बहन ने लावारिस शव को दिया 'कफन', मौत के चार दिन बाद पता चला वो था सगा भाई
इंदौर, 29 मार्च। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक महिला ने अनजाने में अपने सगे भाई को 'कफन' दिया। चार दिन बाद जब वह पुलिस थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाने गई तो उसे पता चला कि वो लावारिश शख्स ही उसका सगा भाई था।

दरअसल, गायत्री नगर के रहने वाले दिलीप राठौर (21) ने 25 मार्च की रात ट्रेन के सामने कूदकर खुदकुशी कर ली। वह घर से खाना खाकर टहलने के लिए निकला था। दूसरे दिन यानी 26 मार्च की शाम तक घर नहीं लौटा तो परिजनों और रिश्तेदारों ने उसकी तलाश की।
इंदौर के अन्नपूर्णा पुलिस थाना इलाके में रेलवे क्रॉसिंग के पास रहने वाली मनीषा पंवार के घर पुलिस ने शुक्रवार को आधी रात के बाद दस्तक दी थी। उनसे रेलवे ट्रैक पर पड़ी लाश को बांधने के लिए चादर मांगी।
मनीषा ने पुलिस को एक चादर दी और वापस घर आकर सो गई। उसे लगा कि उसने किसी अनजान व्यक्ति के लिए पुलिस की मदद की है, लेकिन जब हकीकत पता चली तो कलेजा मुंह को आ गया।
उसके माता-पिता ने बहन मनीषा को भी खबर कर दी। जब कहीं पता नहीं चला तो रविवार रात को गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे। पुलिस ने उनसे सुबह आने का कहकर लौटा दिया था।
दिलीप के परिजन सोमवार को फिर थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस को दिलीप का फोटो बताया। पुलिस ने चार दिन पहले मिले शव से उसकी पहचान कराई तो परिजनों के लिए जमीन और आसमान हिल गए। यह मनीषा का भाई था। पुलिस ने शव परिवार के सुपुर्द कर दिया।
हालांकि, तीन दिन तक उसकी शिनाख्त नहीं होने के कारण पुलिस कानूनी प्रक्रिया से अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही थी। क्योंकि, पुलिस ने ट्रैक पर पड़े शव की तलाशी ली, लेकिन उसे ऐसा कुछ नहीं मिला था, जिससे पहचान हो सके।
पुलिस ने बताया कि दिलीप रात में खाना खाने के बाद टहलने का कहकर निकला था। परिवार को लगा वह घर में आकर सो गया होगा। सुबह परिवार के लोग रिश्तेदार की गमी होने के चलते वहां चले गए थे।
अगले दिन शाम तक परिवार को दिलीप की कोई जानकारी नहीं लगी। इसके बाद उसे ढूंढना शुरू किया। मनीषा के मुताबिक दिलीप चोइथराम मंडी में काम करता था। उसके पिता भी मजदूरी करते हैं। सोमवार शाम परिवार ने उसका अंतिम संस्कार किया।












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