Indore News: कर्बला मैदान पर मेला आयोजन के लिए अब निगम की अनुमति अनिवार्य, मेयर पुष्यमित्र भार्गव का सख्त रुख
इंदौर के कर्बला मैदान, जो शहर के मध्य में लालबाग के पास स्थित 6.7 एकड़ की बहुमूल्य जमीन है, अब किसी भी आयोजन के लिए इंदौर नगर निगम (IMC) की पूर्व अनुमति के बिना उपयोग नहीं किया जा सकता।
यह निर्देश महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने 27 जून 2025 को स्पष्ट रूप से जारी किया, जिसमें उन्होंने जोर देकर कहा कि कर्बला मैदान नगर निगम की मालिकाना जमीन है और इस पर कोई भी आयोजन, खासकर प्रतिवर्ष होने वाला मेला, बिना निगम की अनुमति के नहीं हो सकता। इस घोषणा ने शहर में एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि कर्बला मैदान पर वर्षों से मोहर्रम के अवसर पर मेला और ताजिए ठंडे करने की धार्मिक परंपरा चली आ रही है।

कोर्ट के फैसले ने बदला समीकरण
कर्बला मैदान को लेकर लंबे समय से चला आ रहा वक्फ बोर्ड और इंदौर नगर निगम के बीच का विवाद हाल ही में कोर्ट के फैसले के बाद समाप्त हो गया। 14 सितंबर 2024 को कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्बला मैदान की 6.7 एकड़ जमीन का मालिकाना हक इंदौर नगर निगम का है, और वक्फ बोर्ड का इस जमीन पर कोई दावा नहीं बनता। इस फैसले के बाद 19 सितंबर 2024 को महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगर निगम के मेयर-इन-काउंसिल (MiC) सदस्यों-अश्विनी शुक्ला, निरंजन सिंह चौहान, अभिषेक शर्मा बबलू, और नंदकिशोर पहाड़िया-के साथ मौके पर पहुंचे और जमीन पर नगर निगम के मालिकाना हक का बोर्ड लगा दिया। महापौर ने इसे शहर के विकास के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि यह फैसला इंदौर की प्रगति में मील का पत्थर साबित होगा।
मेले के लिए अनुमति अनिवार्य
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने कर्बला मैदान पर ताजिए ठंडे करने की धार्मिक परंपरा को जारी रखने की अनुमति दी है, और इस धार्मिक प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी। हालांकि, मेले जैसे बड़े आयोजनों के लिए अब आयोजकों को नगर निगम में विधिवत आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही, निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद ही निगम द्वारा आवेदन पर विचार किया जाएगा। महापौर ने कहा, "कर्बला मैदान नगर निगम की संपत्ति है। इस पर कोई भी आयोजन बिना अनुमति के नहीं हो सकता। नगर निगम यह तय करेगा कि इस जमीन का उपयोग किस तरह किया जाए। धार्मिक परंपराएं पूरी की जा सकती हैं, लेकिन मेले के लिए नियमों का पालन करना होगा।"
सामाजिक प्रतिनिधियों से मुलाकात
इस मुद्दे पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदायों के प्रतिनिधियों ने महापौर से मुलाकात की और अपनी बात रखी। महापौर ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि मेला आयोजित करना है, तो नगर निगम को औपचारिक आवेदन देना होगा। इस आवेदन की सम review होगी, और नियमों के अनुसार ही अनुमति प्रदान की जाएगी। महापौर ने यह भी जोड़ा कि यह कदम सार्वजनिक भूमि के सुव्यवस्थित उपयोग और कानूनी प्रक्रिया के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इस कदम से न केवल मैदान का दुरुपयोग रोका जाएगा, बल्कि आयोजनों की व्यवस्था भी पारदर्शी और नियमबद्ध होगी।
कर्बला मैदान का इतिहास और विवाद
कर्बला मैदान लंबे समय से इंदौर में सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। विशेष रूप से मोहर्रम के दौरान यहां ताजिए ठंडे करने की परंपरा और मेले का आयोजन होता रहा है। हालांकि, वक्फ बोर्ड ने दावा किया था कि यह जमीन उनकी है और 150 वर्षों से यहां धार्मिक कार्य हो रहे हैं। लेकिन कोर्ट में यह साबित नहीं हो सका, और अंततः जमीन का मालिकाना हक नगर निगम को मिला। इस फैसले के बाद नगर निगम ने मैदान पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया और अब इसे शहर के विकास और सार्वजनिक उपयोग के लिए नियोजित करने की योजना बना रहा है।
महापौर का विजन: पारदर्शिता और विकास
महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जो 2022 में इंदौर के 24वें महापौर के रूप में चुने गए, ने हमेशा से शहर के विकास और पारदर्शिता पर जोर दिया है। उन्होंने कर्बला मैदान के उपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह जमीन इंदौर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे पहले भी, महापौर ने एकीकृत करदाता आईडी सिस्टम और डिजिटल पोर्टल जैसे नवाचारों को लागू करने के लिए कदम उठाए हैं, जो नागरिक सेवाओं को सरल और पारदर्शी बनाने में मददगार साबित हुए हैं। कर्बला मैदान के लिए अनुमति प्रक्रिया को अनिवार्य करना भी इसी दिशा में एक कदम है।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं
कर्बला मैदान पर मेले के लिए अनुमति की अनिवार्यता ने स्थानीय समुदायों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। कुछ संगठनों ने इसे नियमों का पालन करने वाला कदम बताया, जबकि कुछ ने इसे धार्मिक आयोजनों पर अंकुश लगाने की कोशिश के रूप में देखा। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज है। एक X यूजर ने लिखा, "नगर निगम का यह कदम पारदर्शिता लाएगा, लेकिन धार्मिक परंपराओं का सम्मान भी जरूरी है।" वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, "महापौर का फैसला सही है। सार्वजनिक जमीन का दुरुपयोग रोकना जरूरी है।"












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