Indore News: इंदौर लोकायुक्त ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर को रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा
इंदौर लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्याणपुरा के एक मेडिकल ऑफिसर को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
इस कार्रवाई से न केवल लोकायुक्त के भ्रष्टाचार विरोधी रवैये की झलक मिलती है, बल्कि यह सरकारी कर्मचारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि अब किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया जाएगा।

मामला कैसे उजागर हुआ?
मामला 29 अक्टूबर 2024 का है, जब ग्राम कल्लीपुरा, जिला झाबुआ निवासी दिनेश मकवाना के काका के लड़के रमेश की तालाब में डूबने से मृत्यु हो गई थी। मृतक के शव का पोस्टमार्टम 30 अक्टूबर 2024 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्याणपुरा में किया गया था।
आवेदक दिनेश मकवाना ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए उन्हें डॉक्टर द्वारा रिश्वत की मांग की गई थी। आरोपी डॉक्टर, डॉ अर्पित कुमार नायक ने दिनेश से 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। दिनेश ने इस बारे में पुलिस अधीक्षक श्री राजेश सहाय, लोकायुक्त इंदौर से शिकायत की और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने का संकल्प लिया। शिकायत के सत्यापन के बाद, लोकायुक्त ने जांच शुरू की और कार्रवाई की योजना बनाई।
रिश्वत की राशि में कमी और डॉक्टर का शक
15 नवंबर 2024 को, लोकायुक्त ने शिकायत की जांच के बाद कार्रवाई को अंजाम देने के लिए आवेदक को आरोपी डॉक्टर को रिश्वत की राशि देने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। इस बार आरोपी डॉक्टर को शक हुआ और उसने रिश्वत राशि स्वीकार करने से मना कर दिया।
आवेदक द्वारा रिश्वत की राशि देने की कोशिश की गई, लेकिन आरोपी ने उसे यह कहते हुए मना कर दिया कि वह अब रिश्वत नहीं लेगा। डॉक्टर के इस व्यवहार से लोकायुक्त टीम को कार्रवाई में सफलता मिली और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया गया।
आरोपी पर कार्रवाई: क्या था आरोप?
डॉ अर्पित कुमार नायक पर आरोप था कि उसने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने के एवज में दिनेश मकवाना से 50,000 रुपये की रिश्वत मांगी। हालांकि, जांच के दौरान रिश्वत की राशि 40,000 रुपये पर सिमट गई। आरोपी डॉक्टर द्वारा की गई रिश्वत की मांग और उसकी मंशा को लेकर लोकायुक्त द्वारा कार्यवाही की गई और उसे कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
ट्रेप दल की सफलता
इंदौर लोकायुक्त की इस कार्यवाही में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी श्री दिनेश चंद्र पटेल (डीएसपी) और श्री अनिरुद्ध वाधिया (डीएसपी) के नेतृत्व में लोकायुक्त की पूरी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कार्रवाई को सफल बनाने में लोकायुक्त के अन्य अधिकारी जैसे इंस्पेक्टर राहुल गजभिए, प्रधान आरक्षक प्रमोद यादव, आरक्षक पवन पटोरिया, आदित्य भदौरिया, अनिल परमार, चंद्रमोहन बिष्ट और कृष्णा अहिरवार ने भी योगदान दिया।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने न केवल अवैध धन उगाही के खिलाफ सख्त संदेश दिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि अब सरकारी महकमे में भ्रष्टाचार को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लोकायुक्त की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई
पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त जयदीप प्रसाद के दिशा-निर्देश पर इंदौर लोकायुक्त इकाई द्वारा की गई यह कार्यवाही भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम है। लोकायुक्त इंदौर ने इस मामले में जितनी तत्परता से कार्रवाई की, उसने यह साबित कर दिया कि सरकारी कर्मचारियों के द्वारा रिश्वत व भ्रष्टाचार की कोई भी घटना अब छुप नहीं सकती।
यह कार्रवाई यह संदेश भी देती है कि लोकायुक्त इस तरह की कार्यवाहियों में पूरी तरह से सक्रिय है और वह किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी को भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर सजा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 के तहत आरोप
आरोपी डॉक्टर डॉ. अर्पित कुमार नायक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस धारा के तहत रिश्वत लेने, देने या मांगने वाले दोनों पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है। लोकायुक्त की टीम ने पूरी साक्ष्य संग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया है।












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