MP News: इंदौर में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, रिश्वत लेते केनरा बैंक मैनेजर रंगे हाथों गिरफ्तार!
MP News: मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और सख्त कार्रवाई करते हुए केनरा बैंक के ब्रांच मैनेजर को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कदम उठाने के निर्देशों के तहत की गई।
आइए, इस सनसनीखेज मामले की पूरी कहानी जानते हैं, जिसमें एक बैंक मैनेजर ने सरकारी योजना के तहत स्वीकृत राशि को खाते में डालने के लिए मोटी रिश्वत की मांग की थी।

शिकायतकर्ता और मामला: डेयरी निर्माण के लिए स्वीकृत राशि का खेल
शिकायतकर्ता श्री विनोद लोवंशी, निवासी रामपुरी रेयक, पोस्ट निशानियां, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, ने लोकायुक्त पुलिस को बताया कि उन्हें आचार्य विद्यासागर योजना के तहत दूध डेयरी निर्माण के लिए शासन से 6,00,000 रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। इस राशि को उनके बैंक खाते में जमा कराने के लिए केनरा बैंक, छनेरा नया हरसूद शाखा के ब्रांच मैनेजर राधा रमन सिंह राजपूत ने उनसे 75,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी।
राधा रमन ने रिश्वत की राशि को तीन किश्तों में लेने की योजना बनाई थी। पहली किश्त के रूप में उन्होंने पहले ही 10,000 रुपये ले लिए थे। दूसरी किश्त के रूप में 5,000 रुपये 5 अगस्त 2025 को लेने की बात तय हुई थी, जबकि तीसरी किश्त तब दी जानी थी, जब राशि शिकायतकर्ता के खाते में जमा हो जाती।
लोकायुक्त की चाक-चौबंद रणनीति: रंगे हाथों पकड़ा गया आरोपी
विनोद लोवंशी ने इस रिश्वतखोरी की शिकायत विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त कार्यालय, इंदौर के पुलिस अधीक्षक श्री राजेश सहाय को की। शिकायत का सत्यापन करने पर यह सही पाया गया कि ब्रांच मैनेजर राधा रमन सिंह राजपूत ने रिश्वत की मांग की थी। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 अगस्त 2025 को एक ट्रेप का आयोजन किया।
जैसे ही राधा रमन ने शिकायतकर्ता से 5,000 रुपये की दूसरी किश्त अपने हाथों में ली, आसपास पहले से तैनात लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों धर दबोचा। इस कार्रवाई में डीएसपी लोकायुक्त सुनील तालान के नेतृत्व में निरीक्षक सचिन पटेरिया, आरक्षक विजय सेलार, अनिल परमार, पवन पटोरिया, टाइपिस्ट प्रभात मोरे, चालक शेरसिंह ठाकुर और दो पंच साक्षी शामिल थे।
कानूनी कार्रवाई: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी राधा रमन सिंह राजपूत के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया है। इस धारा के तहत रिश्वत लेने के अपराध में सख्त सजा का प्रावधान है, जिसमें सात साल तक की कैद और जुर्माना शामिल हो सकता है। पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या आरोपी ने पहले भी इस तरह की रिश्वतखोरी की है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की सख्ती
महानिदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सभी इकाइयों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस ट्रेप कार्रवाई को इंदौर लोकायुक्त इकाई की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। यह कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचारियों के लिए एक चेतावनी है, बल्कि आम जनता को यह भरोसा भी दिलाती है कि लोकायुक्त उनकी शिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है।
भ्रष्टाचार का काला चेहरा: सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग
यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि कैसे सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में भ्रष्टाचार बाधा बन रहा है। आचार्य विद्यासागर योजना जैसी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई हैं, लेकिन राधा रमन जैसे लोग अपने निजी फायदे के लिए इन योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएं न केवल लाभार्थियों का विश्वास तोड़ती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं।












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