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Indore News: तेजी से होगा कॉलोनियों का विकास, इस तरह मिलेगा अनुमति से लिए लाइसेंस

मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में नयी कॉलोनियों को विकसित करने की अनुमति और कॉलोनाईजर के लायसेंस के लिए अब किसी भी कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। इधर-उधर भी नहीं भटकना होगा।

कॉलोनियों की विकास अनुमति और कॉलोनाईजर के लायसेंस के लिए आवेदन लेने और अनुमति जारी करने और लायसेंस देने के लिए कलेक्‍टर श्री आशीष सिंह की पहल पर नवाचार के तहत ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई है। इसके तहत कॉलोनाईजर रजिस्ट्रेशन एवं ऑनलाइन परमिशन सिस्टम(क्रॉप्स) इंदौर नाम से पोर्टल तैयार किया गया है।

Indore

जानकारी कलेक्टर कार्यालय में कलेक्टर आशीष सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई बैठक में दी गई। बैठक में अपर कलेक्टर गौरव बेनल, क्रेडाई के संदीप श्रीवास्तव सहित अन्य कॉलोनाईजर, डेवलपर्स, संबंधित विभागों के अधिकारी आदि मौजूद थे।

बैठक में सभी ने कलेक्टर आशीष सिंह के इस नवाचार की सराहना की और कहा कि इससे विकास अनुमति और लायसेंस प्राप्त करने में बेहद सुविधा होगी। हमें इधर-उधर नहीं भटकना होगा। काम सहजता के साथ होगा। समय की बचत भी होगी। कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि, यह ऑनलाइन व्यवस्था एक अभिनव व्यवस्था है। कॉलोनाईजर और डेवलपर्स के लिए बेहद मददगार होगी। कॉलोनाईजर और डेवलपर्स के सुझाव और उनके अनुभव के आधार पर पोर्टल को ओर अधिक बेहतर तथा सुविधाजनक बनाया जायेगा।

बताया गया कि, इस पोर्टल में कॉलोनियों की विकास अनुमति जारी करने और लायसेंस बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन लिये जायेंगे। आवेदकों को आवेदन के निराकरण की अद्यतन स्थिति भी पता चल सकेगी। आवेदन निराकृत होते ही व्हाट्स ऐप पर भी आवेदकों को जानकारी मिल जायेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के शुल्क भी ऑनलाइन प्राप्त होंगे।

बैठक में कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि, लायसेंस और अनुमति देने की प्रक्रिया अब सरल हो गई है। इसको देखते हुए लायसेंस और अनुमति देने के लिए हर सप्ताह बैठक होगी। सम्पन्न हुई बैठक में पोर्टल का जीवंत प्रदर्शन भी दिखाया गया।

राजस्व प्रकरणों के आवेदकों से फोन पर लिये गए फीडबैक

इंदौर जिले में आवेदकों की संतुष्टि के साथ निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ राजस्व प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। राजस्व प्रकरणों के निराकरण में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिले में नवाचार के तहत राजस्व प्रकरणों के निराकरण के संबंध में आवेदकों से उनका फीडबैक लेने और संतुष्टि का स्तर पता करने के लिए सुशासन संवाद केंद्र की स्थापना की गई है। इस केंद्र ने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया है। इस केन्द्र के माध्यम से लिये गये फीडबैक में आवेदकों की असंतुष्टि और खराब गुणवत्ता मिलने पर संबंधित तहसीलदारों के विरूद्ध विभागीय जांच प्रारंभ की जायेगी।

उन्होंने निर्देश दिये कि, सीमांकन के प्रकरणों के निराकरण को प्राथमिकता दी जाये। सीमांकन के प्रकरण निराकरण होने के तुरंत पश्चात आवेदक को फील्ड बुक दी जाये। पुराने लंबित सीमांकन के प्रकरण तुरंत निराकृत करें। फार्मर रजिस्ट्री बनाने का कार्य इसी माह के अंत तक पूरा कर लिया जाये। उन्होंने आरआरसी के प्रकरण भी निराकृत करने की निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि, जारी वित्तीय वर्ष के कुछ ही दिन शेष है, इसको देखते हुए डायवर्सन सहित अन्य राजस्व वसूली को तेज करते हुए लक्ष्य पूर्ण करें।

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