कचरा देख लड़की पर फिदा हुआ लड़का, फिर दूल्हा बन साइकिल से निकाली बारात, दुल्हनियां बोली- 'कमाल कर दिया'
Unique wedding indore: शाही शान शौकत भरी शादियों के दौर में कोई लड़की पसंद फिर शादी करने के लिए क्या नहीं करता? मध्य प्रदेश के इंदौरी बाबू ने भी कुछ हटकर किया। लड़की से उसके घर का कचरा देखकर शादी की। तरीका भी बड़ा मजेदार है

Unique wedding indore: 'शादी का बंधन' किसी दुकान या मॉल में खरीदने वाली वाली चीज नहीं होती, कि बाद में पसंद न आने पर बदल लिया जाए। मॉर्डन कल्चर के दौर में मध्य प्रदेश के इंदौर में जिंदगी के सात फेरे लेने वाले नए कपल की ये कहानी लाजबाव हैं।
इंदौर खंडवा रोड साईं बाग़ कॉलोनी में रहने वाले अमोल वाधवानी वहां से करीब 3 किलोमीटर दूर खातीवाला टैंक क्षेत्र में रहने वाली डिम्पल भाटिया से शादी के बंधन में बंधे। ९ जून को दोनों की अनूठे अंदाज में शादी हुई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं।
अमोल पेशे से रेडीमेड गारमेंट्स का व्यवसाय का करते है, तो वहीं उनकी जिंदगी का हमसफर बनी डिम्पल ने MBA की पढ़ाई पूरी की हैं। शादी की उम्र करीब आते ही अमोल और डिम्पल के घर वाले अच्छे रिश्ते की तलाश में थे। कवायद शुरू हुई तो अमोल के घरवालों को डिम्पल का पता चला।
यहां तक दोनों को नहीं मालूम था कि उनकी शादी की घर वाले कही बात कर रहे हैं। बाद में जब पता चला तो अमोल-डिम्पल ने पहले एक दूसरे की फोटो देखी। फिर दोनों के घर वालों की मर्जी से शादी की बात आगे बढ़ी।

डिम्पल ने अपने तरीके से अमोल की खूबियां परखी और आदतों को जाना तो वहीं अमोल उससे एक कदम आगे निकला। सिंधी समाज से ताल्लुक रखने वाला अमोल नॉनवेज खाना पसंद नहीं करता। डिम्पल भाटिया परिवार से है। उसने भी बताया कि वह नॉनवेज नहीं खाती।

फिर भी अमोल के दिल में कुछ शंका थी। वह बेहतर साइकिलिस्ट भी हैं। रोजाना सुबह घर से कई किलोमीटर साइकिलिंग करता हैं। सवाल था कि डिम्पल के घर के अंदर खान-पान और आदतों का कैसे पता लगाया जाए? जिससे किसी के संस्कारों और पारिवारिक माहौल का भी अहसास हो जाता हैं।
फूड हेबिट्स का कचरे से कनेक्शन
फिर साइकिलिंग के वक्त कुछ दिन किसी को बिना बताये अमोल डिम्पल की कॉलोनी जाने लगा। उस एरिया से डोर टू डोर कचरा कलेक्ट करने वाली नगर निगम की गाड़ी वाले से उसने दोस्ती की। अमोल ने डिम्पल के घर से करीब 15 दिन रोज निकलने वाले कचरे को देखा।

जब कचरे में नॉनवेज और दूसरी ना पसंद चीजे नहीं दिखी तब अमोल को भरोसा हुआ कि उसकी जिस लड़की से शादी की बात चल रही है, वह सात्विक है। साथ ही कचरे से उसके घर के माहौल का भी अहसास किया। फिर भरोसे की दीवार इतनी मजबूत हुई कि अमोल डिम्पल एक दूसरे पर फिदा हो गए।

दूसरों से जुदा वेडिंग सेरेमनी
करीब 6 महीने बाद शादी का दिन आया तो अमोल की वेडिंग सेरेमनी भी जुदा रही। घोड़ी-बग्घी के बजाय अमोल साइकिल पर सवार होकर बारात दुल्हन के घर बारात लेकर पहुंचा। बाराटियों के लिए भी वहीं रुल था, जो अमोल ने अपनाया। साइकिल पर सिंगल-डबल जैसे जिसको बना बाराती साथ में चले।
दुल्हन की भी साइकिल पर विदाई
न कोई तड़क-भड़क, कान फोड़ू डीजे साउंड और न ही बैंड बाजे। साधारण ढोल की थाप और बच्चों के बजाने वाली पुंगी को बजाकर बारात निकली। इन्ही व्यवस्थाओं में रास्ते भर खूब डांस भी हुआ फिर आगे शादी की सभी रस्म-रिवाज पूरे हुए। लड़की वालों को भी शादी का यह तरीका सरप्राइज रहा। सिंपल साधारण दुल्हन बनी डिंपल जब विदा हुई तो उसे भी अमोल साईकिल में डबल सीट बैठाकर अपने घर लाया।
हमारी खुशियां दूसरों को न बने तकलीफ
अमोल-डिंपल के साथ दोनों के घर वालों ने बताया कि ऐसा नहीं है कि उन्होंने दूसरों की तरह शादी करने में कंजूसी की। बल्कि आज के दौर में ऐसे आयोजन संदेश भी हैं। बारात वाले रास्ते में पटाखे फोड़ते और कान फोडू डीजे बजाते सड़क घेरकर शादी की खुशियां, खुशियां नहीं बल्कि 'तकलीफ' है। प्रकृति पर्यावरण की रक्षा हमारा कर्तव्य है। यदि दूसरे खुश रहेंगे तो हम भी खुश होंगे।
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