Hingot yuddh : जानिए क्या होता है हिंगोट युद्ध, जिसमें बरसते हैं आग के गोले

दीपावली के दूसरे दिन होने वाला हिंगोट युद्ध अबकी बार 26 अक्टूबर को आयोजित होगा, जहां सूर्य ग्रहण के कारण अबकी बार हिंगोट युद्ध दीपावली के तीसरे दिन आयोजित किया जा रहा है। वहीं युद्ध को लेकर प्रशासन ने भी अनुमति दे दी है, जहां प्रशासन, युद्ध को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए सुरक्षा प्रबंध कर रहा है। तमाम अधिकारी हिंगोट युद्ध स्थल का जायजा लेते नजर आ रहे हैं। साथ ही हिंगोट युद्ध के दौरान पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था हो सके इसको लेकर लगातार तैयारियां की जा रही है।

कुछ इस तरह होता है युद्ध

कुछ इस तरह होता है युद्ध

दीवाली का पर्व मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जहां अब दीपावली के बाद अलग-अलग परंपराओं को निभाने का सिलसिला भी शुरू होगा। वहीं इंदौर शहर के पास गौतमपुरा में हर साल दीपावली के बाद हिंगोट युद्ध का आयोजन किया जाता है, जिसमें कलंगी और तुर्रा दो सेनाओं के बीच हिंगोट युद्ध होता है, जहां दोनों ही सेनाएं एक दूसरे पर हिंगोट बरसाती है। हिंगोट देखने प्रदेश भर से लोग गौतमपुरा पहुंचते हैं, जहां लाखों की संख्या में लोग हिंगोट युद्ध देखते हैं।

आमने-सामने होंगी सेनाएं

आमने-सामने होंगी सेनाएं

गौतमपुरा में होने वाले हिंगोट युद्ध को लेकर योद्धाओं में उत्साह नजर आ रहा है, जहां योद्धाओं ने हिंगोट युद्ध के लिए अपने - अपने स्तर पर तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। दोनों ही सेनाओं के योद्धा भगवान देवनारायण के मंदिर में पहुंचकर आशीर्वाद लेते हैं। वहीं इसके बाद हिंगोट युद्ध का आरंभ होता है, 2 साल से हिंगोट युद्ध का आयोजन नहीं हो सका था, जहां हिंगोट युद्ध को लेकर योद्धाओं में उत्साह नजर आ रहा है। वहीं अबकी बार भी हिंगोट युद्ध को देखने के लिए लाखों की संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद जताई जा रही है।

कुछ इस तरह होता है युद्ध का आरंभ

कुछ इस तरह होता है युद्ध का आरंभ

कलंगी और तुर्रा दोनों ही दल के योद्धा हिंगोट युद्ध से कई दिनों पहले ही इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं, जहां युद्ध के दिन दोनों ही दलों के योद्धा भगवान देवनारायण का आशीर्वाद लेने के बाद मैदान में आमने-सामने खड़े हो जाते हैं, और युद्ध का संकेत मिलते ही एक दूसरे पर हिंगोट बरसाने शुरू कर देते हैं। इस दौरान दोनों ही दलों के योद्धा अपने हाथों में ढाल और हिंगोट लिए नजर आते हैं। इस दौरान मैदान का नजारा कुछ इस तरह लगता है कि, पूरे मैदान में हिंगोट - हिंगोट नजर आती है। दीपावली के दूसरे दिन होने वाला हिंगोट युद्ध अबकी बार 26 अक्टूबर को आयोजित होगा, जहां सूर्य ग्रहण के कारण अबकी बार हिंगोट युद्ध दीपावली के तीसरे दिन आयोजित किया जा रहा है।

बेहद पुरानी है परंपरा

बेहद पुरानी है परंपरा

जानकारी के मुताबिक हिंगोट युद्ध की परंपरा बेहद ही पुरानी है, जहां गौतमपुरा क्षेत्र में रियासत की सुरक्षा में तैनात सैनिक का मुगल सेना के घुड़ सवारों पर हिंगोट दागते थे। सटीक निशाना साधने के लिए यह लगातार प्रेक्टिस किया करते थे। यही कारण है कि, प्रेक्टिस धीरे-धीरे परंपरा में परिवर्तित हो गई, जहां अब यह परंपरा हिंगोट युद्ध के नाम से प्रचलित है, जिसे देखने देश ही नहीं बल्कि दुनिया से लोग इंदौर के गौतमपुरा आते हैं।

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