्साम 12.60 प्रतिशत $ लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत का छिड़काव करें।

ये उपाय भी कर सकते हैं

फल्ली छेदक इल्ली का प्रकोप होने पर इंडोक्साकार्ब 15.8 एस.सी. या फ्लुबेंडीयामाइड 39.35 एस.सी. या टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एस.सी. या क्लोराएन्ट्रानिलिप्रोल 18.50 एस.सी. का प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें। इसके साथ ही पीला मोजेक वायरस के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल रोगग्रस्त पौधे को खेत से उखाड़कर फेक दे तथा खेत में विभिन्न स्थानों पर पीला स्टिकी द्रेप लगाये एवं सफ़ेद मक्खी के नियंत्रण हेतु एसिटामिप्रिड 25 प्रतिशत $ बायफ्रेंथिन 25 प्रतिशत डब्ल्यू जी. या बीटासायफ्लुथ्रिन $ इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें।

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