मध्यप्रदेश का इंजीनियरिंग चमत्कार: स्लीमनाबाद टनल से बदलेगी विंध्य-महाकौशल की तस्वीर, 1450 गांवों को मिलेगा सिंचाई का लाभ

लगभग 12 किमी लंबी स्लेमानाबाद सुरंग, नर्मदा से सोन बेसिन तक पानी ले जाएगी, जिससे विंध्य और मैकाल क्षेत्रों के 1450 गांवों में स्थायी सिंचाई संभव होगी और ग्रामीण आजीविका को सहारा मिलेगा। इस परियोजना में तकनीकी और धन की चुनौतियां आईं, लेकिन यह सिंचाई, पीने के पानी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को स्थिर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

मध्यप्रदेश की महत्वाकांक्षी स्लीमनाबाद टनल परियोजना अब लगभग पूरी होने की कगार पर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी जिले में इस ऐतिहासिक परियोजना का निरीक्षण किया और इसे प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी सौगात बताया। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह टनल नर्मदा के पानी को गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से सोन नदी बेसिन तक पहुंचाएगी, जिससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के छह जिलों के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।

Sleemanabad Tunnel Nears Completion

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की खेती, पेयजल व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने वाली साबित होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि परियोजना का निर्माण अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुआ। शुरुआती वर्षों में टनल निर्माण की गति धीमी रही, लेकिन वर्ष 2016 से जर्मनी से लाई गई अत्याधुनिक मशीनों की मदद से कार्य में तेजी लाई गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में नई सरकार बनने के बाद निर्माण एजेंसी ने काम छोड़ने की स्थिति बना दी थी।

मशीनें पुरानी हो चुकी थीं और सीमित संसाधनों के बावजूद सरकार ने परियोजना को पूरा करने का संकल्प नहीं छोड़ा। लगातार प्रयासों के बाद अब यह परियोजना पूर्णता की ओर बढ़ रही है।

विंध्य क्षेत्र के लिए अमृतधारा बनेगी टनल

मुख्यमंत्री ने कहा कि विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद जल संकट का सामना करता रहा है। यह टनल कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना सहित पूरे क्षेत्र के लिए अमृतधारा साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह विज्ञान और इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है, जिसके माध्यम से नर्मदा का जल पहली बार गंगा बेसिन के सोन नदी क्षेत्र तक पहुंचेगा और सूखे इलाकों में हरियाली लाएगा।

100 साल तक सुरक्षित रहेगी संरचना

मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग 11.95 किलोमीटर लंबी इस टनल को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह अगले 100 वर्षों तक सुरक्षित रहेगी। भीषण भूकंप की स्थिति में भी इसकी संरचना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कई स्थानों पर टनल जमीन से करीब 120 फीट नीचे बनाई गई है।

उन्होंने परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग 1600 करोड़ रुपये की इस परियोजना में केंद्र सरकार ने करीब 275 करोड़ रुपये का सहयोग दिया है।

किसानों के लिए बड़ी सौगात

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी तीन महीनों में रबी सीजन के लिए लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से न केवल सिंचाई का रकबा बढ़ेगा, बल्कि कई स्थानों पर जल विद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर न बेचें। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधा मिलने के बाद यह क्षेत्र कृषि उत्पादन में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों को भी चुनौती देने की क्षमता रखेगा।

निर्माण के दौरान सामने आईं बड़ी चुनौतियां

स्लीमनाबाद टनल का निर्माण देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग परियोजनाओं में माना जा रहा है। विंध्य पर्वतमाला की लगभग 40 मीटर ऊंची रिज लाइन को भेदना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। निर्माण के दौरान इंजीनियरों को मार्बल, लाइमस्टोन और डोलोमाइट जैसी कठोर चट्टानों का सामना करना पड़ा। भूमिगत विशाल गुफाएं, अस्थिर मिट्टी और लगातार जल रिसाव ने कार्य को और कठिन बना दिया।

सबसे बड़ी चुनौती तब सामने आई जब टनल के भीतर हर मिनट लगभग 25 हजार लीटर पानी का तेज रिसाव होने लगा। इस दौरान उपयोग में लाई गई अमेरिकी मशीन भी क्षतिग्रस्त हो गई। बाद में जर्मनी की अत्याधुनिक हेरेंकनेख्ट (Herrenknecht) मशीन मंगाकर विशेष ग्राउटिंग तकनीक से निर्माण कार्य पूरा किया गया। विशेष बात यह रही कि टनल घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के नीचे से होकर गुजरती है, लेकिन निर्माण के दौरान कहीं भी किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई।

लागत बढ़कर 1610 करोड़ रुपये पहुंची

इस परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2008 में हैदराबाद की निर्माण एजेंसी मेसर्स पटेल-एसईडब्ल्यू (संयुक्त उपक्रम) को सौंपा गया था। प्रारंभिक लागत 799 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, लेकिन कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों, आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के कारण परियोजना की लागत बढ़कर 1610.47 करोड़ रुपये हो गई।

वर्तमान में परियोजना का 96.66 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। मुख्य टनल और ओपन कट नहर का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है।

छह जिलों को मिलेगा स्थायी लाभ

परियोजना के संचालन के बाद बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। सीधे कमांड क्षेत्र में कटनी की 21,823 हेक्टेयर, मैहर की 54,227 हेक्टेयर, सतना की 1,04,970 हेक्टेयर, रीवा की 3,532 हेक्टेयर तथा पन्ना की 448 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।

सरकार का आगे का रोडमैप

राज्य सरकार के अनुसार, परियोजना के शेष कार्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। अब तक 44,160 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक 87,433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक 1.54 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

इसके अलावा इस परियोजना से जल संसाधन विभाग की अन्य योजनाओं के तहत 30,307 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को भी पानी उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्लीमनाबाद टनल परियोजना विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि, जल प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव का आधार बनेगी।

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