MP Weather News: बारिश पर लगे ब्रेक से किसान परेशान, अब जल्द बरसेंगे बदरा, कैसे बचेगी सोयाबीन, जानिए?
मध्य प्रदेश में इन दिनों मानसून की बेरुखी ने सभी को परेशान किया हुआ है, जहां पिछले लगभग एक महीने से बारिश नहीं होने से किसानों के चेहरे पर जहां चिंता है, तो वहीं अब सरकार से लेकर प्रशासन तक सभी परेशान नजर आ रहे हैं। इधर, अब मौसम वैज्ञानिकों ने जल्द ही प्रदेश में बारिश होने की संभावना जताई है।
मानसून की बेरुखी का आलम कुछ ऐसा है कि, अब इसका सीधा असर किसानों की फसलों पर भी पड़ने लगा है, जहां मध्य प्रदेश का पीला सोना कहलाने वाली सोयाबीन की फसल अब कम बारिश के चलते प्रभावित हो रही है।

फसलों पर पड़ा असर
कृषि महाविद्यालय इंदौर के नोडल अधिकारी ग्रामीण कृषि मौसम सेवा डॉ. एचएल खपाड़िया ने बताया की, सोयाबीन 55 से लेकर 70 दिन की प्राप्त हो गई है। अलग-अलग ड्यूरेशन के हिसाब से लगभग कुछ लंबी अवधि की फसल में फसल फूल वाली अवस्था से फली वाली अवस्था में परिवर्तित हो रही है, जहां फली में दाना भरना शुरू हो गया है। एक महीने का सूखा पड़ गया है, इसमें जो फली वाली फसल है, जिसमें फली का दाना बन रहा है, ऐसी फसल में किसान के पास चार से पांच दिन का समय है, यदि वे नमी बचा ले तो, वहीं जिस जमीनों में नमी खत्म हो गई है, वहां नुकसान होने की संभावना है।

किसानों पर पड़ेगा सीधा असर
किसान नेता जीवन शर्मा ने बताया कि, बारिश नहीं होने से किसानों की अत्यंत ही दयनीय स्थिति हो गई है, आने वाले दो-चार दिनों में बारिश नहीं होती है, तो मध्य प्रदेश जहां सोयाबीन को पीला सोना कहा जाता है, उसे बड़ा झटका लगेगा, जिसका सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा, और किसानों की जब पर भी पड़ेगा। यदि सोयाबीन की फसल खराब होती है, तो इसका प्रभाव आगामी फसल पर भी पड़ेगा।

जल्द पड़ेगी बारिश की बौछार
कृषि महाविद्यालय इंदौर के मौसम वैज्ञानिक रणजीत वानखेड़े ने बताया कि, साउथवेस्ट मानसून का जो ट्रेड जोन है, वह ऊपरी क्षेत्रों में है, जिसकी वजह से बारिश नहीं हो पा रही है। साथ ही कोई वेस्टर्न डिस्टरबेंस या साइक्लोनिक सरकुलेशन मध्य प्रदेश के आसपास नहीं है। इस कारण अभी बारिश नहीं हो रही, आने वाले दिनों में एक साइकलोनिक सरकुलेशन वाया बंगाल की ओर उठा है, जिसकी वजह से साउथ के साथ ही उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में बारिश होने की संभावना है, जिसका इफेक्ट मध्य प्रदेश में भी रहेगा, जहां 7 से 8 सितंबर से बारिश होने की संभावना है।

ज्योतिषाचार्य का ऐसा है मत
ज्योतिषाचार्य पंडित नीरज शर्मा बताते हैं कि, मेष राशि में जो राहु और बृहस्पति का एक ग्रहण योग बना हुआ है, जिसे गुरु चांडाल योग कहते हैं, यह बने हुए 6 महीने हो गए हैं, लेकिन जब बृहस्पति पीड़ित होता है, तो मौसम में उतनी सुगमता नहीं रहती, और अति वृष्टि के साथ ही अनावृष्टि की व्यवस्था बैठती है। साथ ही बुद्ध और शुक्र ग्रह पर जब बृहस्पति की दृष्टि आती है तो बारिश के योग बनते हैं, लेकिन बुद्ध और शुक्र जब मंगल के साथ बैठते हैं तो उन पर यदि मंगल की दृष्टि आती है तो बाढ़ जैसी स्थिति आती है, और कहीं-कहीं बारिश होती है, और सूखा पड़ता है। अभी ऐसी व्यवस्था बैठी हुई है। सितंबर महीने के 15 से 20 दिन ऐसे ही निकलेंगे, जिसके बाद 20 सितंबर के बाद से ऐसी स्थिति बनेगी जिसमें बारिश होगी।
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