NEET विवाद: इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई, आंधी-तूफान में छूटे पेपर पर उठे सवाल, 50 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल

Indore News: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) को लेकर एक बड़ा विवाद अब इंदौर हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंच चुका है। आज कोर्ट में उन छात्रों की सुनवाई होगी, जो 5 मई को परीक्षा के दिन प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गए थे और परीक्षा नहीं दे सके।

इन छात्रों ने अब दोबारा परीक्षा करवाने और निष्पक्ष परिणाम घोषित करने की मांग को लेकर याचिकाएं दायर की हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से हाईकोर्ट में जवाब पेश किया जाएगा।

NEET controversy Hearing in Indore High Court questions raised on paper left in storm petitions filed

इंदौर और उज्जैन के छात्र प्रभावित, 50 से अधिक याचिकाएं दाखिल

NEET परीक्षा के दिन इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में जबर्दस्त आंधी-तूफान और बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। कई परीक्षा केंद्रों पर बिजली चली गई थी, पेपर मिलने में देर हुई, और कुछ स्थानों पर तो छात्रों को समय से पहले परीक्षा कक्ष से बाहर कर दिया गया। इन परिस्थितियों में सैकड़ों छात्र परीक्षा नहीं दे सके या अधूरी परीक्षा देने को मजबूर हुए।

इसी को आधार बनाते हुए अब तक 50 से ज्यादा याचिकाएं इंदौर हाईकोर्ट में दाखिल की जा चुकी हैं, जिनमें से 10 से अधिक उज्जैन जिले से संबंधित हैं। छात्रों और उनके परिजनों ने NTA पर आरोप लगाया है कि उसने परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था में लापरवाही बरती और प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति के बावजूद वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए।

NEET controversy: छात्रों की प्रमुख मांगें

  • याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की है:
  • जिन केंद्रों पर पेपर समय पर नहीं मिला, वहां दोबारा परीक्षा करवाई जाए।
  • इंदौर, उज्जैन और प्रभावित शहरों को छोड़कर बाकी शहरों के छात्रों के रिजल्ट जारी किए जाएं।
  • परीक्षा में हुए व्यवधान को ध्यान में रखते हुए प्रभावित छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था हो।

NEET controversy: NTA को आज देना है जवाब

इंदौर हाईकोर्ट ने NTA को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, जिसे आज सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि NTA यह कह सकता है कि परीक्षा देशभर में एक साथ आयोजित की गई थी और विशेष शहरों के लिए दोबारा परीक्षा कराना संभव नहीं है। हालांकि, याचिकाकर्ता छात्रों का कहना है कि यदि एक परीक्षा समान परिस्थितियों में नहीं हो सकी, तो उसकी वैधता पर सवाल उठते हैं।

कोर्ट का रुख अहम

आज की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह फैसला कर सकता है कि प्रभावित छात्रों के लिए कोई राहत दी जाएगी या नहीं। अगर कोर्ट यह मानता है कि परीक्षा निष्पक्ष नहीं रही, तो दोबारा परीक्षा करवाने का आदेश भी दिया जा सकता है। वहीं यदि NTA की दलीलें ठोस पाई गईं, तो छात्रों की उम्मीदों को झटका लग सकता है।

छात्रों और अभिभावकों में चिंता

इस पूरे विवाद ने उन हजारों छात्रों की चिंता बढ़ा दी है जो परीक्षा दे चुके हैं और अब परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रभावित छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों ने सालों मेहनत की, लेकिन एक दिन की प्रशासनिक लापरवाही ने सब कुछ दांव पर लगा दिया।

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें इंदौर हाईकोर्ट की आज की सुनवाई पर टिकी हैं। क्या न्यायालय प्रभावित छात्रों के पक्ष में कोई ठोस निर्देश देगा या NTA के पक्ष में फैसला आएगा, यह कुछ ही घंटों में साफ हो जाएगा।

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