MP News: इंदौर-देवास हाईवे पर महाजाम, तीन मौतों ने खोली प्रशासन की लापरवाही की पोल
MP News: मध्य प्रदेश के इंदौर-देवास हाईवे पर पिछले तीन दिनों से लगे भयावह जाम ने न केवल यात्रियों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, बल्कि तीन लोगों की जान भी ले ली है। इस गंभीर स्थिति ने केंद्र और राज्य सरकार की यातायात प्रबंधन की तैयारियों और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "गडकरी जी, ये तो नहीं देखा होगा आपने? इंदौर-देवास रोड पर भयानक जाम शुरू हुए तीन दिन हो गए, लेकिन अब तक खुल नहीं सका। इस जाम में तीन लोगों की मौत हो चुकी है - दो ने एम्बुलेंस में दम तोड़ा, क्योंकि सरकार ट्रैफिक तक नहीं संभाल सकी!"

जाम की वजह और उसका दर्दनाक परिणाम
इंदौर-देवास हाईवे पर अर्जुन बड़ोदा के पास एक पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके कारण बार-बार जाम की स्थिति बन रही है। बुधवार, 25 जून 2025 से शुरू हुआ यह जाम 28 जून तक 32 घंटों से अधिक समय तक जारी रहा। नईदुनिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जाम की शुरुआत डकाच्या के आसपास हुई और धीरे-धीरे यह मांगलिया से शिप्रा तक फैल गया, जिससे 10 किलोमीटर से अधिक लंबी वाहनों की कतार लग गई।
इस जाम का सबसे दुखद पहलू रहा तीन लोगों की मौत। मालवा अभीतक की खबर के अनुसार, 62 वर्षीय कमल पांचाला, जो अपने परिवार के साथ इंदौर से देवास जा रहे थे, जाम में करीब एक घंटे तक फंसे रहने के कारण कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो गए। जब तक उन्हें देवास के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। इसके अलावा दो अन्य व्यक्तियों, बलराम पटेल और संदीप पटेल, की भी इस जाम में फंसने के कारण मृत्यु हो गई। एक मामले में मरीज को समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण और दूसरे मामले में एम्बुलेंस में ऑक्सीजन की कमी के कारण जान गंवानी पड़ी।
प्रशासन की लापरवाही और जनता का आक्रोश
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घटना को सरकार और NHAI की घोर लापरवाही का परिणाम बताया। उन्होंने X पर लिखा, "लापरवाही की इंतहा है - न मंत्री दिखे, न सांसद, NHAI के अधिकारी नदारद, और स्थानीय प्रशासन मौन।" उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन मौतों की जिम्मेदारी NHAI के उन अधिकारियों की है, जिन्होंने सर्विस रोड को दुरुस्त किए बिना पुल निर्माण शुरू कर दिया, या फिर स्थानीय प्रशासन की, जो तीन दिन तक जाम की स्थिति पर मौन रहा?
NHAI और स्थानीय प्रशासन की नाकामी
जाम की मुख्य वजह अर्जुन बड़ोदा के पास चल रहा पुल निर्माण कार्य है, जिसके लिए NHAI ने पहले से कोई ठोस ट्रैफिक डायवर्जन योजना नहीं बनाई। नईदुनिया की रिपोर्ट में बताया गया कि छोटे वाहनों के इधर-उधर घुसने से जाम की स्थिति और बिगड़ गई। इसके अलावा, स्थानीय प्रशासन ने जाम को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए।
नितिन गडकरी और सरकार का रवैया
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, जो सड़क सुरक्षा और हाईवे निर्माण को लेकर बड़े-बड़े दावे करते रहे हैं, इस मामले में पूरी तरह खामोश रहे। गडकरी ने हाल ही में सड़क सुरक्षा को लेकर कई घोषणाएं की थीं, जिसमें 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50% कमी लाने का लक्ष्य शामिल है। उन्होंने खराब सड़क डिजाइन और घटिया निर्माण कार्यों को दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बताया था। हालांकि, इंदौर-देवास हाईवे की स्थिति उनके इन दावों पर सवाल उठाती है। "
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब इंदौर-देवास हाईवे पर जाम की समस्या ने लोगों को परेशान किया हो। नईदunia की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, इस मार्ग पर पहले भी कई बार जाम लग चुका है, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हुई। इसके बावजूद, न तो NHAI ने और न ही स्थानीय प्रशासन ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाए।
सड़क सुरक्षा पर गडकरी की घोषणाएं और हकीकत
नितिन गडकरी ने हाल ही में सड़क सुरक्षा को लेकर कई बड़े कदमों की घोषणा की थी। जनवरी 2025 में उन्होंने बताया कि 2024 में भारत में सड़क हादसों में 1.80 लाख लोगों की मौत हुई, जिनमें से 30,000 मौतें केवल हेलमेट न पहनने के कारण हुईं। उन्होंने कैशलेस इलाज की योजना और हिट-एंड-रन मामलों में मृतकों के लिए 2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा भी की थी। हालांकि, इंदौर-देवास हाईवे पर हुई इन मौतों ने सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के उनके दावों की पोल खोल दी।
आगे क्या?
इस घटना ने न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि यह भी सवाल उठाया है कि आखिर हाईवे निर्माण के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन की योजना क्यों नहीं बनाई जाती? उमंग सिंघार ने मांग की है कि सरकार इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान दे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा, "सरकार बताए इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? वो NHAI अधिकारी, जिन्होंने सर्विस रोड दुरुस्त किए बिना पुल निर्माण शुरू कर दिया? या फिर स्थानीय प्रशासन, जो जाम लगने के बावजूद तीन दिन तक सोता रहा, और मौतों के बाद जागा?"












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